
उदित वाणी, जमशेदपुर : प्रदूषण नियंत्रण में विफलता, करोड़ों रुपये के जल कर बकाया और कैप्टिव पावर प्लांट की अनदेखी से परेशान होकर बिहार स्पंज आयरन लिमिटेड (बीएसआईएल) के मुख्य ठेकेदार वनराज स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड ने शुक्रवार से प्लांट का संचालन पूर्णतः ठप्प कर दिया है. यह जानकारी वनराज स्टील्स के कॉमर्शियल हेड मुकेश बरेलिया ने दी. उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में प्लांट को चलाना संभव नहीं रह गया है. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि जब तक प्रदूषण नियंत्रण, जलकर बकाया और पावर प्लांट व्यवस्था दुरुस्त नहीं की जाती, तब तक प्लांट का संचालन पुनः शुरू नहीं किया जाएगा.
कैप्टिव पावर प्लांट हटाया, डब्ल्यूएचआरबी अब तक नहीं लगा
वनराज स्टील्स के अनुसार बीएसआईएल ने पुराना कैप्टिव पावर प्लांट जर्जर बताकर उसे हटाने और उसके स्थान पर डब्ल्यूएचआरबी (वेस्ट हीट रिकवरी ब्वॉयलर) लगाने का आश्वासन दिया था. दावा किया गया था कि डब्ल्यूएचआरबी लगने से प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी और वेस्ट कोल फाइंस से बिजली उत्पादन संभव होगा. बताया गया कि मशीन की खरीद के लिए ऑर्डर भी जारी किया गया था, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हुआ, जबकि पुराने पावर प्लांट का स्क्रैप बेच दिया गया.
करोड़ों का अतिरिक्त बिजली भुगतान, फिर भी नुकसान
पिछले एक वर्ष से वनराज स्टील्स ने ग्रामीणों के हित और रोजगार को ध्यान में रखते हुए सरकार को करोड़ों रुपये बिजली भुगतान कर प्लांट संचालन जारी रखा.
लेकिन इससे कंपनी पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा और लाभ के स्थान पर कंपनी को लगातार नुकसान उठाना पड़ा. बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संचालन जारी रखना असंभव बताया गया है.
जल कर बकाया के कारण सीलिंग का आदेश
बीएसआईएल पर सरकार का करोड़ों रुपये जलकर बकाया होने के कारण प्रशासन ने मजिस्ट्रेट नियुक्त कर इंटेक वेल को सील करने का आदेश दिया था. वनराज स्टील्स ने पंचग्राम समिति और स्थानीय विधायक के सहयोग से सीलिंग रुकवाने का प्रयास किया, क्योंकि इससे हजारों लोगों के बेरोजगार होने की आशंका थी.
प्रदूषण से ग्रामीणों में रोष
कंपनी परिसर से निकलने वाले धुएं के कारण ग्रामीणों में लगातार आक्रोश बना हुआ है. वनराज स्टील्स का कहना है कि उच्च गुणवत्ता का ईएसपी (इलेक्ट्रॉनिक प्रेसीपिटेटर) लगाना अत्यंत आवश्यक है, जिसकी प्रक्रिया केवल बीएसआईएल स्तर पर लंबित है.
सड़क जाम से लाखों का नुकसान
कंपनी ने आरोप लगाया कि कुछ ग्रामीण निजी स्वार्थवश बार-बार सड़क जाम कर प्लांट को बाधित करते रहे हैं, जिससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ. कंपनी को कई बार कानूनी सहारा लेना पड़ा.
35 करोड़ रुपये फंसे होने का दावा
वनराज स्टील्स के अनुसार बीएसआईएल के पास उनका लगभग 35 करोड़ रुपये फंसा हुआ है, जिसमें शामिल हैं.
6 करोड़ – सिक्योरिटी डिपॉजिट
3.50 करोड़ – इलेक्ट्रिसिटी सिक्योरिटी डिपॉजिट
12 करोड़ – कैपिटल एक्सपेंडिचर
8 करोड़ – रॉ मटेरियल, बाय-प्रोडक्ट व फिनिश्ड प्रोडक्ट
1 करोड़ – बकाया टीडीएस
4.50 करोड़ – स्टोर आइटम्स

