
उदित वाणी, रांची : झारखंड राज्य सहकारी लाह क्रय-विक्रय एवं आहरण संघ लिमिटेड (झास्को लैंपफ) के एक दिवसीय सहकारिता समागम के अवसर पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए गए. इस दौरान भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा का अनावरण, एक आधुनिक कांफ्रेंस हॉल और भंडारण केंद्र का शिलान्यास किया गया. साथ ही, लैक संग्रहालय एवं मनोरंजन केंद्र का उद्घाटन भी हुआ.
झारखंड : देश में लाह उत्पादन का अग्रणी राज्य
झारखंड लाह उत्पादन में देश भर में प्रथम स्थान पर है. भारत में कुल लाह उत्पादन का लगभग 55 प्रतिशत योगदान अकेले झारखंड करता है. यह प्रदेश के आदिवासी और ग्रामीण किसानों के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत लाभकारी क्षेत्र बनता जा रहा है.
उच्च लाभ की संभावना
लाह उत्पादन किसानों के लिए अन्य फसलों की तुलना में कहीं अधिक मुनाफा देने वाला विकल्प बन चुका है. वर्तमान में 1 किलो लाह का बाजार मूल्य लगभग 1200 रुपये है.
सरकार की ओर से प्रोत्साहन और सहयोग
राज्य सरकार लाह उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठा रही है:
लाह केंद्रों का संचालन: सरकार अब लाह केंद्रों को 100 प्रतिशत क्षमता के साथ संचालित करने की दिशा में कार्यरत है.
टूल किट्स का वितरण: किसानों की सहायता हेतु समितियों को पूरी तरह से अनुदानित टूल किट्स दी जा रही हैं.
प्रशिक्षण कार्यक्रम: सिद्धको फेड के माध्यम से 10,000 किसानों और झास्को लैंपफ के जरिए 2,000 किसानों को लाह उत्पादन का प्रशिक्षण देने की योजना है.
किसानों से अपील: लाह से जोड़ें जीवन
सरकार और सहकारी संस्थाओं ने किसानों से अपील की है कि वे लाह उत्पादन से जुड़ें और इसे आजीविका का मुख्य स्रोत बनाएं.
“हर झारखंडी परिवार को लाह उत्पादन से जुड़ना चाहिए, ताकि यह राज्य लाह क्रांति का अग्रदूत बन सके.”
किसानों को सलाह दी गई है कि वे लाह केंद्रों को ‘दूसरा घर’ बनाएं, जहाँ वे प्रशिक्षण लेकर वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से इस व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें.

