
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटानगर रेलवे यार्ड में कार्य के दौरान करंट लगने से गंभीर रूप से झुलसे युवा तकनीशियन आशीष माझी की मौत के मामले में रेलवे प्रशासन और मृतक के परिजनों के बीच गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है. मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने की मांग को लेकर अब तक हुई दो दौर की वार्ताएं बेनतीजा रही हैं. इससे परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ गया है. परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक आशीष का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.
सोमवार को एरिया रेल मैनेजर (एआरएम) समीर सौरभ की अध्यक्षता में रेलवे अधिकारियों, मृतक के परिजनों, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की गई. करीब दो घंटे तक चली बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन मुआवजे की राशि, नौकरी और अन्य मांगों पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी. इससे पहले हुई वार्ता भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची थी.
बैठक के दौरान परिजनों ने रेलवे प्रशासन के समक्ष परिवार के एक सदस्य को रेलवे में स्थायी नियुक्ति तथा कम से कम 50 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग रखी. उनका कहना था कि हादसा रेलवे परिसर में ड्यूटी के दौरान हुआ, इसलिए मृतक के परिवार की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन को उठानी चाहिए. हालांकि रेलवे अधिकारियों ने आर्थिक सहायता और अनुकंपा के आधार पर रोजगार देने के मुद्दे पर सकारात्मक संकेत दिए, लेकिन किसी भी मांग पर स्पष्ट एवं लिखित आश्वासन नहीं दिया गया. इसी कारण बातचीत बिना किसी निर्णय के समाप्त हो गई.
परिजनों का कहना है कि केवल मौखिक भरोसे से काम नहीं चलेगा. जब तक रेलवे प्रशासन लिखित रूप में मुआवजा और नौकरी की घोषणा नहीं करता, तब तक अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी. लगातार दो बार वार्ता विफल होने के बाद परिवार और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है.
इस बीच क्षेत्र में जनाक्रोश भी तेज होने लगा है. परिजनों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो रेलवे गेट जाम, धरना-प्रदर्शन और व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा. आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी परिवार के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं.
जिला पार्षद कुसुम पुर्ती ने कहा कि दो-दो बार बातचीत होने के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. उन्होंने कहा कि मृतक के परिवार को न्याय दिलाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा. जब तक परिवार को सम्मानजनक मुआवजा और रोजगार की व्यवस्था नहीं मिलती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
गौरतलब है कि परसूडीह के शंकरपुर निवासी आशीष माझी गत 30 मई को टाटानगर स्टेशन पर खड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस के एक कोच की छत पर लगे एसी सिस्टम की मरम्मत कर रहे थे. इसी दौरान वह ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन ओवरहेड विद्युत लाइन की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए. घटना के बाद उन्हें टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. घटना के बाद से परिवार न्याय और उचित मुआवजे की मांग को लेकर आंदोलनरत है.

