
एमजीबी, डीए और इंक्रीमेंट्स पर नहीं बन पा रही है सहमति
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा स्टील जमशेदपुर प्लांट के कर्मचारियों का ग्रेड रिवीजन करीब डेढ़ साल से लंबित पड़ा हुआ है. इस मुद्दे को लेकर प्रबंधन और यूनियन के बीच कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है. गुरुवार 11 जून को भी प्रबंधन और यूनियन के बीच महत्वपूर्ण वार्ता हुई, जिसमें कोई सहमति नहीं बन सकी. प्रबंधन की ओर से टाटा स्टील की चीफ पीपुल ऑफिसर आत्रेयी सान्याल वार्ता में शामिल हुईं, जबकि यूनियन की ओर से टॉप थ्री नेता मौजूद थे. पहले यह माना जा रहा था कि इस सप्ताह के अंत तक समझौता हो जाएगा, लेकिन सूत्रों के अनुसार अब इस माह के अंत तक ग्रेड रिवीजन का मामला सुलझने की संभावना है.
मुख्य विवाद के बिंदु
1. एमजीबी (मिनिमम गारंटेड बेनेफिट्स) 2.इंक्रीमेंट्स
3. एनएस ग्रेड कर्मचारियों के डीए (DA) पॉइंट को लेकर मतभेद
प्रबंधन की बदली प्राथमिकताएं
पिछले सात-आठ सालों में टाटा स्टील के मल्टी-लोकेशन प्लांट्स (कई जगहों पर संचालन) होने के कारण कंपनी की प्राथमिकताएं बदल गई हैं. पहले जमशेदपुर प्लांट को मुख्य फोकस दिया जाता था, लेकिन अब कंपनी सभी लोकेशंस के कर्मचारियों को समान महत्व दे रही है. कंपनी की कोशिश है कि एक साथ सभी लोकेशंस के कर्मचारियों का ग्रेड रिवीजन किया जाए, ताकि किसी प्रकार की विषमता उत्पन्न न हो. इसी कारण प्रक्रिया में थोड़ी देरी हो रही है. टाटा स्टील के कर्मचारियों में इस मुद्दे को लेकर काफी उम्मीद है. ग्रेड रिवीजन लंबित होने से वेतन संरचना, पदोन्नति और अन्य लाभों पर असर पड़ रहा है. टाटा स्टील प्रबंधन और यूनियन दोनों पक्षों ने संयम बनाए रखते हुए सकारात्मक चर्चा जारी रखने का भरोसा जताया है.

