# प्रज्ञा केन्द्रों अथवा सीएससी को राज्य सरकार करेगी भुगतान
# कृषिमंत्री ने लैंड पजेशन सर्टिफिकेट जमा करने की बाध्यता भी की खत्म
उदित वाणी, रांची: सुखाड़ राहत योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को आवेदन करने में अब 40 रुपए का शुल्क सीएससी या प्रज्ञा केंद्र को नहीं देना पड़ेगा और न ही लैंड पजेशन सर्टिफिकेट [एलपीसी] जमा करने की बाध्यता होगी.
कृषि मंत्री बादल ने शनिवार को सभी जिलों के उपायुक्तों व जिला कृषि पदाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से विभागीय समीक्षा करते हुए उक्त घोषणा की हैं. उन्होंने कहा कि सीएससी या प्रज्ञा केन्द्र को आवेदन शुल्क की राशि का भुगतान राज्य सरकार करेगी. ज्ञात हो कि अब तक किसानों को राहत योजना के आवेदन को रजिस्टर्ड करने के लिए 40 रुपए का भुगतान करना पड़ता था.
कृषिमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन व सरकार राज्य में सुखाड़ प्रभावित किसानों को लेकर काफी संवेदनशील है. राज्य के किसानों की उदासी को अवसर में बदलने का प्रयास सभी अधिकारी करें.
राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री सुखाड़ राहत योजना के तहत आर्थिक मदद के लिए केंद्र को मेमोरेंडम ऑफ फाइनेंस के तहत 9682 करोड़ की राहत सहायता की मांग की है. उन्होंने कहा कि हर किसान परिवार या खेतिहर मजदूर, जो राज्य के राशन कार्ड धारी हो. उन सबको मुख्यमंत्री सुखाड़ राहत योजना के तहत लाभ दिया जाय.
उन्होंने विभागीय सचिव से कहा कि मुख्यमंत्री सुखाड़ राहत योजना के लिए जो दस्तावेजों को अपलोड किया जाता है. उनमें से लैंड पजेशन सर्टिफिकेट जमा करने की बाध्यता को खत्म किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि हर एक किसान जिनका नाम राशनकार्ड में दर्ज है. मुख्यमंत्री सुखाड़ राहत योजना का लाभ मिले.
उन्होंने कहा कि वैसे गांव जहां के लोग प्रखंड तक जाकर योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं. वैसे गांवों में पदाधिकारी स्वयं जाकर कृषि योजनाओं का लाभ दिलायें. सरकार की ओर से जो बीज अनुदानित दरों पर दी जा रही है.
इसकी धरातल पर जाकर जांच करें और क्षेत्रवार सक्सेस स्टोरी बनायें. ताकि एक मॉडल बनाया जा सके. वहीं उन्होंने कहा कि पशुधन योजना के तहत आवेदन प्राप्त करने की रफ्तार काफी धीमी है. जिसमें सुधार करने की जरूरत है.
एसएमएस करके दें पशुधन वितरण योजना की जानकारी
कृषि विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दिक ने कहा कि जिन जिलों में पशुधन वितरण का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ अथवा धीमा है. वहां जल्द तीव्र गति से वितरण का कार्य करें.
आवेदन ज्यादा से ज्यादा प्राप्त हों इसके लिए निबंधित किसानों के मोबाइल पर एसएमएस भेजें. उन्होंने बताया कि अब तक 18 जिलों में 23000 से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए है।. जो लक्ष्य से काफी दूर है. उन्होंने कहा की एग्री स्मार्ट विलेज के लिए कृषि विभाग की सभी योजनाओं का कार्यान्वयन गांव में किया जाए ताकि मॉडल विलेज के रूप में गांव को पहचान मिल सके.


