
उदित वाणी, जमशेदपुर : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा 10 जून से बालू खनन पर लगने वाले प्रतिबंध से ठीक पहले गुड़ाबांदा प्रखंड के बनमाकड़ी स्थित स्वर्णरेखा नदी के कड़ियामोहन पाल घाट पर बालू के उठाव और भंडारण में तेजी देखी जा रही है. मॉनसून के दौरान नदी के पारिस्थितिक संतुलन की रक्षा के उद्देश्य से लागू होने वाली इस रोक से पहले घाट के समीप लगभग 4 लाख सीएफटी बालू का विशाल स्टॉक जमा कर लिया गया है. एनजीटी के निर्देशों के अनुसार मंगलवार रात 12 बजे के बाद बालू खनन पूरी तरह बंद हो जाएगा. ऐसे में निर्धारित समय सीमा समाप्त होने से पहले अधिकतम मात्रा में बालू निकालने और भंडारित करने का काम युद्धस्तर पर जारी है. घाट क्षेत्र में दिन-रात मशीनों के जरिए बालू की निकासी और डंपिंग की जा रही है.
जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में बालू खनन का कार्य गोदावरी कमोडिटीज लिमिटेड के जिम्मे है. कंपनी को यहां के दो प्रमुख घाटों में कुल 81 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए वैध लीज एवं सीटीओ (कंसेंट टू ऑपरेट) प्राप्त है. हालांकि प्रतिबंध लागू होने से ठीक पहले बड़े पैमाने पर किए जा रहे भंडारण को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया है. ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि आगामी महीनों में बालू की संभावित कमी और बढ़ती मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर स्टॉक तैयार किया गया है, ताकि बाद में ऊंचे दामों पर इसकी बिक्री की जा सके. हालांकि इस संबंध में संबंधित कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
मंगलवार रात के बाद घाट पर खनन गतिविधियां पूरी तरह बंद हो जाएंगी और मॉनसून अवधि के दौरान केवल पूर्व में भंडारित बालू की आपूर्ति ही बाजार की जरूरतों को पूरा करेगी. ऐसे में आने वाले दिनों में बालू की उपलब्धता और कीमतों पर सबकी नजर रहेगी.

