उदित वाणी, जमशेदपुर: शहर में साइबर अपराध अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। सबसे ज्यादा निशाने पर बुजुर्ग और रिटायर कर्मचारी हैं, जिन्हें डिजिटल जानकारी की कमी और अपराधियों की चालाकी भारी पड़ रही है। पुलिस और साइबर सेल के आंकड़ों के अनुसार, शहर में दर्ज साइबर ठगी के कुल मामलों में करीब 54 प्रतिशत पीड़ित वरिष्ठ नागरिक हैं। हर दिन औसतन पांच नए साइबर फ्रॉड के मामले सामने आ रहे हैं।
बीते एक वर्ष के दौरान जमशेदपुर में करीब 600 छोटे-बड़े साइबर अपराध दर्ज किए गए। इनमें लगभग 324 मामलों में बुजुर्गों को ठगी का शिकार बनाया गया। साइबर अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, सीबीआई कर्मी, बैंक प्रतिनिधि या टेलीकॉम कंपनी का अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक दबाव में लेते हैं और फिर ठगी को अंजाम देते हैं।
हाल के दिनों में “डिजिटल अरेस्ट” साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है। अपराधी वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं कि उनके आधार कार्ड, मोबाइल नंबर या बैंक खाते का इस्तेमाल किसी गैरकानूनी गतिविधि में हुआ है। गिरफ्तारी और जांच का भय दिखाकर लोगों से लाखों रुपये ट्रांसफर करा लिए जाते हैं। कई मामलों में बुजुर्ग घंटों तक वीडियो कॉल पर अपराधियों के संपर्क में रहते हैं और डर के कारण किसी को जानकारी तक नहीं देते।
इसके अलावा बैंक केवाईसी अपडेट कराने, खाते को बंद होने से बचाने, निवेश पर मोटा मुनाफा दिलाने, लॉटरी जीतने और रिश्तेदार बनकर पैसे मांगने जैसे तरीके भी तेजी से बढ़ रहे हैं। यूपीआई और क्यूआर कोड स्कैम के जरिए भी लोगों के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं।
देशभर में भी साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में देश में साइबर ठगी के 28 लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। बढ़ते खतरे को देखते हुए जमशेदपुर पुलिस ने अब जागरूकता अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है।
पुलिस की ओर से शहर के सभी थाना क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में साइबर विशेषज्ञ, बैंक प्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी लोगों को ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जानकारी देंगे। विशेष रूप से बुजुर्गों और रिटायर कर्मचारियों को साइबर ठगी से बचने के उपाय बताए जाएंगे।
लोगों को समझाया जाएगा कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और ओटीपी, बैंक खाता संख्या, एटीएम पिन या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताने वालों से सतर्क रहने की सलाह भी दी जाएगी।
साइबर डीएसपी मनोज ठाकुर ने कहा कि साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है। अपराधी लोगों के डर और भरोसे का फायदा उठाते हैं, इसलिए हर व्यक्ति को डिजिटल सुरक्षा के प्रति सजग रहने की जरूरत है। उन्होंने अपील की कि किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन लेनदेन की सूचना तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी थाना में दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
प्रमुख साइबर ठगी के मामले
डिजिटल अरेस्ट और फर्जी पुलिस-सीबीआई कॉल : 65
बैंक केवाईसी और ओटीपी फ्रॉड : 67
निवेश और शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड : 49
लॉटरी, इनाम और गिफ्ट लिंक ठगी : 39
व्हाट्सएप पर रिश्तेदार बनकर पैसे मांगना : 38
यूपीआई और क्यूआर कोड स्कैम : 39
ऑनलाइन शॉपिंग और डिलीवरी फ्रॉड : 18
सोशल मीडिया फेक प्रोफाइल ठगी : 11
नौकरी और पार्ट टाइम जॉब स्कैम : 5
अन्य साइबर अपराध : 32


