
नई दिल्ली: एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यदि अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष दोबारा गंभीर रूप लेता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
नॉर्वे की राजधानी ओस्लो स्थित ऊर्जा रिसर्च और इंटेलिजेंस फर्म रयस्टैड एनर्जी की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव ने अप्रैल में हुए युद्धविराम को अब तक की सबसे कठिन स्थिति में पहुंचा दिया है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है और अमेरिकी शेयर बाजार समेत वैश्विक वित्तीय बाजारों में गिरावट देखने को मिली है।
रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी क्षेत्र के छह प्रमुख उत्पादक देशों में प्रतिदिन 1 करोड़ 18 लाख बैरल तेल उत्पादन अब भी बंद पड़ा है, जिसे आधुनिक ऊर्जा बाजारों के इतिहास में सबसे बड़ी आपूर्ति बाधाओं में से एक माना जा रहा है।
रयस्टैड एनर्जी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और भू-राजनीतिक विश्लेषण प्रमुख जॉर्ज लियोन ने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मौजूदा तनाव पूर्ण युद्ध की वापसी है या फिर एक ऐसा संकट जिसे अब भी नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस अनिश्चितता का असर तेल बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड का अग्रिम अनुबंध तेजी से बढ़कर लगभग 94.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, हालांकि बाद में यह घटकर करीब 93 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
लियोन के अनुसार, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से रिकॉर्ड स्तर पर तेल जारी किए जाने, चीन के कम आयात और सऊदी अरब के यनबू निर्यात मार्ग से प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति जारी रहने से इस संकट के तत्काल प्रभाव को कुछ हद तक कम किया जा सकता है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य को दरकिनार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इन्हीं दिनों में तय होगा कि कूटनीतिक प्रयास फिर से स्थिति संभाल पाते हैं या संघर्ष और अधिक गहराता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निकट भविष्य में किसी कूटनीतिक समझौते की संभावना पहले के मुकाबले कम हो गई है। कुछ सप्ताह पहले रयस्टैड एनर्जी ने इसकी संभावना लगभग 40 प्रतिशत बताई थी।
ऐसे में जब तक युद्धविराम स्थिर रहने या कूटनीतिक प्रयासों में प्रगति के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहने की आशंका है।
रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद पिछले तीन महीनों में वैश्विक बाजार से कुल मिलाकर लगभग 100 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
यह मात्रा अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार की कुल क्षमता से करीब ढाई गुना अधिक बताई गई है।
गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 4 प्रतिशत की तेजी के साथ 93.64 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
–आईएएनएस

