
उदित वाणी, आदित्यपुर : आदित्यपुर के दिन्दली बस्ती में वर्ष-1818 से चली आ रही चड़क पूजा इस वर्ष भी पारंपरिक विधि-विधान और उल्लास के साथ सम्पन्न हुई। श्रद्धालु बड़ी संख्या में भगवान भोले शिवशंकर के मंदिर में एकत्रित हुए और पूजा-अर्चना की। पूजा की शुरूआत नदी से जल लाकर, मंदिर में भगवान शिवशंकर का जलाभिषेक कर की गई। इसके पश्चात् स्थानीय महिला-पुरुषों ने आस्था के साथ पूजा-अर्चना की और अपने परिवार की खुशहाली हेतु मन्नत मांगी। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘रोजनी फोड़ा’ था, जिसमें मन्नत पूरी होने की खुशी में श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुरूप शरीर के अंगों में छिद्र कर रस्सी आर-पार करवाई और भक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए मंदिर परिसर में श्रद्धा-भाव से शामिल हुए। पूजा के दौरान कुल 44 महिला-पुरुषों ने मन्नत पूर्ण होने पर शिवशंकर की कृपा हेतु मंदिर के बाहर बलि भी दी।
ऐसा माना जाता है कि यह परंपरा लगभग 200 वर्ष पूर्व गांव में फैली महामारी के बाद शुरू हुई थी, जिससे गांववासियों को राहत मिल सकी। आज भी स्थानीय ग्रामीण इस आयोजन के माध्यम से अच्छी वर्षा और बीमारियों से बचाव के लिए भगवान शिवशंकर से प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे और समारोह को सफल बनाया।
