उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक (एमडी) के साथ सोमवार को आयोजित एमडी ऑनलाइन सत्र में कर्मचारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा सहायता और करियर विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण समस्याएं उठाईं. प्रबंधन ने सभी मुद्दों पर विस्तृत जवाब देते हुए कर्मचारी कल्याण को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया. एमडी ऑनलाइन सत्र में प्रबंधन ने कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से लिया और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, शिक्षा सहायता तथा व्यावसायिक विकास कार्यक्रमों को और मजबूत करने का संकेत दिया. टाटा स्टील कर्मचारियों की भलाई और उनके समग्र विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए लगातार प्रयास कर रही है.
1. मां की मानसिक बीमारी का इलाज: कंपनी मदद के लिए तैयार
इलेक्ट्रिकल टीएंडडी विभाग की अनंता गिरी ने अपनी मां की गंभीर मानसिक बीमारी का मामला उठाया. उन्होंने बताया कि जमशेदपुर और रांची में इस बीमारी का इलाज उपलब्ध नहीं है. डॉक्टर ने हैदराबाद या दिल्ली में इलाज की सलाह दी है. वर्तमान में मां का इलाज विशाखापट्टनम में रिश्तेदार के घर चल रहा है. उन्होंने ईएसएस (इम्प्लाई सपोर्ट स्कीम) के तहत मदद मांगी, लेकिन आयु 40 वर्ष से कम होने के कारण सहायता नहीं मिल सकी, हालांकि उनके पास 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है.
एमडी का जवाब:
“एमडी ऑनलाइन व्यक्तिगत मामलों के लिए नहीं है, लेकिन मैं पीईओ को निर्देश दे रहा हूं कि वे आपसे मिलें और कंपनी के नियमों के दायरे में आपकी मदद के सभी संभावित उपायों पर विचार करें.”
2. टीएमएच में बोन मैरो ट्रांसप्लांट दोबारा शुरू होगा
सीआरएम विभाग के अशोक गुप्ता ने पूछा कि टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में डॉ. धर के जाने के बाद बोन मैरो ट्रांसप्लांट बंद हो गया है. अब हेमेटोलॉजी विभाग में नया डॉक्टर आ गया है, अतः इस सुविधा को फिर से शुरू किया जाए.
जीएम मेडिकल डॉ. विनीता सिंह का जवाब:
“सुविधा लंबे समय से बंद थी, इसलिए इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड और तैयार किया जा रहा है. जैसे ही पूरी तरह तैयार हो जाएगा, बोन मैरो ट्रांसप्लांट दोबारा शुरू कर दिया जाएगा.”
3. मिलेनियम स्कॉलरशिप की संख्या और दायरा बढ़ाया जाए
अशोक गुप्ता ने मांग की कि कंपनी के बड़े होने के कारण टाटा स्टील मिलेनियम स्कॉलरशिप की संख्या बढ़ाई जाए. साथ ही शिक्षा नीति के तहत हाल में शुरू किए गए नए कोर्सेस को भी स्कॉलरशिप के दायरे में शामिल किया जाए.
सीएचआरओ जुबिन पालिया का जवाब:
“स्कॉलरशिप की संख्या और राशि को समय-समय पर समीक्षा कर बढ़ाया जाता है. यह फैसला यूनियन और प्रबंधन के प्रतिनिधियों वाली कमेटी लेती है. आपका सुझाव इस कमेटी के समक्ष रखा जाएगा और जो भी निर्णय होगा, आपको सूचित कर दिया जाएगा.”
4. सीए और मैनेजमेंट प्रोग्राम शुरू किए जाएं
अशोक गुप्ता ने कहा कि जिस प्रकार एईपी प्रोग्राम चल रहा है, उसी तरह चार्टर्ड अकाउंटेंट और मैनेजमेंट प्रोग्राम भी शुरू किए जाने चाहिए.
सीएचआरओ जुबिन पालिया का जवाब:
“ एस्पायर मैनेजमेंट प्रोग्राम शुरू करने के लिए प्रबंधन स्तर पर चर्चा चल रही है. जैसे ही कोई निर्णय लिया जाएगा, आपको अवगत करा दिया जाएगा.”


