
* 1978 में मुरलीधर केडिया बने थे जुगसलाई नगर पालिका के पहले मेयर
* 42 साल बाद फिर होने जा रहा निकाय चुनाव
* 1977 और 1983 में ही हुए थे अब तक चुनाव
उदित वाणी, जमशेदपुर : झारखंड में नगर निकाय चुनाव की अधिसूचना कभी भी जारी हो सकती है. बहुत कम लोगों को यह जानकारी होगी कि जुगसलाई में निकाय चुनाव पूरे 42 वर्षों बाद होने जा रहा है. इससे पहले जुगसलाई में पहला निकाय चुनाव वर्ष 1977 में हुआ था, जब यह क्षेत्र जुगसलाई नगर पालिका के नाम से जाना जाता था. उसी चुनाव में मुरलीधर केडिया वार्ड नंबर 7 से पार्षद चुने गए थे और बाद में वे जुगसलाई नगर पालिका के पहले मेयर निर्वाचित हुए थे.
उस समय जुगसलाई में कुल 14 वार्ड हुआ करते थे, जो आज बढ़कर 22 हो चुके हैं. मुरलीधर केडिया बताते हैं कि उस दौर में मेयर का चुनाव प्रत्यक्ष नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से होता था. चुने गए पार्षदों द्वारा ही मेयर का निर्वाचन किया जाता था. जनवरी 1978 में 14 पार्षदों ने उन्हें सर्वसम्मति से जुगसलाई का पहला मेयर चुना था.
केडिया बताते हैं कि उस समय जुगसलाई में करीब 15 से 17 हजार मतदाता थे. एक वार्ड में लगभग एक हजार वोटर होते थे और औसतन 100 घर मिलाकर एक वार्ड बनता था. प्रत्याशी और पार्षद अपने-अपने मोहल्लों के लगभग हर परिवार को व्यक्तिगत रूप से जानते-पहचानते थे.

दो हजार रुपये में लड़ा था चुनाव
मुरलीधर केडिया आज भी उस सादगी भरे दौर को याद करते हुए बताते हैं कि उन्होंने वार्ड पार्षद का चुनाव मात्र दो हजार रुपये खर्च कर लड़ा था. यह पूरी राशि सिर्फ हैंडबिल छपवाने में खर्च हुई थी. न पोस्टरबाजी, न बड़े-बड़े होर्डिंग और न ही दिखावटी प्रचार—सिर्फ जनसंपर्क ही चुनावी हथियार हुआ करता था.
अब तक केवल दो बार हुए हैं चुनाव
जुगसलाई में अब तक केवल दो बार — 1977 और 1983 में ही नगर निकाय चुनाव हुए हैं. इसके बाद दशकों तक चुनाव नहीं हो पाए, जिससे स्थानीय लोकतंत्र की प्रक्रिया ठप सी हो गई. अब 42 साल बाद फिर से चुनाव की तैयारी शुरू होने जा रही है, जिसे लेकर शहर में चर्चा तेज हो गई है.
त्रिस्तरीय लोकतंत्र में मेयर पद अनारक्षित होना चाहिए : केडिया
जुगसलाई निकाय के पहले मेयर मुरलीधर केडिया का मानना है कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था त्रिस्तरीय है—लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय. जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पद पर कोई आरक्षण नहीं होता, तो स्थानीय निकाय में मेयर का पद भी अनारक्षित होना चाहिए. वे यह भी कहते हैं कि जब लोकसभा और विधानसभा के चुनाव दलीय आधार पर होते हैं, तो स्थानीय निकाय चुनाव भी दलीय आधार पर ही कराए जाने चाहिए, ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे.
अधिसूचित क्षेत्र समिति से नगर पालिका तक का सफर
जुगसलाई नगर पालिका बनने से पहले यहां अधिसूचित क्षेत्र समिति हुआ करती थी. आजादी से पहले, वर्ष 1924 में जुगसलाई में अधिसूचित क्षेत्र समिति का गठन हुआ था. बाद में 1976 में इसे नगर पालिका का दर्जा दिया गया और दिसंबर 1977 में पहला निकाय चुनाव कराया गया. इसके बाद जनवरी 1978 में चुने गए 14 पार्षदों ने मुरलीधर केडिया को जुगसलाई का पहला मेयर चुना.
सादगी भरे दौर से हाईटेक राजनीति तक
जुगसलाई की यह कहानी आज की महंगी और हाईटेक चुनावी राजनीति के दौर में एक मिसाल की तरह है, जब चुनाव सेवा और संपर्क से जीते जाते थे, न कि पैसों और प्रचार की चकाचौंध से. 42 साल बाद फिर से होने जा रहे निकाय चुनाव ने एक बार फिर शहर के पुराने लोकतांत्रिक इतिहास को ताजा कर दिया.

