
उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष काजल यादव व सदस्य सुनील कुमार वर्मा को पद से हटाने के आदेश को जस्टिस आर मुखोपाध्याय व जस्टिस अंबुज नाथ की खंडपीठ ने निरस्त कर दिया. यद्यपि अदालत ने कहा कि सरकार चाहे तो प्रार्थी का पक्ष सुनते हुए उचित निर्णय ले सकती है. काजल यादव और आयोग के सदस्य सुनील कुमार वर्मा ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ डबल बेंच में अपील दाखिल की थी.
सुनवाई के दौरान वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार और अपराजिता भारद्वाज ने कोर्ट को बताया कि काजल यादव को 28 नवंबर 2022 को झारखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और कुछ शिकायतों के आधार पर 12 फरवरी 2024 को राज्य सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया. बताया गया कि जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया था. लेकिन उसकी रिपोर्ट प्रार्थियों को नहीं दी गई. उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई भी नहीं की गई थी. कमेटी के समक्ष उन्हें पक्ष रखने का मौका भी नहीं मिला था. बिना नैसर्गिक न्याय का पालन करते हुए सरकार ने मनमाने तरीके से उन्हें पद से हटा दिया. जिसे निरस्त किया जाय.
