
उदित वाणी,रांची: सेना के कब्जेवाली 4.55 एकड़ जमीन की अवैध तरीके से खरीद बिक्री करने के मामले में ईडी द्वारा गुरूवार को देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए कोलकाता के चर्चित कारोबारी अमित अग्रवाल व जगतबंधु टी इस्टेट के मालिक दिलीप घोष को कोलकाता से गिरफतार करके रांची लाया गया.
इसके बाद उन्हें गुरुवार को ईडी के पीएमएलए कोर्ट के बिशेष न्यायाधीश दिनेश राय के कोर्ट में पेश किया गया. जहां से बिशेष अदालत ने दोनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बिरसा मुण्डा केन्द्रीय कारा होटवार भेज दिया.
यद्यपि ईडी द्वारा दोनों कारोबारियों को पेश करते हुए पूछताछ के लिए अदालत से 5 दिनों की रिमांड मांगी गई थी. परन्तु बिशेष अदालत द्वारा दोनों की पेशी के बाद जेल भेजने का निर्देश दिया गया और रिमांड पर लेने के ईडी के आवेदन पर सुनवाई के लिए शुक्रवार की तिथि तय की गई.
ईडी की छानबीन में पता चला है कि रांची के बरियातू स्थित सेना के कब्जे वाली उक्त जमीन को प्रदीप बागची नामक फर्जी रैयत खड़ा करके जगतबंधु टी स्टेट के मालिक दिलीप घोष ने औने-पौने में खरीदी.
इसके लिए कोलकाता में फर्जी दस्तावेज भी तैयार किया गया और सरकारी मुल्य के हिसाब से 20 करोड़ रूपये की जमीन का सौदा 7 करोड़ में किया गया तथा मजे की बात यह है कि फर्जी रैयत को मात्र 25 लाख रूपये भुगतान किया गया. बताया गया है कि जगतबंधू टी स्टेट कंपनी के अघोषित मालिक अमित अग्रवाल है.
इसी आधार पर ईडी ने अमित अग्रवाल को भी गिरफ्तार किया है. वहीं रांची के पूर्व आयुक्त नितिन मदन कुलकर्णी की जांच रिपोर्ट के अनुसार उक्त जमीन के असली मालिक जयंत करनाड नामक व्यक्ति है.
ईडी को जानकारी मिली है कि उक्त जमीन की बिक्री के मामले में बड़ा सिंडीकेट शामिल है. इस मामले में रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन व बड़गाई अंचल के राजस्व कर्मचारी [सीआई] की बड़ी भूमिका है. 13 अप्रैल को इन दोनों के साथ ही 18 लोगों के 22 ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की थी.
इस दौरान सीआई के सिमडेगा स्थित आवास में बड़ी संख्या में जमीन के फर्जी डीड, मुहर एवं अन्य कागजात ईडी को मिला था और 14 अप्रैल को ईडी ने मामले में सात आरोपियों सीआई भानु प्रताप, प्रदीप बागची, अफसर अली, इम्तियाज खान, तलहा खान, फैयाज खान एवं मोहम्मद सद्दाम को गिरफ्तार किया था.
इन पर जमीन के दस्तावेज में छेड़छाड़ करने का आरोप है. वहीं रांची के पूर्व डीसी छवि रंजन की भी इस मामले में संलिप्तता के आधार पर 4 मई को गिरफ्तार किया गया.
ईडी ने गिरफतारी के पूर्व दिलीप घोष को 10 मई को पूछताछ के लिए समन जारी किया था. लेकिन वह ईडी के समक्ष हाजिर नहीं हुआ था और पेश नहीं होने का उसने कोई कारण भी नहीं बताया था.

