
उदित वाणी, बोकारो: दिल्ली के मालवीय नगर में हुई हालिया भीषण आगजनी की घटना के बाद पूरे देश में होटल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आम लोगों में भारी गुस्सा नजर आ रहा है। होटलों में पुख्ता फायर सेफ्टी (अग्निशमन सुरक्षा) के इंतजाम और होटल निर्माण के समय स्वीकृत नक्शे के नियमों का पालन न होना इस वक्त एक बेहद गंभीर और बड़ा मुद्दा बन गया है।
बोकारो डीसी अजय नाथ झा ने दिए सख्त जांच के आदेश
देशव्यापी आक्रोश और सुरक्षा चिंताओं के बीच बोकारो जिला प्रशासन ने भी स्थानीय स्तर पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बोकारो के उपायुक्त (DC) अजय नाथ झा ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर मानते हुए जिले के होटलों की सघन जांच के आदेश जारी किए हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीसी ने चास और बेरमो के अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) को अपने-अपने क्षेत्रों में होटलों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने का जिम्मा सौंपा है।
फायर एग्जिट रास्तों पर सामान रखने की मिल रही शिकायतें
बोकारो जिले के विभिन्न होटलों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी किए जाने की बात खुद डीसी अजय नाथ झा ने कही है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कई होटलों में ‘फायर एग्जिट’ (आपातकालीन निकास) वाले रास्तों पर सामानों का रखरखाव किया जा रहा है, जिससे आपात स्थिति में बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। डीसी अजय नाथ झा का कड़ा संदेश: “मानव क्षति सबसे बड़ी क्षति है, इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अगर जांच के दौरान किसी भी होटल में सरकारी नियमों के विरुद्ध कार्य पाया गया या फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम नहीं मिले, तो वैसे होटलों को तुरंत बंद (सील) करने का काम जिला प्रशासन करेगा।”
जांच के दायरे में आएंगे जिले के तीन दर्जन से अधिक होटल
गौरतलब है कि बोकारो जिले में वर्तमान में तीन दर्जन से अधिक छोटे-बड़े होटल संचालित हो रहे हैं, जिनमें कई नामचीन 3-स्टार (Three Star) होटल भी शामिल हैं। प्रशासन की इस अचानक और सख्त कार्रवाई से होटल संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है। चास और बेरमो एसडीएम की अगुवाई में होने वाली इस व्यापक जांच रिपोर्ट के बाद ही जिले के होटलों के भविष्य और सुरक्षा मानकों की असल तस्वीर साफ हो सकेगी।

