उदित वाणी, जमशेदपुर : रेल यात्री संघर्ष समिति के तत्वावधान में सोमवार को टाटानगर रेलवे स्टेशन के दूसरे छोर (स्टार टाकीज-बर्मामाइंस) पर एक विशाल हस्ताक्षर अभियान चलाया गया. इस अभियान में आम रेल यात्रियों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया और रेलवे की लचर व्यवस्था के खिलाफ अपना रोष जताया. इस हस्ताक्षर अभियान के संयोजक पप्पू राव थे, जबकि उनके साथ अमित शर्मा, बबलू और दुर्गा राव ने भी कार्यक्रम के सफल संचालन में प्रमुख भूमिका निभाई. आंदोलन की अगली कड़ी के रूप में 19 मई को मानगो में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा.
अफसरों के घरों के सामने प्रदर्शन की चेतावनी: शिव शंकर सिंह
हस्ताक्षर अभियान के दौरान रेल यात्री संघर्ष समिति के संयोजक शिव शंकर सिंह ने रेल प्रशासन को सख्त लहजे में चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि घाटशिला में 24 मई को होने वाले हस्ताक्षर अभियान और प्रदर्शन के बाद समिति एक बड़ी बैठक करेगी, जिसमें आगे की रणनीति तय होगी. आंदोलन के अगले चरण में रेल प्रशासन से जुड़े बड़े अफसरों के घर के सामने धरना-प्रदर्शन भी किया जा सकता है. उन्होंने आगे कहा, “बेशक रेल प्रशासन चाहे तो हम लोगों पर मुकदमा कर दे, हमें उसकी कोई परवाह नहीं है.”
ट्रेनों को समय पर चलाने की है छोटी सी मांग
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुबोध श्रीवास्तव, कन्हैया सिंह, सतीश सिंह, प्रकाश कोया और कंचन डे ने कहा कि हम लोग पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं. रेलवे को हमारे आंदोलन की तपिश अभी शायद महसूस नहीं हो रही होगी, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब यह आंदोलन और तेज रफ्तार पकड़ेगा और उग्र रूप भी ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेल प्रशासन की होगी. वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी एक बेहद छोटी और जायज मांग है कि जो ट्रेनें टाटानगर से खुल रही हैं या यहाँ आ रही हैं, वे राइट टाइम (सही समय पर) चलें. अगर रेलवे को यह भी समझ में नहीं आ रहा है, तो साफ है कि उसे पैसेंजर्स की कोई फिक्र नहीं है.
ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्रियों की नौकरी पर संकट
इस हस्ताक्षर अभियान में दर्जन भर से ज्यादा ऐसे दैनिक रेलयात्री स्वतःस्फूर्त रूप से शामिल हुए, जो इस्पात मेल से 7 घंटे की देरी से यात्रा करके टाटानगर जंक्शन पहुंचे थे. इन यात्रियों ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर अपना दर्द साझा किया. उन्होंने कहा कि ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी के कारण उनकी नौकरी खतरे में पड़ गई है. उनके ऑफिस के बॉस बार-बार लेट होने के कारण उन्हें डांट रहे हैं, शो-काउज (कारण बताओ नोटिस) जारी कर रहे हैं और सैलरी काट रहे हैं.
“मालगाड़ियों से इतनी मोहब्बत क्यों?” यात्रियों का सवाल
धालभूमगढ़ से रोज आना-जाना करने वाले एक यात्री ने कहा कि वह रोजाना बॉस की डांट सुनते हैं और समझ नहीं आ रहा कि क्या करें. देरी से आने पर वेतन कट रहा है सो अलग. वहीं एक अन्य यात्री ने आरोप लगाया कि रेल प्रशासन यात्री ट्रेनों को लूप लाइन में खड़ा कर देता है और पहले चार-पांच मालगाड़ियों को पास कराया जाता है. उन्होंने सवाल उठाया, “हम लोग प्राइवेट नौकरी करने वाले हैं, कब तक अपने बॉस की झाड़ सुनेंगे? अगर हमारी नौकरी चली गई तो दूसरी नौकरी कौन देगा? रेलवे को समय से ट्रेन चलाने में क्या दिक्कत है? मालगाड़ियों से इतनी मोहब्बत क्यों है?”
कार्यक्रम में ये सभी रहे उपस्थित
इस महत्वपूर्ण आंदोलन और हस्ताक्षर अभियान में मुख्य रूप से नीरज सिंह, अजय कुमार, प्रवीण सिंह, राजा, विजय सिंह, शमशाद खान, त्रिदेव सिंह, कुणाल कुमार, हनी परिहार, चंचल दा, मनोज शर्मा, शंकर कर्मकार, सुधीर तिवारी, मो. फिरोज, मुख्तार अहमद, दीपक कुमार, राजा अग्रवाल, अर्जुन मुखी, सुषमा मंडल, दीपू तिवारी और शरद मुखी आदि सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे.


