उदित वाणी, रांची : झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) में दो दिवसीय राज्य स्तरीय खरीफ कर्मशाला का समापन मंगलवार को हुआ. इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की उपस्थित रहीं. उन्होंने विभाग के निदेशकों की अनुपस्थिति पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि किसानों के कार्यों में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
लापरवाही पर कार्रवाई और बेहतर कार्य पर सम्मान
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के उत्थान के प्रति पूरी तरह गंभीर है. उन्होंने घोषणा की कि जो पदाधिकारी किसानों के हित में ईमानदारी से काम करेंगे, उन्हें सम्मानित किया जाएगा, लेकिन काम में ढिलाई बरतने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी.
संभावित सूखे से निपटने के लिए ‘कंटिंजेंट प्लान’ तैयार
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून में कम बारिश की संभावना है, जिससे सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
सूखे से निपटने के लिए सभी जिलों के कृषि पदाधिकारियों द्वारा बनाए गए ‘कांटिजेंट प्लान’ का प्रेजेंटेशन कर्मशाला में दिया गया.
किसानों को समय पर सूखे की जानकारी देने के लिए विभाग विशेष प्लान तैयार कर रहा है.
कार्यक्रम के दौरान खरीफ कर्मशाला 2026 से संबंधित एक सूचनात्मक पुस्तक का विमोचन भी किया गया.
कृषि मंत्री का एक्शन प्लान: 15 मई से बैठकों का दौर
सूखे की स्थिति को देखते हुए मंत्री ने अधिकारियों को ‘सेना’ के रूप में काम करने का निर्देश दिया:
15 मई: सभी जिला मुख्यालयों में प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कर्मशाला के प्लान को साझा किया जाए.
20 मई: हर जिले में खरीफ मेला का आयोजन होगा, जिसमें प्रत्येक प्रखंड से कम से कम 500 प्रगतिशील किसान शामिल होंगे. यहाँ सॉइल टेस्टिंग काउंटर भी लगाए जाएंगे.
22 मई: प्रखंड स्तर पर खरीफ मेले का आयोजन कर पंचायत स्तर पर किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए.
बीज का वितरण SHG (स्वयं सहायता समूह) और FPO के माध्यम से सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.
पशुपालन और अन्य प्रभागों के लिए निर्देश
कृषि मंत्री ने केवल खेती ही नहीं, बल्कि अन्य प्रभागों पर भी जोर दिया:
पशुओं की दवाओं का वितरण और निविदा समय पर हो.
मई अंत तक तालाबों के जीर्णोद्धार का कार्य पूर्ण किया जाए.
मत्स्य बीजों का वितरण भी मई के अंत तक सुनिश्चित हो.
भूमि संरक्षण, सोलर पंप वितरण, ड्रिप इरीगेशन और मधुमक्खी पालन के कार्यों का सख्ती से अनुपालन हो.
वैज्ञानिकों ने दिए उन्नत खेती के गुर
कर्मशाला के दूसरे दिन कृषि वैज्ञानिकों ने तकनीकी जानकारी साझा की:
डॉ. अख़लाक़ अहमद: भूमि और मौसम के आधार पर धान की सही किस्मों के चयन की जानकारी दी.
डॉ. अशोक कुमार सिंह: वैज्ञानिक तरीकों से धान की उन्नत खेती, खरपतवार नाशक के उपयोग और अधिक उपज वाली किस्मों पर प्रकाश डाला.
डॉ. अरुण कुमार: मिलेट्स (बाजरा) की खेती और सॉइल कंजर्वेशन के उपायों के बारे में बताया.
विश्वविद्यालय के कुलपति श्री एससी दुबे ने जल संरक्षण और फसल विविधीकरण (Diversification) पर जोर दिया, जबकि विशेष सचिव श्री गोपाल जी तिवारी ने बताया कि यह कर्मशाला जिला स्तर पर एक एकीकृत योजना तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी.


