
उदित वाणी, नई दिल्ली : बीते एक दशक में भारत में अवसंरचनात्मक निर्माण अभूतपूर्व रूप से तेज हुआ है, जिससे परिवहन, आवास, जल, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल नेटवर्क के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। इससे न केवल सेवाओं की उपलब्धता में मजबूती आई है, बल्कि देशभर के नागरिकों और व्यवसायों के लिए कनेक्टिविटी भी कई गुना बढ़ी है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, उड़ान, भारतमाला, सागरमाला और पीएम-वानी जैसी योजनाओं ने भारत को एक सतत, अभिसरित और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था की दिशा दी है। रेल, सड़क, उड्डयन व जल परिवहन के अलावा आर्थिक गलियारों की मजबूती के लिए केंद्र व राज्य सरकारों की अभिसरित योजनाओं से अवसंरचना निर्माण पहले की तुलना में अधिक योजनाबद्ध, दीर्घकालिक और टिकाऊ हुआ है।
उल्लेखनीय है कि पूंजीगत व्यय में निरंतर बढ़ोतरी और नीति-गत प्रबंधनों से न केवल नए आर्थिक केंद्र उभरे हैं, बल्कि डिजिटल, लॉजिस्टिक्स और निर्माण क्षेत्रों में रोजगार व व्यवसाय की संभावनाएं भी सशक्त हुई हैं। भारतीय रेल में उच्च-गति के वंदे भारत, अमृत भारत व माल ढुलाई मांग के लिए फीचर युक्त टर्मिनल्स के निर्माण तथा संरक्षा प्रणाली ‘कवच’ लागू होने से सुरक्षा व सेवा गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसी तरह, भारतमाला, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना व कई सुरंग–सेतु परियोजनाओं से दुर्गम क्षेत्रों और सीमावर्ती इलाकों में भी अबर्तित संपर्क स्थापित हुआ है। नागरिक उड्डयन के क्षेत्र में उड़ान योजना व नए ग्रीनफील्ड हवाईअड्डों के निर्माण से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी व पहुंच निरंतर बढ़ी है।
शहरों में मेट्रो, पानी पर आधारित परिवहन और जलमार्गों के विस्तार से सतत शहरी विकास एवं यातायात समाधान सुलभ हुए हैं। पीएम गति शक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति जैसे कार्यक्रमों से माल-ढुलाई की लागत व समय में कमी आई है। जल जीवन मिशन व अमृत जैसी पहलों से ग्रामीण और शहरी आबादी के लिए पाइप द्वारा जलापूर्ति की पहुंच काफी बढ़ी है। आवास योजनाओं पीएमएवाई-शहरी व ग्रामीण, स्वामीह कोष, शहरी पुनरुत्थान मिशनों के जरिए करोड़ों परिवारों को आवास, स्वच्छता, नवीनीकरण तथा बुनियादी सुविधाओं का लाभ मिला है।
विद्युत क्षेत्र में सौभाग्य, पीएम सूर्य घर, गोबरधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार ने भारत को ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व में अग्रणी रखा है। डिजिटल इंडिया एवं सार्वजनिक डिजिटल ढांचे के माध्यम से वित्तीय समावेशन, सुशासन एवं सेवा वितरण को डिजिटल आधार मिला है। आधार, जनधन, यूपीआई, भारतनेट एवं पीएम-वानी के साथ देश के सुदूर क्षेत्रों तक डिजिटल सेवाओं की पहुंच संभव हो सकी है। इस अवसंरचनात्मक परिवर्तन से भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद सशक्त हुई है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर गति को और मजबूत बना रही है।
