उदित वाणी, जमशेदपुर: शहर के व्यवहार न्यायालय स्थित माननीय न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी अदनान आकिब की अदालत ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सोनारी गुदरी बाजार के रहने वाले विनय कुमार दुबे को साक्ष्य के अभाव में पूरी तरह से बरी कर दिया है। विनय कुमार दुबे के खिलाफ साल 2015 में मकान निर्माण के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी और राशि गबन करने का संगीन आरोप लगाया गया था।
क्या था मामला: मकान निर्माण के नाम पर ₹7.50 लाख के गबन का था आरोप
इस मामले की पृष्ठभूमि साल 2015 से जुड़ी है। कुम्हारपाड़ा सोनारी की रहने वाली अहिल्याबाई ने 22 जून 2015 को जमशेदपुर न्यायालय में एक शिकायत वाद दायर किया था। शिकायतकर्ता अहिल्याबाई का आरोप था कि विनय कुमार दुबे ने उनका मकान बनवाने के नाम पर उनसे 7 लाख 50 हजार रुपये लिए थे। आरोप के मुताबिक, विनय दुबे ने न तो मकान का निर्माण कार्य पूरा कराया और न ही ली गई रकम वापस की। शिकायतकर्ता ने इसे धोखाधड़ी और विश्वासघात का मामला बताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी।
अदालत में आरोप साबित करने के लिए नहीं मिले पर्याप्त दस्तावेज
मामले की लंबी सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष अपने द्वारा लगाए गए आरोपों के समर्थन में अदालत के समक्ष पर्याप्त साक्ष्य और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने में पूरी तरह नाकाम रहा। न्यायालय ने मामले से जुड़े सभी उपलब्ध तथ्यों, गवाहों और अभिलेखों का गहन अवलोकन किया। इसके बाद माननीय न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी अदनान आकिब की अदालत ने पाया कि विनय कुमार दुबे पर आरोप सिद्ध करने के लिए कोई भी ठोस और पर्याप्त प्रमाण मौजूद नहीं है।
बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलें आईं काम, विनय दुबे हुए दोषमुक्त
विनय कुमार दुबे की तरफ से बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू और अधिवक्ता बबिता जैन ने अदालत में उनका पक्ष रखा। वकीलों ने प्रभावी ढंग से दलीलें पेश करते हुए अभियोजन पक्ष की कमियों और साक्ष्यों की अनुपलब्धता को उजागर किया। दोनों पक्षों को सुनने और दस्तावेजों की कमी को देखते हुए न्यायालय ने विनय कुमार दुबे को ससम्मान दोषमुक्त करार देते हुए रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।


