
उदित वाणी, रांची : 100 करोड़ रूपये के शराब घोटाला मामले में एसीबी द्वारा अब छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस व झारखंड एवं छत्तीसगढ़ में घोटाले के किंगपिन अरुण पति त्रिपाठी को रिमांड पर लेने के लिए प्रोडक्शन वारंट मांगी गई है. त्रिपाठी छत्तीसगढ़ में भी शराब घोटाले में शामिल हैं और रायपुर जेल में बंद हैं. त्रिपाठी पर झारखंड में भी नई उत्पाद नीति में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप है. उनपर शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने और करोड़ों का कमीशन लेने का भी आरोप है. जबकि आईएएस अरुण पति त्रिपाठी को छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला केस में रायपुर एसीबी ने 12 अप्रैल 2024 को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
बताया गया कि झारखंड के पूर्व प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे के कार्यकाल में मई 2022 में झारखंड में लागू नई उत्पाद नीति में आईएएस अरुण पति त्रिपाठी मुख्य भूमिका में थे. विनय कुमार चौबे ने आईएएस अरुण पति त्रिपाठी के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ की तरह झारखंड में भी शराब घोटाले की साजिश रची थी. तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे ने उन्हें झारखंड में उत्पाद नीति का परामर्शी बनाया था और इसके बदले करीब सवा करोड़ रुपये का भुगतान किया था.
वहीं आईएएस अरुण पति त्रिपाठी ने ही अपने करीबी शराब कारोबारी सिद्धार्थ सिंघानिया को झारखंड की उत्पाद नीति में प्रवेश कराया. इसके बदले में सिद्धार्थ सिंघानिया ने अरुण पति त्रिपाठी के अलावा झारखंड के तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को भी करोड़ों रुपये का कमीशन दिया. त्रिपाठी व सिद्धार्थ सिंघानिया ने ही मिलकर मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी सिक्यूरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विधु गुप्ता को भी झारखंड में आपूर्ति होने वाली शराब की बोतलों के लिए होलोग्राम आपूर्ति का ठेका दिलाया और उससे भी झारखंड के उत्पाद अधिकारियों को करीब 90 करोड़ से अधिक का कमीशन दिलाया.
