
जमशेदपुर: आधुनिक रसोई में जहां स्टील, नॉन-स्टिक और प्रेशर कुकर का बोलबाला है, वहीं आयुर्वेद और विज्ञान एक बार फिर हमें मिट्टी के बर्तनों की ओर लौटने की सलाह दे रहे हैं.मिट्टी के बर्तनों में भोजन धीमी आंच पर पकता है, जिससे उसमें मौजूद आवश्यक पोषक तत्व नष्ट नहीं होते.प्रेशर कुकर में तेज भाप और दबाव के कारण भोजन के लगभग 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं, जबकि मिट्टी के बर्तनों में यह लगभग पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं.
पोषण का खजाना
मानव शरीर को प्रतिदिन 18 प्रकार के सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, जो प्राकृतिक रूप से मिट्टी से प्राप्त होते हैं.मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से यह तत्व बरकरार रहते हैं, जबकि एल्युमिनियम, कांसे या पीतल के बर्तनों में ये नष्ट हो सकते हैं.ऐसे बर्तनों में खाना पकाना टीबी, मधुमेह, अस्थमा और पक्षाघात जैसी बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है.इसलिए मिट्टी के बर्तन स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे सुरक्षित और लाभदायक माने जाते हैं.
स्वाद का देसी जादू
मिट्टी के बर्तनों में पका भोजन सिर्फ स्वास्थ्यवर्धक ही नहीं, बल्कि स्वाद में भी बेहद समृद्ध होता है.मिट्टी की सौंधी खुशबू, मसालों का गाढ़ा मेल और धीमी आंच पर पकने की प्रक्रिया — यह सब मिलकर एक ऐसा स्वाद रचते हैं जिसे भुलाना कठिन होता है.दही जमाना हो या गर्म दूध — मिट्टी के पात्रों में उसका स्वाद कई गुना बेहतर हो जाता है.
परंपरा से सजावट तक
सदियों से भारतीय रसोई में मिट्टी के बर्तन पारंपरिक रूप से उपयोग में लाए जाते रहे हैं.आज ये बर्तन फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं, न केवल स्वास्थ्य के लिए, बल्कि सजावट और सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए भी.सुंदर आकृतियों, आकर्षक रंगों और कलात्मक डिजाइनों में उपलब्ध यह बर्तन किचन और डाइनिंग टेबल को देसी सौंदर्य प्रदान करते हैं.
आधुनिकता से सामंजस्य
अब आधुनिक मिट्टी के बर्तन माइक्रोवेव में भी उपयोग किए जा सकते हैं, जिससे इन्हें पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार की रसोई में शामिल किया जा सकता है.हालांकि, अत्यधिक तेज तापमान से इनकी ऊष्मा सहनशीलता प्रभावित हो सकती है, इसलिए इनके उपयोग में सावधानी आवश्यक है.
(IANS)

