
औषधीय पौधों से भरपूर आदिवासी क्षेत्रों में हर्बल मेडिसिन को बनाया जाए आजीविका मिशन का हिस्सा : मुंडा
उदित वाणी, नई दिल्ली: केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित शास्त्री भवन में पतंजलि योगपीठ के एमडी और सह-संस्थापक आचार्य बालकृष्ण और उनकी टीम के साथ जनजातीय कल्याण और विकास के क्षेत्र में मंत्रालय और पतंजलि के साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की. बैठक में पतंजलि द्वारा संचालित परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट, आदिवासियों के अनुसंधान एवं कल्याण से संबंधित विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा की गई. बैठक में केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री बिशेश्वर टुडू, पूर्व राज्य मंत्री प्रताप चंद्र षाड़ंगी और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.
पतंजलि की टीम ने बताया कि उन्होंने परियोजना के हिस्से के रूप में उत्तराखंड के आदिवासी क्षेत्रों में पाए जाने वाले औषधीय पौधों की पहचान करने और प्रामाणिकता के साथ दस्तावेज बनाने के लिए व्यापक सर्वेक्षण किया है. वे सर्वेक्षण किए गए क्षेत्रों में क्षमता निर्माण भी कर रहे हैं ताकि पारंपरिक आदिवासी चिकित्सक पेशेवर तरीके से हर्बल दवा की प्रैक्टिस कर सकें. अब तक, पतंजलि ने 65,000 पौधों का दस्तावेजीकरण किया है और कुल मिलाकर 200 आदिवासी समुदायों के साथ काम किया है.
बैठक में आचार्य बालकृष्ण ने आदिवासी गांवों के समग्र विकास, आदिवासी बच्चों की शिक्षा में सुधार और आजीविका सृजन के लिए अपने सुझाव प्रस्तुत किए. उन्होंने उनके द्वारा विकसित डिजिटल प्लेटफॉर्म का विस्तृत विवरण भी दिया जो आदिवासी समुदायों के समग्र विकास के लिए लाभकारी हो सकते हैं. इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने अर्जुन मुंडा को पतंजलि आयुर्वेद द्वारा तैयार की गई कार्य योजनाओं पर रिपोर्ट और एक पुस्तक भी भेंट की.
बैठक में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने पतंजलि द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में जिम्मेदार तरीके से किए जा रहे कार्यों की सराहना की. उन्होंने कहा कि पतंजलि के सुझावों पर गंभीरता से चर्चा करने की जरूरत है. इसके लिए समयबद्ध कार्य योजना बनाने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा. इसमें देश भर के आदिवासी अनुसंधान संस्थान और विश्वविद्यालय भी शामिल होंगे. श्री मुंडा ने कहा कि आदिवासी समुदायों, आदिवासी संस्कृति, आदिवासी ज्ञान और परंपरा से संबंधित ज्ञान के आधार का विस्तार करने के लिए आदिवासी अनुसंधान संस्थानों को भी अपने दायरे में आदिवासी अध्ययन को शामिल करना चाहिए. मुंडा ने कहा कि औषधीय पौधे उगाने और हर्बल दवाएं तैयार करने की प्रथा को विशेष रूप से औषधीय पौधों से भरपूर आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका मिशन का रूप दिया जाना चाहिए. वहीं केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री बिशेश्वर टुडू ने कहा कि आदिवासी लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि आदिवासी भी सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें.

