
उदित वाणी, रांची: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीपुल्स लिब्रेशन फ्रंट ऑफ इंडिया [पीएलएफआई] के कुख्यात सुप्रीमो दिनेश गोप को कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार को एनआईए द्वारा बिशेष अदालत में पेश किया गया.
बिशेष अदालत द्वारा दिनेश गोप को 8 दिनों की रिमांड पर लेने की मंजूरी दी. जबकि पेशी के बाद एनआईए के जांच अधिकारी ने दिनेश गोप से पूछताछ करने के लिए 15 दिनों की रिमांड पर देने का आग्रह करते हुए आवेदन दाखिल किया था. अदालत में आधा घंटा रहने के बाद एनआईए उसे अपने साथ ले गई.
एनआईए सोमवार से ही रिमांड पर लेकर दिनेश गोप से पूछताछ शुरू कर दी है. रिमांड अवधि में एनआईए उससे संगठन से जुड़े कई अहम सवालों समेत मददगार सफेदपोशों व दूसरे नक्सलियों के ठिकानों की भी विस्तृत जानकारी मांगेगी और एनआईए पूछताछ के दौरान उससे संगठन के कई बड़े राज भी जानने का प्रयास करेगी.
ज्ञात हो कि एनआईए और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा दिनेश गोप को नेपाल से गिरफतार करने के बाद रविवार को दिल्ली से ट्रांजिट रिमांड पर रांची लाया गया. रांची लाने के बाद एयरपोर्ट से ही एनआईए द्वारा गोप को गुप्त ठिकाने पर ले जाया गया था.
भीड़-भाड़ से बचने और सुरक्षा कारणों को लेकर एनआईए द्वारा सोमवार को अदालत की समयावधि समाप्त होने के बाद अपराहन 1 बजे उसे बिशेष अदालत में पेश किया गया. मोस्ट वांटेड गोप का चेहरा काले कपड़े में ढंककर अदालत लाया गया.
गौरतलब है गर्मी की वजह से फिलवक्त निचली अदालत में अपराहन 1 बजे तक ही कामकाज होता है. गोप को एनआईए ने बर्ष 2016 में बेड़ो थाना में दर्ज मामले में गिरफतार किया है. एनआईए द्वारा बर्ष 2018 में इस मामले को टेकओवर करके अनुसंधान शुरू किया गया है.
अदालत ने ली गोप से उसके उपनामों की भी जानकारी
बिशेष अदालत ने दिनेश गोप से पेशी के दौरान उसके सभी उपनामों के बारे में पूछा। जिसके जबाब में गोप ने अदालत को बताया कि उनका नाम दिनेश गोप उर्फ कुलदीप यादव उर्फ बड़कू भी है.
वहीं अदालत द्वारा दिनेश गोप से वकील रखने के बारे में भी पूछा तो उसने कहा कि इस मामले में सोच विचार करने के बाद फैसला लेंगे. अभी उसका कोई वकील नहीं है. इसके बाद आदलत द्वारा उसे डालसा की ओर से रिमांड वकील उपलब्ध कराया गया.
दिनेश गोप की ओर से डालसा के वकील सौरभ कुमार पांडेय व राजेश कुमार सिन्हा ने एनआईए के रिमांड पर लेकर पूछताछ करने को लेकर दाखिल आवेदन का विरोध किया और कहा कि दिनेश गोप के मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल किया जा चुका है.
अब रिमांड पर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है. लेकिन एनआईए के अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच की जा रही है. ऐसे में आरोपी से रिमांड पर पूछताछ की आवश्यकता है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने एनआईए को दिनेश गोप को आठ दिनों की रिमांड पर लेकर पूछताछ करने की अनुमति दी.
शातिर गोप लेवी की राशि नेपाल में करता था निवेश
बताया गया कि शातिर दिनेश गोप ने सुरक्षित ठिकाना के रूप में नेपाल को चुना था और लेवी का पैसा नेपाल में निवेश कर रहा था. नेपाल में ही रहकर वह झारखंड में अपने संगठन को मजबूत कर रहा था.
झारखंड में सहयोगी उग्रवादियों द्वारा वसूली गई लेवी की राशि को नेपाल पहुंचाने का काम किया करते थे. तकनीकी तौर पर भी गोप खुद को अपडेट कर रखा था और कभी भी किसी से सामान्य कॉल पर बात नहीं करता था.
नेपाल में वह स्थानीय लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना रखा था. वह किसी पीएलएफआइ उग्रवादी को भी मिलने के लिए नहीं बुलाता था और न ही अपने लोकेशन की जानकारी देता था.

