
उदित वाणी, जमशेदपुर: 4 नवंबर शुक्रवार को देवउठनी एकादशी है. मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन नारायण चार माह (117 दिन) की निद्रा से बाहर आते हैं और संसार के संचालक के तौर पर अपना कार्य संभालते हैं.
इसी के साथ चातुर्मास का समापन हो जाता है और शुभ कार्य शुरू हो जाते हैं. देवउठनी एकादशी को देवोत्थान एकादशी और प्रबोधनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इसे सबसे बड़ी एकादशी माना जाता है. मान्यता है कि जो लोग सालभर की एकादशी का व्रत नहीं रख पाते वो अगर देवउठनी एकादशी का व्रत रख लें तो उन्हें सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाता है.
एकादशी के बाद समस्त शुभ कार्य व विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि संस्कार प्रारंभ हो जाते हैं.हालांकि इस साल देवउठनी एकादशी को विवाह का मुहूर्त नहीं है क्योंकि इस समय शुक्र अस्त है. शुक्र 20 नवंबर तक अस्त रहेगा, तब तक कोई विवाह कार्यक्रम नहीं होगा.
नवंबर माह में विवाह के केवल चार ही मुहूर्त हैं. देवउठनी एकादशी तिथि : कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 03 नवंबर, गुरुवार को शाम 07 बजकर 30 मिनट से हो चुका है. इस तिथि का समापन 04 नवंबर को शाम 06 बजकर 08 मिनट पर होगा. उदया तिथि के आधार पर देवउठनी एकादशी 04 नवंबर 2022 को है.
पूजा मुहूर्त: 04 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा सुबह 06 बजकर 35 मिनट से सुबह 10 बजकर 42 मिनट के मध्य कर लेनी चाहिए. इस समय में भी सुबह 07 बजकर 57 मिनट से 09 बजकर 20 मिनट तक लाभ-उन्नति मुहूर्त और सुबह 09 बजकर 20 मिनट से सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त है.
पूजा सामग्री लिस्ट: श्री विष्णु जी का चित्र अथवा मूर्ति, पुष्प, नारियल, सुपारी, फल, लौंग, धूप, दीप, घी, पंचामृत, अक्षत, तुलसी दल, चंदन, मिठाई
चौघडिय़ा मुहूर्त
चर – सामान्य: सुबह 06.35 बजे से 07.57
लाभ – उन्नति: सुबह 07.57 बजे से 09.20 बजे
अमृत – सर्वोत्तम:सुबह 09.20 बजे से 10.42 बजे
शुभ – उत्तम: दोपहर 12.04 से 01.27 बजे
लाभ – उन्नति: रात 08.49 बजे से 10.27 बजे
पारण का समय: देवउठनी एकादशी व्रत का पारण 5 नवंबर, शनिवार को किया जाएगा.
इस दिन व्रत पारण सुबह 06 बजकर 36 मिनट से सुबह 08 बजकर 47 मिनट के बीच कर लेना चाहिए. इस दिन द्वादशी तिथि का समापन शाम 05 बजकर 06 मिनट पर होगा.
इस बार नही हो सकेंगे विवाह: ज्योतिषीय मतानुसार सुबह देवउठनी एकादशी पर अबूझ मुहूर्त मानते हुए विवाह शुरू हो जाते हैं. इस बार देवउठनी एकादशी के दिन शुक्र तारा अस्त चल रहा है इससे 23 नवंबर को पश्चिम में उदय होने के बाद ही शादियों के विशेष मुहूर्त शुरू हो सकेंगे. देवउठनी एकादशी के बाद भी मांगलिक कार्यों के लिए इस बार इंतजार करना होगा.
शुक्र अस्त होने से विवाह व मांगलिक कार्यों का श्रीगणेश 23 नवंबर के बाद होगा. सामान्य अबूझ मुहूर्त होने से तथा लोक परंपरा के आधार पर कहीं-कहीं सामाजिक विवाह समारोह ही हो सकेंगे. जनसाधारण के लिए विशेष विवाह मुहूर्त देवउठनी एकादशी से शुरू नहीं होंगे.
2022-23 के विवाह मुहूर्त
नवंबर : 24, 25, 27
दिसंबर : 02,07, 08, 09
जनवरी 2023 : 15 ,18, 25, 26, 27, 30, 31
फरवरी : 06, 07, 09, 10, 12, 13, 14, 22, 23, 28
मार्च : 06, 09, 11, 13
गृह प्रवेश मुहूर्त
नवंबर : 28
दिसंबर : 02, 03, 08, 09, 19
जनवरी 2023 : 25, 26, 27, 30
फरवरी : 01, 08, 10, 11, 22, 23
मार्च : 01, 08, 09, 10, 13, 16, 17

