उदित वाणी, पटमदा : भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से शुक्रवार को पटमदा के लावा पंचायत मंडप परिसर में ई-बात कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन आरबीआई पटना के क्षेत्रीय निदेशक सुजीत कुमार अरविंद ने किया. इस अवसर पर आरबीआई पटना के उप महाप्रबंधक संजीव कुमार, बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय उप महाप्रबंधक पंकज कुमार मिश्रा, पटमदा के अंचलाधिकारी डॉ. राजेंद्र कुमार दास सहित कई अधिकारी उपस्थित थे.
महिलाओं के बीच वित्तीय जागरूकता बढ़ना सुखद संकेत: सुजीत कुमार अरविंद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय निदेशक सुजीत कुमार अरविंद ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से प्रगति हुई है और गांवों में महिलाओं के बीच वित्तीय जागरूकता बढ़ना सुखद संकेत है. उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक उन्नति से पूरे परिवार का विकास होता है. उन्होंने बताया कि आरबीआई बैंकों का बैंक है और लोगों के बीच बैंकिंग सुविधाओं, बचत, निवेश, असली-नकली नोट की पहचान तथा साइबर ठगी से बचाव को लेकर जागरूकता फैलाना ही इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है.
डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड से रहें सावधान, ठगी होने पर डायल करें 1930
उन्होंने लोगों से वित्तीय रूप से साक्षर बनने की अपील करते हुए कहा कि आज पढ़े-लिखे लोगों को भी वित्तीय जानकारी और डिजिटल सुरक्षा की आवश्यकता है. डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड जैसे नए अपराधों से सावधान रहने तथा सुरक्षित तरीके से डिजिटल लेनदेन करने पर विशेष जोर दिया गया. उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए. बैंक ऑफ इंडिया के एलडीएम पंकज कुमार मिश्रा ने भी लोगों से वित्तीय सुरक्षा और जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाने की अपील की.
लालच में न आएं, सतर्कता के साथ करें डिजिटल भुगतान: CO डॉ. राजेंद्र कुमार दास
अंचलाधिकारी डॉ. राजेंद्र कुमार दास ने कहा कि पटमदा की धरती पर आरबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों का आगमन गौरव की बात है. उन्होंने कहा कि पहले लोग मिट्टी के घड़ों में पैसा सुरक्षित रखते थे, लेकिन आज डिजिटल युग में साइबर सेंधमारी का खतरा बढ़ गया है. ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है. उन्होंने लोगों से लालच में न आने और सतर्कता के साथ डिजिटल भुगतान करने की सलाह दी.
स्वयं सहायता समूह (SHG) से महिलाओं की बढ़ी आर्थिक भागीदारी: संजीव कुमार
आरबीआई के उप महाप्रबंधक संजीव कुमार ने कहा कि वर्ष 1999 से स्वयं सहायता समूह (SHG) आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसके माध्यम से महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं. उन्होंने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया.


