उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील और अन्य प्रमुख स्टील कंपनियां अगले वित्तीय वर्ष (FY27) में रिकॉर्ड 75,000 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर (कैपेक्स) करने की तैयारी कर रही हैं. यह खर्च पिछले वर्ष की तुलना में करीब 65 फीसदी अधिक होगा, जो देश में बढ़ती स्टील मांग और मजबूत नकदी प्रवाह की उम्मीद पर आधारित है.
टाटा स्टील पर फोकस
टाटा स्टील, जो भारत की प्रमुख स्टील उत्पादक कंपनियों में शामिल है, इस कुल कैपेक्स का महत्वपूर्ण हिस्सा खर्च करेगी. कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधुनिकीकरण और नई परियोजनाओं पर बड़ा निवेश करने वाली है. बाजार विश्लेषकों के अनुसार, टाटा स्टील सहित पांच सबसे बड़ी भारतीय स्टील कंपनियां वित्तीय वर्ष 27 में कुल मिलाकर 75,000 करोड़ खर्च करेंगी.यह कैपेक्स मुख्य रूप से प्राइमरी इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए किया जा रहा है.
उद्योग की स्थिति
भारत सरकार का लक्ष्य 2030 तक स्टील उत्पादन क्षमता को 300 मिलियन टन तक ले जाना है. 2026 में स्टील की मांग में 7.4 फीसदी और 2027 में 9.2 फीसदी की वृद्धि होने का अनुमान है. जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा स्टील और अन्य कंपनियां पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और लागत दबाव के बावजूद अपनी विस्तार योजनाओं पर आगे बढ़ रही हैं. टाटा स्टील अपनी मौजूदा क्षमता को मजबूत करते हुए नई तकनीकों और कुशल उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे कंपनी लंबे समय में अपनी बाजार हिस्सेदारी और बढ़ा सकेगी.विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत मुनाफा और कैश फ्लो के कारण स्टील कंपनियां इस बड़े कैपेक्स को आसानी से वहन कर पाएंगी. टाटा स्टील की हालिया क्रेडिट रेटिंग में सुधार भी कंपनी को सस्ते फंडिंग के मौके देगा, जिससे उसका कैपेक्स प्लान और मजबूत हो गया है. यह रिकॉर्ड निवेश न केवल टाटा स्टील की विकास योजनाओं को गति देगा, बल्कि पूरे भारतीय स्टील उद्योग को नई ऊंचाई प्रदान करेगा.


