
हजारीबाग: हजारीबाग के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत कुसुम्बा गांव में हुई 12 वर्षीय मासूम बच्ची की निर्मम हत्या के मामले का पुलिस ने उद्भेदन कर दिया है. जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं. पुलिस के अनुसार तंत्र-मंत्र, अंधविश्वास और कथित देवी-पूजा के नाम पर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया, जिसमें मृतिका की मां की भी संलिप्तता पाई गई है.
क्या है पूरा मामला
घटना विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुंबा गांव की है. 25 मार्च 2026 की सुबह पुलिस को सूचना मिली कि गांव के मिडिल स्कूल के पीछे बांस झाड़ी में एक बच्ची का शव पड़ा है. जांच में पता चला कि बच्ची पिछली रात रामनवमी के मंगला जुलूस के दौरान लापता हो गई थी. मृतका की मां रश्मी देवी के लिखित आवेदन पर पुलिस ने मामला दर्ज किया. घटना की गंभीरता को देखते हुए हजारीबाग और रांची पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया.
मामले का खुलासा करते हुए हजारीबाग IG एवं पुलिस अधीक्षक ने बताया कि SIT ने कई बिंदुओं पर गहन छानबीन की, जिसके बाद जो तथ्य सामने आए, वह बेहद चौंकाने वाले हैं.
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गांव की कथित ‘भगतिनी’ (शांति देवी) के द्वारा मृतका की मां को बतलाया गया था कि उसकी बेटी के ऊपर देवास यानि कि भूत आया है. साथ ही बेटे की बेहतर सेहत के लिए कुंवारी लड़की की नरबलि देनी होगी.
24 मार्च को महिला अपने बच्चों के साथ जुलूस में शामिल हुई और बाद में छोटी बेटी को लेकर भगतिनी के घर पहुंची. रात करीब 9:30 बजे पूजा के बहाने बच्ची को बांसवारी ले जाया गया.
पूजा के लिए 251 रुपये चढ़ाने की बात कही गई थी, लेकिन मृतिका की मां ने मात्र 20 रुपये ही दिए. इसके बाद भगतिनी के घर स्थित मनसा मंदिर में बच्ची को बैठाकर तंत्र-मंत्र से पूजा शुरू की गई. बच्ची के माथे पर सिंदूर का टीका लगाया गया, आंखों में काजल लगाया गया तथा प्रसाद के रूप में इलायची दाना खिलाया गया.
इसके बाद भगतिनी बच्ची को अपने कथित “भूत बांधने” के स्थान बांसवाड़ी ले गई, जहां पहले से मौजूद भीम राम और रेशमी देवी ने बोरे के अंदर का सफेद प्लास्टिक जमीन पर बिछाया और उसी पर बच्ची को लिटा दिया गया. भगतिनी के हाथ में बांस का डंडा था, जिसे वह बच्ची के शरीर के चारों ओर घुमाते हुए कहने लगी कि उस पर देवी आ गई है और उसे कुंवारी लड़की का खून चाहिए.
इसी दौरान भीम राम ने बच्ची का गला दबा दिया, जबकि मृतिका की मां ने उसके दोनों पैर पकड़ लिए. बच्ची के छटपटाने के बाद जब उसकी मौत हो गई, तब भी आरोपियों की क्रूरता थमी नहीं. भगतिनी के इशारे पर बच्ची के कपड़े कमर से नीचे खींच दिए गए और बांस के डंडे को उसके गुप्तांग में जबरन प्रवेश कराया गया. इसके बाद खून निकालने की नीयत से पत्थर से उसके सिर पर वार किया गया, जिससे उसका सिर फट गया और चेहरा खून से लथपथ हो गया. आरोप है कि उसी खून से भगतिनी ने तांत्रिक अनुष्ठान किया और खून को अपने मनसा मंदिर में छिड़का.
हत्या के बाद बच्ची के खून से कथित तौर पर पूजा की गई और फिर उसके शव को बगीचे में फेंक दिया गया. बाद में पुलिस ने शव बरामद कर मामले की जांच शुरू की.
आरोपी शांति देवी उर्फ ‘भगतिनी’ तंत्र-मंत्र के जरिए लोगों की समस्याएं दूर करने का दावा करती थी. मृतका की मां पिछले एक साल से अपने बेटे की शारीरिक और मानसिक समस्याओं को लेकर उसके संपर्क में थी.
इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है:
रेशमी देवी (उम्र करीब 35 वर्ष), पति बिनोद कुमार सिंह
शांति देवी उर्फ भगतिनी (उम्र करीब 55 वर्ष), पति स्व. ईश्वर ठाकुर
भीम राम (उम्र करीब 45 वर्ष), पिता स्व. छेदी भुईयाँ
तीनों आरोपी कुसुम्बा गांव, थाना विष्णुगढ़, जिला हजारीबाग के निवासी हैं.
इस मामले ने जनता में काफी आक्रोश पैदा किया. विपक्षी भाजपा ने सोमवार को हजारीबाग में हत्या के विरोध में 12 घंटे का बंद आयोजित किया था.

