
उदित वाणी, जमशेदपुर : चक्रधरपुर–टाटानगर रेलखंड में शुक्रवार को रेल परिचालन की सुस्ती एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई. हालात ऐसे रहे कि 62 किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रेन को पूरे पांच घंटे लग गए. मामला पूरी–हरिद्वार उत्कल एक्सप्रेस से जुड़ा है, जो पहले से ही 13 घंटे की देरी के साथ चक्रधरपुर पहुंची थी. इसके बाद चक्रधरपुर से टाटानगर तक का महज 62 किलोमीटर का सफर तय करने में भी ट्रेन को पांच घंटे लग गए, जिससे यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई.
रेलवे के आधिकारिक समय के अनुसार चक्रधरपुर से टाटानगर की दूरी सामान्य परिस्थितियों में करीब 1 घंटा में पूरी हो जाती है. लेकिन शुक्रवार को यही दूरी ट्रेन ने औसतन 12.5 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तय की. इस दौरान न तो घना कोहरा था, न तार काटने (केबल चोरी) की कोई घटना सामने आई और न ही हाथियों की आवाजाही की सूचना थी. इसके बावजूद ट्रेन की रफ्तार बेहद धीमी रही.
यात्रियों के अनुसार ट्रेन लगातार कई स्टेशनों और संकेतों पर खड़ी रही. इस कारण पहले से देरी झेल रहे यात्रियों का धैर्य जवाब देने लगा. एक यात्री ने बताया कि रातभर की देरी के बाद उम्मीद थी कि टाटानगर पहुंचते-पहुंचते ट्रेन समय की कुछ भरपाई कर लेगी, लेकिन उल्टा सफर और भी लंबा हो गया.
जानकारी के मुताबिक ट्रेन को टाटानगर स्टेशन पहुंचने का निर्धारित समय 5 मार्च की शाम करीब 5:45 बजे था, लेकिन यह 6 मार्च को सुबह 11:09 बजे स्टेशन पहुंची. इस तरह ट्रेन लगभग 17 घंटे 24 मिनट की देरी से टाटानगर पहुंची, जबकि अपने प्रारंभिक स्टेशन से कुल देरी करीब 18 घंटे तक पहुंच गई.
रेलवे के इस संचालन को लेकर यात्रियों में नाराजगी देखी गई. यात्रियों का कहना है कि जब कोई तकनीकी समस्या या प्राकृतिक बाधा भी नहीं थी, तब भी ट्रेन का इतना विलंब रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है.
यात्रियों ने मांग की है कि रेलवे प्रशासन चक्रधरपुर–टाटानगर रेलखंड में ट्रेनों की रफ्तार और संचालन व्यवस्था की समीक्षा करे, ताकि भविष्य में यात्रियों को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े. फिलहाल यह सवाल बरकरार है कि क्या यह महज परिचालन दबाव था या फिर कहीं न कहीं प्रबंधन की कमी.

