
उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर के साहित्यकार जयनंदन ने कहा कि यह सम्मान उनके कुल-खानदान के साथ ही गांव और शहर के उन किसानों, मजदूरों और मजलूमों का सम्मान है, जिनकी आवाज उनके साहित्य की पहचान है.
रवीन्द्र भवन साकची में मंगलवार 31 जनवरी को आयोजित श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान समारोह को जयनंदन संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि यह सम्मान पाना, उनके लिए अभूतपूर्व और अविस्मरणीय है. ऐसा लग रहा है कि वे जागरण की अवस्था में सच होने का सपना देख रहे हैं. वह भी उस वक्त, जब हर सम्मान सवालों के घेरे में होता है. जयनंदन ने इस सम्मान के लिए इफको और इसके निर्णायकों के प्रति कृतज्ञता जाहिर की और कहा कि किसी भी निर्णायक से उनके घनिष्ठ संबंध नहीं रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इफको ने साहित्यकारों को यह सम्मान देकर देश में एक नये युग का शुभारंभ किया है. जब शोषण के खिलाफ आवाज उठाने वाला स्वयं शोषित हो, ऐसे में यह सम्मान मिलना बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने इफको कंपनी को इस बात के लिए भी धन्यवाद दिया कि उसने उनके अनुरोध को स्वीकार कर जमशेदपुर में यह कार्यक्रम करने का फैसला लिया. जयनंदन ने अपने अनुभवों को भी साझा किया और कहा कि कैसे उनके पास पहनने के कपड़े तक नहीं थे.
यह सम्मान, जमशेदपुर का है-पाठक
मुख्य अतिथि साहित्यकार मनमोहन पाठक ने कहा कि यह सम्मान जयनंदन जी का नहीं, बल्कि जमशेदपुर का सम्मान है. उन्होंने जयनंदन को 11 लाख राशि के पुरस्कार के साथ प्रशस्ति पत्र भेंट किया. मौके पर इफको के संयुक्त प्रबंध निदेशक राकेश कपूर, साहित्यकार शिवमूर्ति, रवीन्द्र त्रिपाठी, डॉ.राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, प्रोफेसर रवि भूषण मौजूद थे.
ग्रामीण जीवन पर सेमिनार का आयोजन
हिन्दी कथा साहित्य में ग्रामीण और कृषि जीवन पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के साहित्यकार डॉ.सी भास्कर राव के साथ डॉ.राकेश कुमार मिश्र, प्रोफेसर रवि भूषण और राकेश बिहारी ने भाग लिया. मौके पर पथ के कलाकारों की ओर से कहानी शिवपालगंज का मंचन किया गया. लोक गायिका चंदन तिवारी की गायिकी का आनंद भी लोगों ने उठाया.
2011 से मिल रहा है यह सम्मान
खाद बनाने वाली कंपनी इफको 2011 से यह सम्मान वैसे लेखकों को दे रही है, जिनके साहित्य में गांव और किसान की कहानियां होती हैं. इसके पहले यह सम्मान मशहूर साहित्यकार स्वर्गीय विद्यासागर नौटियाल, शेखर जोशी, संजीव, मिथिलेश्वर, अष्टभुजा शुक्ल, कमलाकांत त्रिपाठी, रामदेव धुरंधर, रामसिंह दिवाकर, रमेश कटारे, रणेन्द्र और शिवमूर्ति को दिया गया है. जयनंदन युवा ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता भी रहे हैं. इसके अलावा उन्हें राधाकृष्ण पुरस्कार, विजय वर्मा कथा सम्मान, बिहार सरकार राजभाषा सम्मान, आनंद सागर स्मृति कथाक्रम सम्मान, बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान, झारखंड साहित्य सेवी सम्मान, स्वदेश स्मृति सम्मान, निर्मल मिलिंद सम्मान मिल चुका है.

