
उदित वाणी, जमशेदपुर: शहर की जितनी आबादी है, उसकी तुलना में किसी भी अन्य शहर से ज्यादा घनत्व में वाहनों की संख्या है. जमशेदपुर पूर्वी और जमशेदपुर पश्चिमी की आबादी लगभग 10 लाख के करीब है.
उसके अनुपात में यहां वाहनों की संख्या 9.11 लाख के लगभग है. यही कारण है कि यहां आए दिन लोगों को जाम के झाम से जूझना पड़ता है. विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले 10 वर्षो में वाहनों की संख्या 15 लाख के लगभग हो जाएगी. वैसी स्थिति में अगर नए पुल पुलिया और फ्लाइओवर का निर्माण नहीं कराया गया तो लोगों का सडक़ पर चला मुुश्किल हो जाएगा.
मानगो डिमना रोड और पारडीह से बालिगुमा तक चाहिए फ्लाईओवर
शहर को भविष्य में जाम से मुक्त करने के लिए मानगो डिमना रोड और एनएच 33 में पारडीह से लेकर बालिगुमा तक 7 किलोमीटर का फ्लाईओवर बनाना ही होगा. मंत्री बन्ना गुप्ता ने मानगो डिमना रोड के फ्लाईोवर के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव भी पास करवा लिया है.
इसके लिए मिट्टी की जांच भी की जा चुकी है. वहीं एनएच 33 में पारडीह से बालिगुमा तक सात किलोमीटर के फ्लाईओवर का डीपीआर बनाने के लिए एनएचएआइ के द्वारा एजेंसी तय की जा चुकी है.
प्रस्तावित है तीन हजार पांच सौ करोड़ का ईस्टर्न कॉरिडोर
शहर में वेस्र्टन और ईस्र्टन कॉरिडोर बनाया जाना था जिसमें से वेस्र्टन कॉरिडोर (साकची कोर्ट से मरीन ड्राइव होते हुए आदित्यपुर टोल प्लाजा से कांड्रा रोड तक) का काम पूरा हो चुका है जबकि ईस्टर्न कॉरिडोर अधर में लटका हुआ है.
इसके लिए पांच वर्ष पूर्व तक तीन हजार पांच सौ करोड़ का बजट प्रस्तावित था. सरकार और कंपनी के बीच खर्च वहन को लेकर पेंच फंसा हुआ है, माना जा रहा है कि इसके बनने से शहर को बहुत हद तक जाम से निजात मिल जाएगी.
शहर में वाहनों की स्थिति
वर्तमान में कुल वाहन : 9.11 लाख
व्यवसायिक वाहन : 93.58 हजार
गैर व्यवसायिक वाहन : 8.7 लाख
इस साल खरीदे गए वाहन 22,310
कुल ऑटो 29, 827
दोपहिया वाहन 7.01 लाख
कार 1.10 लाख
ट्रेलर 4329
जीप 9240
टैक्सी 5478
स्टेशन वैगन 29
बसें 1279
ट्रक 16171
एनएच पर बड़ी दुर्घटना को अधिकारी होंगे जिम्मेवार, एनएचएआई ने तय की जवाबदेही
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इंजीनियरिंग कार्यों में खामी के चलते बनी खराब सडक़ पर किसी भी गंभीर दुर्घटना के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराएगा.
हालांकि एनएच पर दुर्घटना रोकने के लिए सडक़ एवं परिवहन मंत्रालय गंभीर हैं विभाग के द्वारा जारी प्रपत्र में कहा गया है कि अंतिम प्रमाण पत्र जारी करने से पूर्व रोड मार्किंग, रोड साइनेज, क्रैश बैरियर के अंतिम उपचार जैसे सुरक्षा कार्यों को देखना अनिवार्य है. लंबित कार्यों को एक श्रेणी के तहत रखा जाता है, जिसे पंच सूची कहा जाता है.
प्राधिकरण ने कहा कि पंच सूची में वही कार्य शामिल करने चाहिए, जो सडक़ सुरक्षा से संबंधित नहीं हैं और इस सूची के कार्यों को 30 दिनों के भीतर पूरा करना चाहिए.
सेफ्टी ऑडिटर्स से ऑडिट के बाद ही जारी होता है अंतिम प्रमाण पत्र : कर्नल कपूर
निर्माणाधीन एनएच 33 के प्रोजेक्ट डायरेक्टर कर्नल कपूर ने कहा कि किसी भी एनएच को अंतिम रुप से तभी चालू किया जाता है जब सेफ्टी ऑडिटर्स के द्वारा एनओसी दे दिया जाता है, जहां तक दुर्घटना की बात है तो इसे तब तक रोका नहीं जा सकता जबतक लॉ इफोर्समेंट टीम सख्ती से कानून लागू नहीं करती. बहुत हद तक वाहन चालक भी स्वंय दुर्घटना के लिए जिम्मेवार होते हैं.

