
उदित वाणी, जमशेदपुर : शहर के प्रतिष्ठित उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण मामले ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है. इस सनसनीखेज कांड की जांच के लिए झारखंड पुलिस ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठित की है, जिसने अब तक कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि इस अपहरण के पीछे हाजीपुर गैंग से जुड़े अपराधियों की भूमिका हो सकती है. साथ ही, धनबाद से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नेटवर्क फैलाने वाले कुख्यात प्रिंस खान गिरोह के शामिल होने की आशंका भी जताई जा रही है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार यह अपहरण पूरी तरह संगठित और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया है. अपहरणकर्ताओं ने खुद को पुलिसकर्मी दर्शाने के लिए जिस स्कॉर्पियो का इस्तेमाल किया, उस पर “पुलिस” का बोर्ड लगा हुआ था, जबकि उसकी नंबर प्लेट फर्जी थी. जांच में सामने आया है कि वह नंबर वास्तव में कोडरमा जिले की एक बोलेरो गाड़ी का है. इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अपराधियों ने जानबूझकर पुलिस की पहचान का दुरुपयोग कर वारदात को अंजाम दिया.
सीसीटीवी फुटेज में उक्त स्कॉर्पियो को कदमा-सोनारी लिंक रोड स्थित कदमा टोल ब्रिज से गुजरते हुए और फिर चौका के पास के टोल ब्रिज को पार करते देखा गया है. इतना ही नहीं, वही गाड़ी 109 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एयरोड्रम की ओर लौटती हुई भी कैमरों में कैद हुई है. तकनीकी सेल इन फुटेज और कॉल डिटेल्स के आधार पर अपहरणकर्ताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है. इस कड़ी में इंडोनेशिया के नंबर से आए फोन कॉल की भी गहन जांच की जा रही है, जिससे पूरे मामले को अंतरराष्ट्रीय कड़ी से जोड़कर देखा जा रहा है.
पुलिस की टीमें झारखंड के अलावा बिहार में भी लगातार छापेमारी कर रही हैं. जांचकर्ताओं का मानना है कि यह वारदात 2005 में हुए कारोबारी कृष्णा भालोटिया के अपहरण से काफी मिलती-जुलती है. उस समय भी हाजीपुर के अरविंद गिरोह ने कांड को अंजाम दिया था. संयोग से, उसी तरह उद्यमी भालोटिया का भी अपहरण हुआ था. अब आशंका जताई जा रही है कि उसी गिरोह ने स्थानीय सहयोगियों की मदद से कैरव गांधी के अपहरण को अंजाम दिया है.
इस बीच पुलिस ने जेमको इलाके से खट्टा बबलू नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसे रेकी करने वाला बताया जा रहा है. हालांकि, अब तक पुलिस आधिकारिक रूप से ज्यादा जानकारी देने से बच रही है और पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है.
सूत्रों का दावा है कि हाजीपुर गैंग और प्रिंस खान गिरोह ने मिलकर इस कांड को अंजाम दिया है और करीब 10 करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की गई है. पुलिस इस संवेदनशील मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए हर पहलू पर जांच कर रही है. शहर की निगाहें अब एसआईटी की कार्रवाई पर टिकी हैं, कि कब तक कैरव गांधी सुरक्षित अपने घर लौटते हैं और अपराधियों का पर्दाफाश होता है.

