
उदित वाणी, जमशेदपुर : पथ – पीपुल्स एसोसिएशन फॉर थियेटर, जमशेदपुर द्वारा शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025 को तुलसी भवन में नाट्य संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें वरिष्ठ नाटककार विजय तेंदुलकर की चर्चित कृति ‘कन्यादान’ का प्रभावशाली मंचन प्रस्तुत किया गया. यह आयोजन ‘डेट/सहयोग’ और तुलसी भवन के संयुक्त प्रयास से संपन्न हुआ.
कार्यक्रम के दौरान शहर के सुप्रसिद्ध रंगकर्मी, साहित्यप्रेमी एवं वरिष्ठ नागरिक — श्री दिनेश रंजन, श्री हरी मित्तल, श्री संजय मिश्र, पूर्बी घोष, कृष्णा सिन्हा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. दर्शकों ने मंचन की संवेदनशीलता, प्रस्तुति की गहराई और विषय की सामाजिक प्रासंगिकता की सराहना की.
नाटक की विषयवस्तु और सामाजिक संवाद
‘कन्यादान’ ने रंगमंच पर आधुनिक भारतीय समाज में जाति, वर्ग और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के टकराते विमर्शों को तीखे और यथार्थपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया. बसंत देव द्वारा अनूदित विजय तेंदुलकर की यह कालजयी रचना दर्शकों को सोचने पर विवश करती है कि क्या सामाजिक परिवर्तन केवल विचार और भाषणों से संभव है, या वास्तविक जीवन की चुनौतियाँ ही आदर्शों की असली परीक्षा लेती हैं.
कहानी प्रगतिशील नेता नाथ देवलालीकर और उनकी बेटी ज्योति के साहसिक निर्णय के इर्द-गिर्द घूमती है. चरम क्षण तब आता है जब ज्योति अपने पिता की आदर्शवादी सोच पर प्रश्न उठाती है और यह स्वीकार करती है कि उसका पति अरुण, अपनी कमियों और आक्रामक प्रवृत्तियों के बावजूद, वही व्यक्ति है जिसे वह पूर्ण रूप से स्वीकारना चाहती है. यह संवाद दर्शकों के सामने यह प्रश्न रखता है कि क्या कल का शोषित आज का शोषक बन सकता है, और क्या मध्यवर्गीय आदर्शों की कीमत संवेदनशील जीवनों को चुकानी पड़ती है.
दमदार अभिनय और निर्देशन
नाटक में सबा शेख (ज्योति), सुमन नायक (अरुण आठवले), आशुतोष कुमार (जय प्रकाश), रहमत (हामीर राव), छवि दास (सेवा) और मोहम्मद निज़ाम (नाथ देवलालीकर) ने अपने पात्रों को जीवंत कर दिया. सभी कलाकारों ने भावनात्मक गहराई और अभिनय की परिपक्वता से दर्शकों को बांधे रखा.
निर्देशन मोहम्मद निज़ाम का रहा, जिन्होंने नाटक की संवेदना, राजनीतिक दृष्टि और पात्रों के आंतरिक संघर्षों को उत्कृष्ट रूप में प्रस्तुत करते हुए रंगमंच पर सशक्त संवाद रचा.
पार्श्व मंच एवं तकनीकी सहयोग
मंच सज्जा – रुपेश प्रसाद
पार्श्व संगीत – नीतीश राय
मंच आलोक – खुर्शीद आलम
तकनीकी टीम और ‘पथ’ संस्था के सभी सदस्यों के संयुक्त प्रयास ने प्रस्तुति को कलात्मक रूप से समृद्ध बनाया और मंचन को एक परिपूर्ण रूप प्रदान किया.
निष्कर्ष
पथ, जमशेदपुर की यह नाट्य संध्या केवल कलात्मक प्रस्तुति भर नहीं थी, बल्कि सामाजिक प्रश्नों, विचारों और बदलाव की अवधारणाओं पर एक सार्थक विमर्श भी थी. ‘कन्यादान’ का यह मंचन दर्शकों के मन में गहरी छाप छोड़ गया और समाज के प्रति रंगमंच की जिम्मेदारी तथा उसकी प्रासंगिकता को पुनः स्थापित किया.

