
उदित वाणी, रांची : राज्य निर्वाचन आयुक्त के पद पर पदभार संभालने के बाद पूर्व मुख्य सचिव अलका तिवारी ने शुक्रवार को राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अलग-अलग मुलाकात की. वहीं राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के बाद पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग द्वारा भी शुक्रवार को नगर विकास एवं आवास विभाग को ओबीसी ट्रिपल टेस्ट की रिपोर्ट सौंप दी गई.
इसके साथ ही राज्य में नगर निकायों के चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई है. लंबे समय से लंबित निकाय की चुनावों को लेकर अटकलें भी तेज हो गई है. ज्ञात हो कि राज्य सरकार पिछड़े वर्ग के आरक्षण के मुद्ये को लेकर ही निकाय चुनाव टालती रही है. परंतु अब पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग द्वारा नगर विकास विभाग को अद्यतन रिपोर्ट सौंप दी है. जिसके आधार पर विभाग को निकाय चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षण तय किया जाना है.
बताया गया है कि विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट में निकायों में ओबीसी की आबादी लगभग 48 फीसदी है. उधर निकाय चुनावों को लेकर झारखंड हाईकोर्ट भी काफी सख्त है और हाईकोर्ट में निकाय चुनाव नहीं कराये जाने को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई चल रही है. मामले में 14 अक्तूबर को झारखंड हाईकोर्ट में अगली सुनवाई की तिथि तय की गई है. जबकि पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने निकायों का चुनाव नहीं कराने के मामले में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगायी थी.
मामले में सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा निवर्तमान मुख्यसचिव अलका तिवारी, कैबिनेट की प्रधान सचिव वंदना दादेल, नगर विकास विभाग के पूर्व सचिव विनय कुमार चौबे और अपर सचिव ज्ञानेंद्र कुमार के खिलाफ नोटिस भी जारी किया गया है तथा अगली सुनवाई के दौरान सभी अधिकारियों को अदालत में सशरीर हाजिर होने का निर्देश दिया गया है. हालांकि फिलवक्त अलका तिवारी और ज्ञानेंद्र कुमार रिटायर हो चुके हैं.

