
उदित वाणी, जमशेदपुर : रेल सिविल डिफेंस की ओर से शनिवार को टाटानगर रेल सब डिविजनल अस्पताल में एक विशेष मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया. इस अवसर पर अस्पताल के चिकित्सकों, नर्सों और कर्मचारियों को कार्बन डाई ऑक्साइड इन-बॉक्स फायर संयंत्र की असेम्बली और उसके सही उपयोग की विधि का प्रशिक्षण दिया गया. मॉक ड्रिल रेल सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार के निर्देश पर आयोजित की गई.
डेमोंस्ट्रेशन के दौरान सिविल डिफेंस डेमोंस्ट्रेटर अनिल कुमार सिंह और रमेश कुमार ने कार्बन डाई ऑक्साइड फायर संयंत्र को जोड़ने की विधि विस्तार से समझाई. उन्होंने हॉर्न की थ्रेड और रबर बासर को सही ढंग से लगाने का तरीका बताया. साथ ही अस्पताल में उपलब्ध ड्राई केमिकल पाउडर (डीसीपी) फायर संयंत्र और कार्बन डाई ऑक्साइड फायर संयंत्र के बीच के अंतर को स्पष्ट किया. बताया गया कि डीसीपी फायर संयंत्र क्रियेटिव प्रेसर टाइप होती है और एक बार उपयोग के बाद दोबारा इस्तेमाल नहीं हो सकती. जबकि कार्बन डाई ऑक्साइड फायर संयंत्र प्रेशर टाइप होती है, जिसे बार-बार उपयोग में लाया जा सकता है.

विशेष रूप से बताया गया कि कार्बन डाई ऑक्साइड फायर संयंत्र का उपयोग अस्पताल की महंगी मशीनों—जैसे एक्स-रे मशीन, अल्ट्रासाउंड मशीन और इलेक्ट्रिक पैनल—में आग लगने की स्थिति में करना चाहिए, क्योंकि इसके प्रयोग से मशीनों को कोई क्षति नहीं होती. प्रशिक्षण के दौरान चिकित्सकों और नर्सों ने स्वयं कार्बन डाई ऑक्साइड फायर संयंत्र का उपयोग कर आग बुझाने का अभ्यास भी किया.
कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जे.पी. माहाली, क्षेत्रीय प्रबंधक समीर सौरभ, वरिष्ठ मंडल चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पाली टारजेन, डॉ. एस. मुर्मू, एएनओ मंजुलता खटूआ, मेट्रन, नर्सिंग स्टाफ, पैथोलॉजिस्ट, ड्रेसर और कार्यालय के सभी कर्मचारी उपस्थित रहे.
अंत में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक जे.पी. मोहाली ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए रेल सिविल डिफेंस टीम की उच्च गुणवत्ता वाली प्रशिक्षण शैली की सराहना की. उन्होंने कहा कि ऐसे मॉक ड्रिल अस्पताल कर्मियों की आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता को मजबूत करते हैं और यह अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है.

