
उदित वाणी, झारखंड: झारखंड की आत्मा, आदिवासी अस्मिता की पहचान और सामाजिक न्याय के प्रतीक आदरणीय शिबू सोरेन जी का निधन राज्य और देश के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके जाने से झारखंड आंदोलन के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है।
दिशोम गुरुजी ने न केवल झारखंड आंदोलन को दिशा दी, बल्कि जीवनभर आदिवासी, दलित और वंचित वर्गों की आवाज बनकर उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनके योगदान को कोई शब्द नहीं बयान कर सकते, क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी समाज के निचले तबके के लिए समर्पित की थी।
आज जब शिबू सोरेन का देहांत हुआ है, तो उनके द्वारा किए गए संघर्ष, विचार और कर्म झारखंड की राजनीति में सदैव याद किए जाएंगे। उनका आदर्श और कार्य हम सभी को प्रेरित करता रहेगा।
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