
उदित वाणी, जमशेदपुर : समाहरणालय सभागार में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई. बैठक में राज्य सरकार द्वारा संचालित आधारभूत संरचना निर्माण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों पर चर्चा की गई. उपायुक्त ने सभी विभागों को योजनाओं के समयबद्ध निष्पादन के लिए आपसी समन्वय को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया.
प्रशासनिक संवेदनशीलता और जनसरोकारों पर बल
उपायुक्त ने कहा कि योजनाएं तभी सार्थक होंगी जब वे लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुँचें. उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान हेतु प्रशासनिक संवेदनशीलता के साथ कार्य करें. प्रत्येक प्रखंड में सप्ताह में एक दिन जनशिकायत निवारण दिवस आयोजित करने का निर्देश दिया गया. भूमि संबंधी योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए अंचल अधिकारियों को समय पर प्रतिवेदन देने, और भूमि विवाद की स्थिति में अभियंताओं को अंचलाधिकारियों के साथ समन्वय कर शीघ्र समाधान निकालने को कहा गया.
जनजातीय हितों और कल्याण योजनाओं को मिली प्राथमिकता
कल्याण विभाग से सरना, मसना, कब्रिस्तान, जाहेरस्थान घेराबंदी, छात्रावास, आस्पताल और आंगनबाड़ी केंद्रों से संबंधित योजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित कर प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया गया. डूमरिया के लखाईडिह स्थित छात्रावास का उद्घाटन 15 दिन में कराने की योजना बनाई गई.
शिक्षा में सुधार : दुर्गम क्षेत्र, पोषण वाटिका और स्वास्थ्य जांच पर ज़ोर
शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि शिक्षण अवधि में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में न लगाया जाए. पोटका और गुड़ाबांदा के दुर्गम इलाकों के विद्यालयों में पेयजल और सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई. विद्यालयों में किचन गार्डन, पोषण वाटिका, दीदी-बाड़ी जैसे नवाचारों को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया. बच्चों के स्वास्थ्य के लिए स्कूलों में कैंप लगाकर हिमोग्लोबिन, आंख, त्वचा, ऊंचाई व वजन की जांच कर हेल्थ कार्ड बनाने की जिम्मेदारी सिविल सर्जन को सौंपी गई. बाल श्रम से पुनर्वासित बच्चों को आवासीय विद्यालयों में नामांकन कराने हेतु शिक्षा विभाग को दिशा-निर्देश दिए गए.
आंगनबाड़ी चयन में पारदर्शिता और प्रशिक्षण पर बल
समाज कल्याण विभाग को नव-चयनित सेविका-सहायिका को प्रशिक्षण देने और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने हेतु प्रखंड विकास पदाधिकारियों के माध्यम से कार्य करने को कहा गया.
पर्यटन और पशुपालन विभाग को मिली जिम्मेदारी
पर्यटन विभाग को अपने भवनों और संसाधनों के सार्थक उपयोग हेतु कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया गया. वहीं पशुपालन विभाग को प्रखंड व पंचायत स्तर पर उपलब्ध भवनों में अपने चिकित्सक और तकनीकी कर्मियों की उपस्थिति और उपयोगिता सुनिश्चित करने को कहा गया. मुख्यमंत्री पशुधन योजना के लाभुकों को पशुधन बीमा और फीडबैक हेतु सर्वेक्षण कर रिपोर्ट देने को कहा गया.
श्रमिक हितों की सुरक्षा : त्वरित मुआवज़ा और निगरानी प्रणाली
श्रम विभाग की समीक्षा में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि प्रवासी श्रमिकों की दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में दो घंटे के भीतर सत्यापन और उसी दिन मुआवजा भुगतान सुनिश्चित किया जाए. इसके अलावा भवनों के रख-रखाव, मरम्मति, 108 एंबुलेंस, ममता वाहन, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित निगरानी पर भी ज़ोर दिया गया.
बैठक में हुई समग्र समीक्षा, अधिकारी रहे उपस्थित
बैठक में उप विकास आयुक्त नागेंद्र पासवान, सिविल सर्जन डॉ. सहिर पाल, अपर उपायुक्त भगीरथ प्रसाद, निदेशक (एनईपी) संतोष गर्ग, जिला परिवहन पदाधिकारी धनंजय, घाटशिला एसडीओ सुनील चंद्रा सहित सभी विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे. सभी ने अपने विभागों से जुड़ी योजनाओं और चुनौतियों पर प्रस्तुतिकरण दिया.

