
उदित वाणी, जमशेदपुर : टाटा स्टील के अर्बन सर्विसेस के प्रमुख रहे गोविंद माधव शरण का निधन बुधवार शाम 4.45 बजे टाटा मुख्य अस्पताल में हो गया. एक मई को उनका ब्रेन हैम्ब्रेज हो गया था, तबसे वे अस्पताल में ही थे. कला और संगीत के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने वाले शरण के निधन पर पूरा शहर मर्माहत है. कोरपोरेट जगत के साथ ही कला, संगीत, रंगमंच से जुड़े लोगों ने उनके निधन को इस शहर के साथ ही कला और संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है. श्री शरण की अन्त्येष्टि शुक्रवार 27 जून को पार्वती घाट पर होगी. पत्नी चंद्रा शरण भी टाटा स्टील की अधिकारी रही है. उनकी पहचान टाटा स्टील में काम करने वाले लोगों की पत्नियों के लिए शुरू किए गए बसेरा नामक कार्यक्रम से हुई थी.
जमशेदपुर म्यूजिक सर्किल के महासचिव सुभाष बोस ने बताया कि हम कल्पना में भी नहीं सोचे थे कि शरण साहब इतनी जल्दी चले जाएंगे. श्री शरण का जमशेदपुर की बहुत सारी कला और संस्कृति से जुड़ी संस्थाओं से गहरा संबंध था और वे इन संस्थाओं को हर संभव मदद करने का प्रयास करते थे. जमशेदपुर म्यूजिक सर्किल के अध्यक्ष अनिरुद्ध सेन तथा सर्किल के तमाम कलाकारों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया है. गोविंद माधव शरण ने टाटा स्टील को कला, संगीत और समाज से जोड़ने में उत्कृष्ट काम किया था. उनके नेतृत्व में ही अरबन सर्विसेस की ओर से मुशायरा और कवि सम्मेलन सरीखे कार्यक्रम शुरू हुए थे. 2015 का मुशायरा उनके नेतृत्व में हुआ था, जिसमें देश के 15 नामचीन शायरों ने भाग लिया था. वे नवल टाटा हॉकी एकेडमी के भी प्रशासक थे.
2017 में हुए थे रिटायर
गोविंद माधव शरण 2017 में 34 साल की सेवा के बाद रिटायर हुए थे. उन्होंने वर्ष 1982 में टाटा स्टील के कम्प्यूटर सर्विस डिपार्टमेंट में बतौर एडमिनिस्ट्रेशन प्रशिक्षु ज्वाइन किया था. इसके बाद कम्प्यूटर सर्विस विभाग में मैनेजर, ग्रोथ शॉप एडीएम व टाउन एडमिनिस्ट्रेशन में डिप्टी डिविजनल मैनेजर के रूप में काम किया. वर्ष 2008 में हेड कम्युनिटी डेवलमेंट व सीडी एंड एसडब्ल्यू विभाग में भी काम किया. वर्ष 2014 से वे स्पेशल प्रोजेक्ट हेड के रूप में काम कर रहे थे.
कोविड के बाद बुजुर्गों के लिए बनाया क्लब
कोविड महामारी के बाद के एकाकीपन और अकेलापन को दूर करने के लिए शरण ने 2021 में 60 साल पार बुजुर्गों के लिए विजडम क्लब की शुरूआत की. रिंकल से ट्विंकल तक नाम के इस कार्यक्रम में उन्होंने बुजुर्गों के चेहरे पर मुस्कान लाने की कोशिश की. उन्होंने बताया था कि क्लब बनाने का मकसद बुजुर्गों को अकेलेपन से दूर रखने और उनकी जरूरतों को पूरा करना है. यहां की कंपनियों में काम करने वाले लोग रिटायरमेंट के बाद जमशेदपुर नहीं छोड़ते हैं.
वे यहीं फ्लैट लेते हैं और रह जाते हैं. इसका कारण है यहां की बेहतरीन व्यवस्था है. बच्चे भी पढ़ाई के बाद बाहर निकल जाते हैं, बाहर ही जॉब करते हैं. पेरेंट्स से दूर रहने के कारण पेरेंट्स और बच्चों के बीच गैप हो जाता है. लंबे समय तक बातचीत नहीं हो पाती. शादी के बाद बच्चे बाहर ही सेटल हो जाते हैं. ऐसे में उनकी बीच की दूरियां और बढ़ जाती है. विजडम क्लब की शुरुआत करने का मकसद बुजुर्गों को लाइफ की सेकंड इनिंग में वह सब कुछ देना है, जो वे नहीं कर पाए. इस क्लब के तहत पिकनिक और हेल्थ चेकअप कैंप का आयोजन होता था.

