
* कहा-बदलते वैश्विक हालातों के साथ तालमेल रखना जरूरी, एमएसएमई सेक्टर के लिए अवसरों की कमी नहीं
उदित वाणी, जमशेदपुर : सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने अपने प्लैटिनम जुबिली समारोह की कड़ी में आज कदमा स्थित कुडी मोहंती ऑडिटोरियम में ‘ईस्टर्न इंडिया : ए केलाइडोस्कोप ऑफ ऑपच्र्युनिटीज- जमशेदपुर दी फोकल प्वाइंट’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें टाटा स्टील के एमडी और सीईओ टी वी नरेंद्रन मुख्य अतिथि और टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट (कारपोरेट सर्विसेज) डी बी सुंदर रामम सम्मानित अतिथि थे. अपने संबोधन में टी वी नरेंद्रन ने विश्व के वर्तमान भू राजनैतिक हालातों का टाटा स्टील और भारत पर असर से लेकर स्थानीय उद्योगों को भविष्य की राह दिखाई. उन्होंने कहा कि 75 सालों में भारत ही नहीं टाटा स्टील ने बहुत बदलाव देखे. झारखंड का भी जन्म इन्हीं वर्षों में हुआ है. ये बदलाव बतलाते हैं कि किसी भी संस्थान या कंपनी के लिए नियमित बदलाव जरूरी है इसलिए हमेशा बदलाव के लिए तैयार रहें.सिंहभूम चैंबर सहित एक्सएलआरआई, एनएमएल और आईआईटी खडग़पुर भी अपनी स्थापना के 75वां वर्ष मना रहे हैं. इन संस्थाओं ने भारत का भविष्य तैयार किया.
पूरी तरह तब्दील हो गया है औद्योगिक माहौल
इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग के चलते मध्य पूर्व के देशों में हालात बदले हैं और इसका असर भारत तथा टाटा स्टील पर भी पड़ेगा.उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है. परिवहन, टेक्नोलाजी, इंटरनेट, व्यवसाय, डिजिटलाइजेशन, बाजार की प्रकृति, आनलाइन आर्डर सबकुछ बदल रहा है.कस्टमर क्या चाहता है इसका डेटा भी आज उपलब्ध है. क्विक कामर्स कंपनियां किसी भी उत्पाद या उपकरण का कहीं पर भी डिलीवरी कर रही है. 37 साल पहले जब मैंने टाटा स्टील ज्वाइंन किया था तब चीन की कोई बात नहीं करता था अब हर क्षेत्र में उसका नाम है.तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ मिडिल ईस्ट में शिपमेंट सहित हर क्षेत्र में इसका असर पड़ रहा है.वैश्विक स्तर पर अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वार हमारे लिए अवसर के समान है.कंपोनेंट बनानेवाली कई कंपनियां पिछले 30 साल में वल्र्ड क्लास बन चुकी हैं. कई देशों में एमएसएमई का जीडीपी में 50 प्रतिशत तक का योगदान रहता है. यह क्वालिटी इंडस्ट्री है.इटली-कोरिया के एमएसएमई सेक्टर वल्र्ड क्लास उत्पाद बनाते हैं इसलिए भारतीय एमएसएमई सेक्टर कैसे अपने उत्पादों की मानसिकता को बदलते हुए क्वालिटी बढ़ा सकते हैं, यह देखना जरूरी है. 50 साल पहले जापान-कोरिया में हाई क्वालिटी उत्पाद नहीं थे लेकिन आज हैं. 30 साल पहले चाइना के उत्पादों का नाम नहीं था लेकिन आज हर सेक्टर में उनकी पहुंच है. देश के एमएसएमई सेक्टर के पास बेहतर अवसर है, सीआईआई, फिक्की और चैंबर जैसी संस्थाएं ब्रिज की तरह काम करते हुए अपनी भूमिका निभाएं.इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बहुत जरूरी है.नए-नए अवसर आ रहे हैं इसलिए कैसे उन अवसरों का हम उपयोग कर सकते हैं यह देखना है.
सात गुना बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यस्था
श्री नरेंद्रन ने कहा क डिजिटलाइजेशन का क्षेत्र काफी व्यापक है. अब हम कहीं से भी उत्पादन कर अपने सामानों की डिलीवरी कहीं भी कर सकते हैं. इसके लिए हमें वेयर हाउस की जरूरत नहीं, सप्लाई चेन तैयार है उसका इस्तेमाल करें.छोटी पहल कर बड़े सपने देंखे. भारतीय अर्थव्यवस्था आज चार ट्रिलियन डालर की है तीन दशक बाद यह सात गुणा तक बढ़ जाएगी इसलिए उद्यमी कैसे अपने राजस्व और टेक्नोलाजी को बढ़ा सकते हैं, इस पर विचार करें.आईआईटी खडग़पुर में कई बेहतर टेक्नोलाजी हैं. सरकार भी यहां टेक्नोलाजी के विस्तार पर 300 करोड़ रुपये तक निवेश कर रही है इसलिए उद्यमी वहां जाएं और देंखे कि उनके लिए किस तरह की टेक्नोलाजी हैं. इंडस्ट्री एकेडेमिया के तालमेल का यह बेहतर उदाहरण है.इसी तरह एनएमएल में भी उद्योगों के लिए कई काम की तकनीक है.
भविष्य की राह
टाटा स्टील एमडी ने कहा कि हमें समझना होगा कि भविष्य क्या है और नेतृत्वकर्ता को चाहिए कि नई चुनौतियों के लिए अपने सदस्यों को उसके लिए तैयार करें.टाटा स्टील ने जमशेदपुर से शुरूआत की और आज ओडिसा, लुधियाना सहित वैश्विक स्तर की कंपनी बन चुकी है.जमशेदपुर से बाहर निकलें और वैश्विक स्तर पर कई अवसर हैं, अपने सपने बड़े करें, टाटा स्टील हर संभव सहयोग के लिए तैयार है.
कार्यक्रम का संचालन चैम्बर के मानद महासचिव मानव केडिया ने किया. मुख्य अतिथि के स्वागत में संथाली नृत्य पेश किया गया. इसके बाद दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. इस मौके पर टाटा स्टील के कई पदाधिकारी, जुस्को के एमडी रितुराज सिन्हा, टाटा स्टील एमडी के पीईओ देवाशीष चौधरी, चैम्बर के सारे पदाधिकारी, एसिया के पदाधिकारी तथ एमएसएमई के प्रतिनिधि मौजूूद थे. चैम्बर के 75 सालों के सफर पर खास तौर पर तैयार किया गया एक वीडियो ‘दी प्लैटिनम पाथ’ पेश किया गया.
क्लाइमेट चेंज हमारे लिए अवसर
उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज में भारतीय कंपनियों के लिए कड़े नियम आने वाले हैं और वहां भी अवसर है. टाटा स्टील आइबीएमडी के माध्यम से नए-नए बाई प्रोडक्ट बनाकर 10 हजार करोड़ रुपये का टर्नओवर कर रही है.नई कंपनियां वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र में काम कर सकती हैं.री-साइक्लिंग की मांग बढ़ती जा रही है. टाटा स्टील ने भी इस दिशा में पहल शुरू कर दी है.वर्ष 2050 में री-साइक्लिंग का दायरा माइनिंग से बड़ा होगा. हम कैसे अर्बन माइनिंग व क्रिटिकल माइनिंग के क्षेत्र में काम कर सकते हैं इस पर विचार करें.इन सेक्टर को अवसर में बदलते हुए कैसे अपनी क्षमता बढ़ाएंगे इस दिशा में सभी सोंचे.अफ्रीका बहुत बड़ा देश है और वहां काफी अवसर है. कई भारतीय कंपनियां और परिवार फूड, टेक्नोलाजी और परिवहन के क्षेत्र में काम कर रही है.
चैम्बर ने अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है : सुंदर रामम
इससे पहले टाटा स्टील के वाइस प्रेसीडेंट डी बी सुंदर रामम ने कहा कि इन 75 सालों में चैम्बर ने अपनी प्रासंगकिता साबित की है. किसी संस्थान का 75 साल तक लगातार कार्यरत रहना बहुत बड़ी चीज है. चैम्बर के सदस्यों की संख्या भी बढ़ी है जिससे साबित होता है कि संस्था में लोगों का यकीन बढ़ा है. टाटा स्टील के साथ चैम्बर के रिश्ते हमेशा प्रगाढ़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि टाटा स्टील ने अपनी स्थापना के वक्त एशिया का पहला इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनाया था और मेड इन इंडिया का स्लोगन तो टाटा ग्रुप के संस्थापकों जेएन टाटा, दोराबजी टाटा ने सौ साल पहले ही चरितार्थ कर दिखा दिया था. उन्होंने कहा कि एमएसएमई सेक्टर ने जमशेदपुर में बहुत ग्रोथ किया है और आगे संभावना बनी हुई है. यहां का एमएसएमई सेक्टर एशिया में सबसे बड़ा हुआ करता था. टाटा स्टील और दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर पूूरा इकोसिस्टम आगे बढ़ा है.
‘नरेंद्र और नरेंद्रन’ को दैवीय शक्तियां मिली हुई हैं : मूनका
चैम्बर के अध्यक्ष विजय आनंद मूनका ने अपने संबोधन में संस्थान के अब तक के सफर पर संक्षिप्त प्रकाश डाला और कहा कि चैम्बर को टाटा स्टील का हमेशा सहयोग मिला है. मूनका ने कहा कि पूर्वी भारत में अवसरों की भरमार है और इसके केंद्र में जमशेदपुर है. सौ साल से टाटा स्टील निजी उद्योगों के लिए प्रकाश स्तंभ की मानिंद काम कर रहा है. जिस तरह देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आगे बढ़ रहा है, उसी तरह टाटा स्टील टी वी नरेंद्रन की अगुवाई कामयाबी की नई गाथाएं लिख रहा है. उन्होंने कहा कि लगता है कि नरेंद्र और नरेंद्रन को दैवीय शक्तियां प्राप्त हैं. उन्होंने कहा कि चैम्बर ने 75 साल का सफर पूरा किया है और अब हमारा फोकस आनेवाले 25 सालों के लिए है.
चैम्बर के दिवंगत अध्यक्षों को किया गया सम्मानित
समारोह में टी वी नरेंद्रन ने चैम्बर के 16 दिवंगत अध्यक्षों को सम्मानित किया. चैम्बर के संस्थापक अध्यक्ष रूस्तम जी पटेल के लिए उनके पड़पोते जिहान पटेल ने सम्मान ग्रहण किया. इसके अलावा चैम्बर के दूसरे अध्यत्र मीनूू आर पटेल के लिए भी जिहान ने ही सम्मान ग्रहण किया. तीसरे अध्यक्ष रामेश्वरलाल अग्रवाल के लिए अशोक सुल्तानियां ने, चौथे अध्यक्ष डी एन कमानी के लिए उनके बेटे किल्लोल कमानी ने, पांचवें अध्यक्ष श्यामजी भाई टॉक के लिए तुषार टॉक, छठे अध्यक्ष जॉन पी डिकोस्टा के लिए उनके पोते और रॉनी डिकोस्टा के बेटे रियान डिकोस्टा ने, सातवें अध्ययक्ष एस के सेन के लिए उनके बेटे एडवोकेट पी एस सेन ने, आठवें अध्यक्ष नगीन भाई पारीख के लिए उनके बेटे किशन जी पारीख, नौवें अध्यक्ष एल आर अग्रवाल के लिए अजय और अक्षय अग्रवाल ने, दसवें अध्यक्ष पी एन कमानी के लिए उनके बेटे राजन कमानी, ग्यारहवें अध्यक्ष पुरूषोत्तम दास झुनझुनवाला के लिए अजय और उमंग सुलतानिया, बारहवें अध्यक्ष एस एन मित्तल के लिए बेटे राजेश मित्तल, तेरहवें अध्यक्ष चिमनलाल भालोटिया के लिए विनीत और प्रशांत भालोटिया, चौदहवें अध्यक्ष चंदूलाल भालोटिया के लिए अजय भालोटिया, पंद्रहवें अध्यक्ष आर एन गुप्ता के लिए कमलेश और स्वीटी गुप्ता तथा 16वें अध्यक्ष अशोक भालोटिया के लिए बेटे अभिषेक भालोटिया ने सम्मान ग्रहण किया.

