
उदित वाणी, जमशेदपुर: श्रीनाथ विश्वविद्यालय तथा श्रीनाथ कॉलेज ऑफ एजुकेशन के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार का बुधवार को समापन हुआ. दूसरे दिन सेमिनार में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अतुल कोठारी उपस्थित थे.
उन्होंनेकहा कि शिक्षा नीति को लागू करना हमारा काम है साथ ही हमें बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए. प्रत्येक विश्वविद्यालय अगर समय सीमा को समझें, तो आधी परेशानी शिक्षा नीति को लागू करने की यही दूर हो जाएगी. हमें शिक्षा में व्यवहारिकता लाने की आवश्यकता है.
मौके पर जमशेदपुर विमेंस यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. डॉ.अंजीला गुप्ता ने राष्ट्रीय सेमिनार में अपना वक्तव्य देते हुए कहा कि एनईपी में लचीलापन है. इसमें विज्ञान का विद्यार्थी भी कला के विषयों का अध्ययन कर सकता है.
यह नीति हमें शिक्षा प्राप्त करने में स्वतंत्रता देती है. इस नीति से हमारे देश के विश्वविद्यालय विदेश के विश्वविद्यालयों के साथ जुड़ सकेंगे और हमारी शिक्षा व्यवस्था को यह उत्कृष्टता प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी. राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन डॉ. एनके अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि हम पर दुनिया की निगाहें लगी हुई है.
यहां हमें सोचना है कि हम पहले क्या थे अभी क्या है और आगे क्या हमें होना है. प्राचीन काल में जो शिक्षा की स्थिति थी भारत में वह काफी उन्नत थी जो विश्व में अन्यत्र नहीं दिखती थी.
वर्तमान में हमारे लिए यह सोचने का विषय है कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या देंग. प्रो डॉ. गोपाल पाठक (कुलपति सरला बिरला यूनिवर्सिटी) ने अपनी बातों को रखते हुए कहा कि 1968 की शिक्षा नीति को हम सही तरीके से लागू नहीं कर सके उसके बाद 1986 में शिक्षा नीति आई और उसी का संशोधित रूप 1992 में हमारे बीच आया.
कहा कि सभी लोग पहले शिक्षा नीति को पहले ठीक से पढ़ें, तभी इसका सफलतापूर्वक क्रियान्वयन हो पाएगा शिक्षा.
नई शिक्षा नीति का दूरगामी महत्व
राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन कोल्हान विश्वविद्यालय के एनएसएस कोऑर्डिनेटर की नोट स्पीकर के रूप में दारा सिंह ने अपनी बात को रखते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति का दूरगामी महत्व है.
नई शिक्षा नीति को यदि हम लागू कर लेते हैं तो कक्षा 6 के बाद भी कोई बच्चा अपनी आगे की राह चुन लेगा. आने वाले समय में आपके लिए डिजिटल ज्ञान रखना आवश्यक हो जाएगा.
आज कला के विद्यार्थियों को विज्ञान की बातों की जानकारी भी रखनी होगी. आज जब विश्व भर के विश्वविद्यालय हमारे यहां विश्वविद्यालय खोलेंगे तो तो हमारे भारत के विश्वविद्यालयों को भी अपडेट होने की आवश्यकता है. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा नीति में भी कुछ समस्या है लेकिन यदि शुरुआत से उस पर काम किया जाए तो इन कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है.
आज का समय गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का समय है. इसलिए हमें शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने पर जोर देने की आवश्यकता है.
पहली बार बीएससी, बीए, बीकॉम की परंपरा समाप्ति की कगार पर
श्रीनाथ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गोविंद महतो ने अपने स्वागत भाषण में सभी का अभिनंदन करते हुए कहा कि शिक्षा नीति-2020 में उच्च शिक्षा में पहली बार बीएससी बीए बीकॉम की परंपरा अपने समाप्ति के कगार पर है.
आज जो हो रहा है हमारे देश में वह पहले नहीं था. शिक्षा नीति भारत में एक क्रांति के रूप में आया है जो शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाएगी. आज निचले तबके तक शिक्षा की पहुंच बन गई हैं.


