
उदित वाणी, जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के शिक्षकों के वेतन निर्धारण में विसंगतियां हैं. यहां के सीनियर शिक्षकों को जूनियर शिक्षकों से कम वेतन मिलता है. इसे लेकर लंबे समय से शिक्षक मांग उठाते रहे हैं, लेकिन कोई लाभ अबतक नहीं मिल पाया है.
इससे शिक्षक अब आंदोलन हो उठे हैं. चेतावनी दी है कि 31 मार्च तक शिक्षकों के वेतन निर्धारण की विसंगति दूर नहीं की जाती है तो वे आंदोलन करेंगे. डीएसई ऑफिस के समक्ष विरोध-प्रसर्धन करेंगे। इस बाबत चेतावनी शनिवार को शिक्षकों की शिकायतों के निवारण के लिए आयोजित शिक्षक शिकायत निवारण सुनवाई दिवस के तहत आयोजित बैठक में जिला शिक्षा विभाग को दी गई.
बैठक जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालाय में हुई. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश पर आयोजित इस सुनवाई में झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा उठाए गए शिक्षकों की समस्याओं पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई.
संघ ने जिला शिक्षा अधीक्षक निशु कुमारी को बताया कि वर्ष 1994 में नियुक्त शिक्षकों के लिए एक संवर्ग के कनीय शिक्षक का वेतन वरीय से अधिक होने के आलोक में समतुल्य वेतन का निर्धारण करने के संबंध में 21 जनवरी को संघ के प्रतिनिधियों के साथ हुई वार्ता में जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा मार्च 2023 तक उक्त वेतन का निर्धारण कर देने का आश्वासन दिया था लेकिन एक वर्ष से ज्यादा बीत जाने के बावजूद आज तक वेतन का निर्धारण नहीं हो सका.
संघ ने डीएसई को पुनः स्मारित करते हुए कहा कि 31 मार्च तक उक्त वेतन का निर्धारण ना हो पाया तो बाध्य होकर अप्रैल में संघ को इस मुद्दे को लेकर धरना-प्रदर्शन करना होगा.
वहीं इस दौरान संघ ने जिला शिक्षा अधीक्षक के पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि इस जिले के लिए जारी अवकाश तालिका में सरहुल पर्व के लिए अवकाश 23 अप्रैल को निर्धारित था परंतु कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग झारखंड की अधिसूचना के आलोक में सरहुल पर्व के अवसर पर अब दिनांक 24 मार्च (शुक्रवार )को अवकाश घोषित किया गया है.
संघ ने कहा कि जिला शिक्षा अधीक्षक के पूर्व पत्र को आंशिक संशोधन करते हुए उक्त अवकाश को 24 मार्च 2023 को घोषित किया जाए. वहीं सुनवाई के दौरान शिक्षकों ने वर्ष 2006 में नियुक्त कुछ शिक्षकों का 12 वर्ष के बाद ग्रेड-1 से ग्रेड 2 में वेतन निर्धारण का मामला आज तक लंबित होने का मामला उठाया. कहा कि वैसे शिक्षकों का वेतन निर्धारण अविलंब कर दिया जाए.
बैठक में शिक्षकों ने मध्य विद्यालय खेरुआ, पटमदा एवं मध्य विद्यालय हुरलुंग, जमशेदपुर में छात्रों की संख्या अधिक हैं, लेकिन अब भी वहां दो ही शिक्षक पदस्थापित हैं.
मांग की गई कि छात्र संख्या की अधिकता को देखते हुए अविलंब ऐसे विद्यालय में शिक्षकों का प्रतिनियोजन किया जाए. वहीं शिक्षकों ने गजेंद्र नाथ मिश्रा (शिक्षक पटमदा) का मुद्दा उठाया. कहा कि मिश्रा अनिवार्य स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं. अब उनकी सेवा निवृत्ति उपरांत मिलने वाली सारे राशि का अविलंब भुगतान किया जाए.
सुनवाई में अरुण कुमार सिंह, राजेंद्र कर्ण, रमाकांत शुक्ला, ज्ञानरंजन, बबन ओझा, अनिल बिहारी, बबन सिंह, सुधीर चंद्र मुर्मू, चंद्र बदन सिंह, बृजेश कुमार, विनोद कुमार राणा, शत्रुघ्न सिंह आदि मुख्य रूप से शामिल थे.

