
उदित वाणी, जमशेदपुर: शिक्षा विभाग के नये फरमान से सरकारी स्कूल के हेडमास्टर और शिक्षक परेशान है. सारे शिक्षक पठन-पाठन का काम छोड़ रंग-पोताई करने वाले मिस्त्री को खोजने में लगे हैं.
विभाग ने सभी स्कूलों को दो दिनों के अंदर स्कूलों को नये कलेवर में रंगरोदन करने का आदेश जारी किया है. इसके तहत सारे स्कूलों को बाहरी दीवारों को हरे रंग से रंगाना है. इसके लिए विभाग ने बजाब्ते स्कूलों को कलर कोड दे रखा है, ताकि स्कूलों में समरूपता दिखे. इधर, दशहरा-दीपावली के चलते रंगाई पुताई करने वाले मजदूरों को खोज पाना मुश्किल हो रहा था.
अब छठ के बाद खुले स्कूलों पर दो दिन के अंदर स्कूलों को रंग रोदन करने का निर्देश है. ऐसे में शिक्षक पठन-पाठन का काम छोड़ रंगाई-पुताई करने वाले मिस्त्री की तलाश के साथ ही विभाग की ओर से निर्देशित रंगों की खोज रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो के निर्देश के आलोक में राज्य परियोजना निदेशक किरण कुमार पासी ने प्रदेश के सभी डीईओ और डीएसई को पत्र लिख सरकारी स्कूल के भवनों को नया स्वरूप देना का निर्देश दिया था. पहले स्कूलों का रंग गुलाबी होता था, जिसे अब हरा रंग में रंगना है.
रंगाई-पुताई करने वाले मिस्त्री की चांदी, बाजार से चौगुनी मजदूरी मांग रहे
स्कूल शिक्षकों ने बताया कि रंगाई-पुताई करने वाले मिस्त्री की चांदी हो गई है. जो काम पांच हजार में होता है, उसके लिए 15 से 20 हजार रूपए की मांग कर रहे हैं.
ऐसे में स्कूल के शिक्षकों को काम कराना मुश्किल हो रहा है क्योंकि इसके लिए विभाग की ओर से निश्चित राशि ही दी गई है. मजदूरी के साथ ही डिस्टेंबर, प्राइमर और विभिन्न तरह के खर्चे भी शामिल हैं.
गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाते हैं शिक्षक
गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने से स्कूलों में पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाती. शिक्षकों को निर्वाचन से लेकर विभिन्न कार्यों में लगाया जाता है. अब इस नये फरमान से शिक्षक परेशान है.

