उदित वाणी जमशेदपुर: जमशेदपुर (ग्रेजुएट कॉलेज समाचार): ग्रेजुएट कॉलेज के बी.एड डिपार्टमेंट (B.Ed Department) द्वारा आयोजित दो दिवसीय बहुविषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी (Multi-disciplinary National Seminar) का दिनांक 15 मई 2026 को गरिमामय समापन हो गया. शुक्रवार को इस भव्य सेमिनार की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और कुलगीत के गायन के साथ की गई. इस सेमिनार में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए हुए प्रतिभागी, प्रबुद्ध शिक्षक गण एवं भारी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं.
प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार ने बताए विकसित भारत के चार स्तंभ
सेमीनार के मुख्य अतिथि उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव राहुल कुमार पुरवार रहे. उन्होंने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत’ के चार प्रमुख स्तंभों की चर्चा की, जो कि युवा, महिलाएं, गरीब और किसान हैं. उन्होंने यूनिवर्सिटी के एनुअल कैलेंडर (Annual Calendar) और डिसिप्लिन (अनुशासन) को फॉलो करना अनिवार्य बताया. प्रधान सचिव ने जोर देते हुए कहा कि हमारी पेडगॉजी (Pedagogy/शिक्षण शास्त्र) ऐसी होनी चाहिए जो सीधे तौर पर समस्याओं का समाधान (Problem Solving) कर सके.
ज्ञान परंपरा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर वीसी डॉ. अजिला गुप्ता और प्रो. चंद्रभूषण शर्मा के विचार
सेमिनार की मुख्य संरक्षक और कोल्हान यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर (VC) प्रोफेसर डॉ. अजिला गुप्ता ने अपने वक्तव्य में ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने वेद, आयुर्वेद और उपनिषद की समृद्ध चर्चा करते हुए गर्व से कहा कि हमारी भारतीय ज्ञान परंपरा काफी समृद्ध है.
वहीं, मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित विनोबा भावे यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर चंद्रभूषण शर्मा ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education) पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि एक शिक्षक केवल वर्तमान को नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों को पढ़ाता है. भारतीय ज्ञान परंपरा अतीत की धरोहर ही नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की मार्गदर्शक भी है. उन्होंने ‘गुरु’ को सेंटर पावर (केंद्रीय शक्ति) बताया.
अनुसंधान और प्रोबलम सोल्वर बनना देश की जरूरत: कुल सचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण
कोल्हान विश्वविद्यालय के कुल सचिव (Registrar) डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने इस अवसर पर कहा कि विकसित भारत के दो मुख्य पैरामीटर रिसर्च और डेवलपमेंट (अनुसंधान और विकास) हैं. अगर हमें भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, तो हमें नई खोजों, अनुसंधानों की तरफ बढ़ना होगा और ‘प्रोबलम सॉल्वर’ बनना होगा.
प्राचार्या डॉ. वीणा सिंह प्रियदर्शी ने अतिथियों का किया स्वागत, मैकाले की शिक्षा नीति पर प्रहार
कॉलेज की प्राचार्या डॉ. वीणा सिंह प्रियदर्शी ने सभी आदरणीय अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह और पवित्र पौधा भेंट कर किया. अपने स्वागत भाषण में प्राचार्या डॉ. वीणा सिंह प्रियदर्शी ने कहा कि बाहरी आक्रमणकारियों ने हमारी परंपरागत शिक्षा पद्धति को भारी नुकसान पहुंचाया, खासकर लॉर्ड मैकाले ने हमारी समृद्ध शिक्षा पद्धति को अवरुद्ध किया. लेकिन अब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से हमारी वही गौरवशाली और पुरानी शिक्षा पद्धति फिर से पुनर्जीवित की जा रही है.
संगोष्ठी में विषय प्रवेश बी.एड डिपार्टमेंट की प्रीति सिंह द्वारा कराया गया. मंच का कुशल संचालन संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिन्हा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन बी.एड विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विश्वेश्वर यादव ने प्रस्तुत किया.
विभिन्न तकनीकी सत्रों (Technical Sessions) का विवरण:
प्रथम सत्र: चेयरपर्सन डॉ. परशुराम सियोल और रिपोर्टीयर डॉ. इरशाद खान थे.
द्वितीय सत्र: चेयरपर्सन डॉ. संजय भुइयां और रिपोर्टीयर डॉ. समीउल्लाह रहे.
तृतीय सत्र: चेयरपर्सन डॉ. मोहना सुशांत पंडित और रिपोर्टीयर डॉ. लक्ष्मण गोप थे.
चतुर्थ सत्र: चेयरपर्सन डॉ. संजीव आनंद और रिपोर्टीयर डॉ. शिव प्रकाश उपस्थित रहे.
16 मई: प्लेनरी सत्र और देशव्यापी ऑनलाइन भागीदारी
संगोष्ठी के अगले चरण यानी 16 मई को आयोजित प्लेनरी सत्र के मुख्य अतिथि राजेंद्र राजकीय विश्वविद्यालय (बोलांगीर, उड़ीसा) के कुलपति डॉ. विभूति भूषण मल्लिक थे. इस सत्र में बतौर रिसोर्स पर्सन डॉ. रंजीत प्रसाद, डॉ. एम ए हाशमी और डॉ. तनवीर युनुस उपस्थित रहे, जिन्हें कॉलेज की प्राचार्या डॉ. वीणा सिंह प्रियदर्शी द्वारा सम्मानित किया गया.
पांचवां सत्र: चेयरपर्सन डॉ. एस पी महालिक और रिपोर्टीयर डॉ. समीउल्लाह थे.
छठा सत्र: चेयरपर्सन डॉ. मोहम्मद मोईज अशरफ और रिपोर्टीयर डॉ. दारा सिंह गुप्ता रहे.
विशेष ऑनलाइन सत्र: सेमिनार के दौरान एक विशेष सत्र का आयोजन पूर्णतः ऑनलाइन माध्यम से किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों के शोधार्थियों और प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया.
राष्ट्रीय गान के साथ संगोष्ठी का भव्य समापन
समापन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. दारा सिंह गुप्ता रहे. अंत में आयोजन सचिव डॉ. विशेश्वर यादव द्वारा सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया गया. इसके पश्चात, गरिमामय वातावरण में राष्ट्रीय गीत एवं राष्ट्रीय गान के सामूहिक गायन के साथ इस दो दिवसीय सफल राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ.


