उदित वाणी, जमशेदपुर : देहरादून में जमशेदपुर के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा हत्याकांड के मुख्य आरोपी यशराज सिंह को देहरादून पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी पर उत्तराखंड पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था और वह वारदात के बाद से लगातार फरार चल रहा था.
पुलिस पूछताछ में यशराज ने सनसनीखेज खुलासे करते हुए स्वीकार किया है कि विक्रम शर्मा की हत्या की पूरी साजिश उसी ने अपने साथियों के साथ मिलकर रची थी. उसने बताया कि दिसंबर 2025 में नोएडा और दिल्ली में भी विक्रम शर्मा की हत्या की कोशिश की गई थी, लेकिन भीड़भाड़ अधिक होने के कारण योजना सफल नहीं हो सकी. इसके बाद देहरादून को सुरक्षित ठिकाना मानते हुए जिम के बाहर रेकी कर हत्या को अंजाम दिया गया.

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि शूटरों को रांची से दिल्ली भेजने के लिए फ्लाइट टिकट और अन्य खर्चों का भुगतान उसने पेटीएम के माध्यम से किया था. वारदात में इस्तेमाल स्कूटी, होटल में ठहरने और भागने की व्यवस्था का भुगतान भी यूपीआई से किया गया. पूरे ऑपरेशन में शामिल आरोपियों के रुकने, आने-जाने और छिपने की जिम्मेदारी यशराज ही संभाल रहा था.
हत्या के बाद आरोपी पश्चिम बंगाल के खड़गपुर स्थित अपनी बुआ के घर भाग गया था. पुलिस से बचने के लिए वह लगातार ठिकाने बदल रहा था. बताया जा रहा है कि वह अपने पिता के वकील से कानूनी सलाह लेने सहारनपुर पहुंचा था, जहां पहले से नजर रख रही पुलिस टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया.
पूछताछ में यशराज ने खुलासा किया कि उसने यह हत्या विशाल सिंह के कहने पर कराई थी. उसने बताया कि वर्ष 2024 से वह टाटानगर स्टेशन क्षेत्र में चिप्स, केक, बिस्कुट और नमकीन सप्लाई का काम करता था. इसी दौरान उसकी मुलाकात विशाल सिंह से हुई थी. बाद में विशाल के कहने पर उसने विक्रम शर्मा की हत्या की योजना बनाई.
यशराज के अनुसार, इस साजिश में आकाश प्रसाद, जीतेंद्र साहू, अंकित वर्मा और मोहित उर्फ अक्षय ठाकुर ने भी सहयोग किया. करीब एक महीने तक अंकित वर्मा और यशराज ने देहरादून में विक्रम शर्मा की गतिविधियों पर नजर रखी और उसकी रेकी की.
आरोपी ने बताया कि हत्या के दिन विशाल सिंह और आशुतोष स्कॉर्पियो वाहन से देहरादून पहुंचे थे. वहां पहले से मौजूद अंकित वर्मा से मुलाकात के बाद जीतेंद्र साहू की बाइक का इस्तेमाल कर शूटर वारदात को अंजाम देने पहुंचे.
पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया है कि रेलवे क्षेत्र और विभिन्न ठेकों में विक्रम शर्मा के हस्तक्षेप से आरोपी नाराज थे. उनका आरोप था कि विक्रम उनके काम में लगातार बाधा डाल रहा था. इसी रंजिश के चलते इस पूरे हत्याकांड की साजिश रची गई.


