
उदित वाणी, जमशेदपुर: 13 जुलाई 1995 को कोलकाता में जन्मीं जया शर्मा को बचपन से ही भक्ति के संस्कार मिले। महज 7 वर्ष की आयु में उन्होंने सत्संग में प्रस्तुति दी। उनकी भक्ति से प्रभावित होकर उनके गुरु पंडित गोविंदराम मिश्र ने उन्हें ‘किशोरी जी’ की उपाधि दी, जिसके बाद वे ‘जया किशोरी’ के नाम से विख्यात हुईं।
भक्ति, प्रेरणा और आधुनिक सोच का संगम
जया किशोरी की पहचान सिर्फ कथावाचिका ही नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायी वक्ता के रूप में भी है। ‘नानी बाई रो मायरो’ और श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से वे जीवन मूल्यों, रिश्तों और मानसिक संतुलन की सीख देती हैं।
वे ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और पर्यावरण संरक्षण जैसे सामाजिक विषयों पर भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
एक नजर में व्यक्तित्व
शिक्षा: वाणिज्य स्नातक
पहचान: कथावाचिका, भजन गायिका, मोटिवेशनल स्पीकर लोकप्रिय भजन: ‘अच्युतम केशवम’, ‘लिंगाष्टकम’, ‘गाड़ी में बिठा ले रे बाबा’
फ्लैशबैक: जब ‘लक्जरी पर्स’ और ‘भारी दक्षिणा’ को लेकर विवादों की सुर्खियों में रहीं जया किशोरी
आध्यात्मिक जगत की जानी-मानी शख्सियत जया किशोरी के लिए पिछला कुछ समय काफी गहमागहमी भरा रहा था। एक ओर जहां उनकी कथाओं में जुटने वाली भीड़ चर्चा का विषय रहती थी, वहीं दूसरी ओर उनके एक महंगे हैंडबैग और कथा के लिए ली जाने वाली राशि ने देशव्यापी बहस छेड़ दी थी।
विवाद की जड़: वह चर्चित ‘डिओर’ हैंडबैग
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब जया किशोरी को हवाई अड्डे पर एक बेहद महंगे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड ‘डिओर’ के बैग के साथ देखा गया था। जैसे ही उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, नेटिजन्स ने उन्हें आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया था।
आरोप: आलोचकों ने तब दावा किया था कि जो कथावाचिका मंच से सादगी और त्याग की बातें करती थीं, वे स्वयं लाखों रुपये के चमड़े के बैग का उपयोग कर रही थीं।
सफाई: विवाद बढ़ता देख जया किशोरी ने स्पष्ट किया था कि वह बैग पूरी तरह से कैनवस (कपड़े) से बना था और उसमें कहीं भी चमड़े का प्रयोग नहीं हुआ था। उन्होंने यह भी तर्क दिया था कि उन्होंने कभी खुद को ‘साध्वी’ नहीं कहा, बल्कि वे एक सामान्य गृहस्थ जीवन जीने वाली युवती हैं।
दक्षिणा पर छिड़ी थी रार
उसी दौरान उनकी कथा की ‘फीस’ को लेकर भी कई आंकड़े सामने आए थे। मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि जया किशोरी एक श्रीमद्भागवत कथा वाचन के लिए भारी-भरकम राशि लेती थीं।
कथित फीस: उस समय यह चर्चा जोरों पर थी कि वे एक कथा के लिए 9.5 लाख से 10 लाख रुपये तक चार्ज करती थीं।
भुगतान का तरीका: यह भी बताया गया था कि कथा की बुकिंग के समय ही करीब 5 लाख रुपये का अग्रिम भुगतान (एडवांस) लिया जाता था।
परोपकार का दावा: हालांकि, उनके संगठन ने तब स्पष्ट किया था कि इस कमाई का एक बड़ा हिस्सा ‘नारायण सेवा संस्थान’ को जाता था, जो दिव्यांगों की सेवा और सामूहिक विवाह जैसे कार्यों में उपयोग किया जाता था।
जनता की प्रतिक्रिया
उस समय सोशल मीडिया दो गुटों में बंट गया था। एक पक्ष ने इसे ‘अध्यात्म का व्यवसायीकरण’ करार दिया था, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे उनकी निजी पसंद और मेहनत की कमाई बताते हुए उनका बचाव किया था। जया किशोरी का उस समय दिया गया यह बयान चर्चा में रहा था-मैंने कभी नहीं कहा कि मैं सांसारिक सुखों का त्याग कर चुकी हूँ। मेरा काम कथा के माध्यम से लोगों को सही रास्ता दिखाना है, लेकिन मेरा जीवन एक सामान्य व्यक्ति की तरह ही है।

