
उदित वाणी,जमशेदपुर: कोल्हान विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गुणवत्ता और मौलिकता को बनाए रखने के लिए ‘शैक्षणिक सत्यनिष्ठा हेतु प्लेजरिज़्म डिटेक्शन’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के वीर पोटो हो सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों और शिक्षकों को ‘साहित्यिक चोरी’ (प्लेजरिज़्म) की पहचान करने वाले आधुनिक ड्रिलबिट सॉफ्टवेयर के उपयोग से अवगत कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसमें कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने अपने संदेश के माध्यम से अकादमिक लेखन में ईमानदारी और मौलिकता को अपरिहार्य बताया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रंजीत कर्ण ने स्वागत भाषण के दौरान शोध के क्षेत्र में प्लेजरिज़्म की गंभीरता और इसके कारण होने वाले अकादमिक नुकसान पर प्रकाश डाला। कार्यशाला के मुख्य वक्ता और ड्रिलबिट इंडिया के सीनियर रीजनल मैनेजर सौम्यजीत दत्ता चौधरी ने तकनीकी सत्र का संचालन करते हुए बताया कि किस प्रकार यह सॉफ्टवेयर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) और मशीन लर्निंग का उपयोग करके विभिन्न वैश्विक स्रोतों से सामग्री का मिलान करता है। उन्होंने जानकारी दी कि यूजीसी से मान्यता प्राप्त यह सॉफ्टवेयर न केवल प्रभावी है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों के लिए किफायती भी है।
प्रथम सत्र में प्लेजरिज़्म के विभिन्न पहलुओं और शैक्षणिक सत्यनिष्ठा पर विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न पीजी विभागों के शिक्षकों, शोधार्थियों और महाविद्यालय प्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम का कुशल संचालन मानवशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी मुंडा द्वारा किया गया, जबकि कार्यशाला के संयोजक डॉ. नितीश कुमार महतो ने सफल आयोजन के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। यह पहल विश्वविद्यालय में शोध की पारदर्शिता और नैतिकता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर मानी जा रही है।

