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	<title>PESA Act Jharkhand Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>PESA Act Jharkhand Archives - Udit Vani</title>
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		<title>दिल्ली रामलीला मैदान जनजातीय समागम का जमशेदपुर में विरोध, साकची बिरसा चौक पर प्रदर्शन</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/jamshedpur-tribal-protest-sakchi-birsa-chowk-delhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 23 May 2026 17:08:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi Ramlila Maidan Tribal Event]]></category>
		<category><![CDATA[Jamshedpur Tribal Protest]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर : दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में प्रस्तावित जनजातीय सांस्कृतिक समागम (Tribal Cultural Congregation) का जमशेदपुर में प्रबुद्ध समाज और संगठनों द्वारा विरोध शुरू हो गया है. शनिवार की शाम जमशेदपुर के व्यस्त इलाके साकची स्थित बिरसा चौक (Birsa Chowk Sakchi) पर विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से एकत्रित होकर [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर :</span></strong> दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में प्रस्तावित जनजातीय सांस्कृतिक समागम (Tribal Cultural Congregation) का जमशेदपुर में प्रबुद्ध समाज और संगठनों द्वारा विरोध शुरू हो गया है. शनिवार की शाम जमशेदपुर के व्यस्त इलाके साकची स्थित बिरसा चौक (Birsa Chowk Sakchi) पर विभिन्न आदिवासी सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से एकत्रित होकर एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">कोल्हान क्षेत्र के सामाजिक संगठन और बुद्धिजीवी हुए शामिल</span></strong><br />
इस विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम में कोल्हान क्षेत्र (Kolhan Region) के कई प्रमुख सामाजिक संगठनों, छात्र-युवाओं, बुद्धिजीवियों, कलाकारों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. प्रदर्शन के दौरान आदिवासी समाज के अधिकारों, उनकी विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक अस्तित्व से जुड़े गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">सरना धर्म कोड और पेसा कानून को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना</span></strong><br />
प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासी समाज की वास्तविक समस्याओं और बुनियादी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है. केवल सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से उनकी पहचान को सीमित करने का प्रयास हो रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी समुदाय वर्षों से सरना धर्म कोड (Sarna Dharma Code), जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, पेसा कानून (PESA Act), वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, विस्थापन की समस्या, स्थानीय भाषाओं के संरक्षण तथा शिक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर लगातार संघर्ष कर रहा है, लेकिन इन जरूरी सवालों पर सरकार द्वारा अपेक्षित पहल नहीं की जा रही है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">केवल पारंपरिक नृत्य तक सीमित नहीं है आदिवासी संस्कृति</span></strong><br />
विरोध सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी संस्कृति केवल पारंपरिक नृत्य, गीत-संगीत और वेशभूषा तक सीमित नहीं है. यह पूरी तरह से प्रकृति आधारित जीवन-दर्शन, सामुदायिक व्यवस्था, पारंपरिक स्वशासन प्रणाली और विशिष्ट धार्मिक मान्यताओं से गहराई से जुड़ी हुई है. ऐसे में केवल सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से आदिवासी पहचान को प्रस्तुत करना उनकी व्यापक सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक मांगों की अनदेखी करना है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">आदिवासियों के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने की मांग</span></strong><br />
प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार (Central Government) से पुरजोर मांग की कि यदि आदिवासी समाज के सम्मान और संरक्षण को लेकर वाकई गंभीरता दिखाई जानी है, तो सरना धर्म कोड को जल्द मान्यता दी जाए. इसके साथ ही पेसा और वनाधिकार कानून को प्रभावी रूप से लागू करने, विस्थापन की समस्याओं के स्थाई समाधान तथा स्थानीय भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण के लिए धरातल पर ठोस कदम उठाए जाएं.</p>
<p>यह पूरा कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न हुआ. अंत में आयोजकों ने स्पष्ट किया कि आदिवासी अधिकारों और संवैधानिक पहचान से जुड़े इन मुद्दों पर आने वाले दिनों में जनजागरण अभियान और व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा. इस महत्वपूर्ण प्रदर्शन में मुख्य रूप से दीपक रंजीत, सुनील हेब्रम, दिनकर कच्छप, उपेंद्र बांद्रा आदि प्रमुखता से शामिल थे.</p>
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		<title>JHARKHAND: चाईबासा में कोल्हान प्रमंडल स्तरीय मुखिया सम्मेलन संपन्न, मंत्री ने दी विकास की नई सौगात</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/deepika-pandey-singh-mukhia-sammelan-chaibasa-kolhan-news/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 11:47:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, चाईबासा: कोल्हान विश्वविद्यालय सभागार में कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम व सरायकेला खरसावां के मुखियाओं के लिए सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह भी शामिल हुई। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, सिंहभूम सांसद जोबा माझी, निदेशक राजेश्वरी बी, उपायुक्त चंदन कुमार और [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी, चाईबासा: </strong></span>कोल्हान विश्वविद्यालय सभागार में कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम व सरायकेला खरसावां के मुखियाओं के लिए सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह भी शामिल हुई। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, सिंहभूम सांसद जोबा माझी, निदेशक राजेश्वरी बी, उपायुक्त चंदन कुमार और उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस मौके पर जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकू, जिला परिषद की अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन व उपाध्यक्ष रंजीत यादव मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान तीनों जिलों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले मुखिया को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम के दौरान सांसद और विधायक ने मुखिया के अलावा अन्य पंचायत प्रतिनिधियों को उनके अधिकार और विकास कार्य में भागीदारी के साथ जिले में पेयजल की समस्या को मंत्री के सामने रखा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राज्य की 70 फ़ीसदी आबादी गांव में रहती है। हेमंत सरकार इसे सशक्त बनाने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में आज का यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है, ताकि मुखिया एक दूसरे से जानकारी साझा करके सीख सकें और बेहतर तरीके से कार्य करें। उन्होंने कहा कि कोल्हान की स्वशासन व्यवस्था से पूरे राज्य को सीखने की जरूरत है। पेसा कानून पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि गठबंधन सरकार में इसे बहुत समझने के बाद लागू किया है।</p>
<p>देश के अन्य राज्यों में जो कानून लागू है उसमें हमारा पैसा कानून सबसे बेहतर है। यह कानून ग्राम सभा को पूर्ण अधिकार प्रदान करेगा और मजबूती देगा। उन्होंने मुखियाओं से अपील किया कि पेसा कानून को लेकर किसी के बहकावे में नहीं आए। मंत्री ने कहा कि पंचायत समिति को भी पांचवें और 15 में वित्त आयोग की राशि का 15 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा, ताकि वे विकास कार्य करा सकें। जिला परिषद की भी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि वार्ड सदस्य को कैसे सशक्त बनाना है, इसके बारे में भी सरकार विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि कुछ राशि भेजी जा चुकी है और अगले 10-15 दिनों में पूरी राशि बैंक खातों में पहुंच जाएगी। प्रत्येक पंचायत को 12 लाख से लेकर 60 लाख रुपए तक मिलेगा। पेयजल की समस्या पर उन्होंने कहा कि यह सरकार की भी प्राथमिकता में है, इसलिए सभी को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि प्रधान के लोगों की मांग थी कि आबुआ आवास योजना का छत टिन शेड, एस्बेस्टस या फिर मिट्टी के खपरैल से बनाने की अनुमति दी जाए। परंपरागत रूप से लोगों को ऐसे आवास में रहना पसंद है। हेमंत सरकार ने इस पर विचार करते हुए लाभुक को विकल्प चुनने का मौका देने का निर्णय लिया है। यानी लाभुक अपनी पसंद से आवास का निर्माण कर सकता है।</p>
<p>कार्यक्रम के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि एक राजनीति के तहत पिछले कई सालों से केंद्र सरकार ने मनरेगा को बंद करने की तैयारी शुरू कर दी थी। बिना किसी कारण के इसे बंद करके नई योजना को लागू कर दिया गया। इससे झारखंड में एक विशेष परिस्थिति पैदा हो गई है। केंद्र सरकार से सहयोग नहीं मिल रहा है। राज्य का जो बकाया है उसे नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र के दौरान हमारी सरकार ने प्रस्ताव पारित करके भेजा था कि मनरेगा को जारी रखा जाए। मनरेगा कर्मियों की जो मांग है उसे भी मंत्रालय को भेजा गया था। लेकिन केंद्र सरकार की ओर से तकनीकी त्रुटियां बताते हुए मनरेगा को बंद करने का काम किया गया और मांग के अनुसार पैसा भी नहीं दिया गया। हमारी मांग थी कि कम से कम जून महीने तक मनरेगा को चालू रखा जाए ताकि योजनाओं को पूर्ण किया जा सके और लंबित भुगतान पूरा हो सके। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।<br />
पंचायती राज अधिनियम 2001 की समीक्षा के लिए राज्य स्तरीय समिति में जनजातीय समुदाय के किसी भी व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया। इस सवाल के जवाब पर मंत्री ने कहा कि इसमें जनजातीय समाज के लोग भी हैं और विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है।</p>
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		<title>JAMSHEDPUR: पेसा कानून से मजबूत होगी भूमिज समाज की स्वशासन व्यवस्था, रंकिणी मंदिर में हुई अहम बैठक, जानिए क्या बोले विधायक संजीव सरदार</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/bhumij-samaj-meeting-rankini-mandir-pesa-act-sanjeev-sardar/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 11:33:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
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		<category><![CDATA[Potka News.]]></category>
		<category><![CDATA[Rankini Mandir Jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[Sanjeev Sardar Potka MLA]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर :  जमशेदपुर के हाता-जादूगोड़ा मुख्य मार्ग स्थित रंकिणी मंदिर परिसर के धुमकुड़िया भवन में शुक्रवार को भूमिज समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सशक्त बनाना और पेसा (PESA) कानून के तहत ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर :  </strong></span>जमशेदपुर के हाता-जादूगोड़ा मुख्य मार्ग स्थित <b data-path-to-node="7" data-index-in-node="45">रंकिणी मंदिर</b> परिसर के धुमकुड़िया भवन में शुक्रवार को भूमिज समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को सशक्त बनाना और <b data-path-to-node="7" data-index-in-node="213">पेसा (PESA) कानून</b> के तहत ग्रामीणों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में सिंहभूम, मानभूम, बराहभूम और धालभूम क्षेत्रों से आए हातु सरदार, मुड़ा, नाया और डाकुआ ने हिस्सा लिया।</p>
<h2 data-path-to-node="8"><span style="color: #800080;"><b data-path-to-node="8" data-index-in-node="0">विधायक संजीव सरदार के प्रयास से मिली पारंपरिक व्यवस्था को मान्यता</b></span></h2>
<p data-path-to-node="9">पोटका के विधायक <b data-path-to-node="9" data-index-in-node="16">संजीव सरदार</b> इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। बैठक में वक्ताओं ने जानकारी दी कि पूर्व में सरकारी अधिसूचना में भूमिज स्वशासन व्यवस्था को उचित स्थान नहीं मिला था। हालांकि, विधायक संजीव सरदार के निरंतर प्रयासों के बाद अब हातु सरदार,<b data-path-to-node="9" data-index-in-node="233"> मुड़ा, नाया और डाकुआ</b> की पारंपरिक व्यवस्था को अधिसूचित कर आधिकारिक मान्यता दे दी गई है। इससे अब गांव के संचालन और निर्णय प्रक्रिया में इनकी भूमिका अत्यंत प्रभावी हो जाएगी।</p>
<h2 data-path-to-node="10"><span style="color: #800080;"><b data-path-to-node="10" data-index-in-node="0">पेसा नियमावली: जल, जंगल और जमीन पर ग्रामसभा का अधिकार</b></span></h2>
<p data-path-to-node="11">बैठक को संबोधित करते हुए विधायक संजीव सरदार ने कहा कि राज्य गठन के <b data-path-to-node="11" data-index-in-node="67">25 वर्षों बाद</b> पेसा नियमावली को मंजूरी मिलना आदिवासी समाज के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:</p>
<p data-path-to-node="12,0,0"><b data-path-to-node="12,0,0" data-index-in-node="0">ग्रामसभा की सर्वोच्चता:</b> अब गांव के विकास या भूमि अधिग्रहण के लिए ग्रामसभा की अनुमति अनिवार्य होगी।</p>
<p data-path-to-node="12,1,0"><b data-path-to-node="12,1,0" data-index-in-node="0">संसाधन प्रबंधन:</b> ग्रामीण अब जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों का प्रबंधन स्वयं कर सकेंगे।</p>
<p data-path-to-node="12,2,0"><b data-path-to-node="12,2,0" data-index-in-node="0">विवादों का समाधान:</b> स्थानीय स्तर के विवादों को अब पारंपरिक न्यायिक व्यवस्था के माध्यम से सुलझाया जा सकेगा।</p>
<h2 data-path-to-node="13"><span style="color: #800080;"><b data-path-to-node="13" data-index-in-node="0">सामाजिक एकजुटता और सशक्तिकरण पर जोर</b></span></h2>
<p data-path-to-node="14">विधायक ने सभी हातु सरदार और मुड़ा समाज के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपनी नई संवैधानिक शक्तियों का उपयोग गांव के विकास और समाज की मजबूती के लिए करें। बैठक में अभिषेक सरदार, कालीपद सरदार, सिदेश्वर सरदार सहित भूमिज समाज के सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिन्होंने समाज की सांस्कृतिक पहचान को बचाए रखने का संकल्प लिया।</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/bhumij-samaj-meeting-rankini-mandir-pesa-act-sanjeev-sardar/">JAMSHEDPUR: पेसा कानून से मजबूत होगी भूमिज समाज की स्वशासन व्यवस्था, रंकिणी मंदिर में हुई अहम बैठक, जानिए क्या बोले विधायक संजीव सरदार</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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