जमशेदपुर : सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली ओपी क्षेत्र में एक आदिवासी युवती द्वारा पुलिस पूछताछ के दौरान दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप लगाए जाने के बाद मामला तूल पकड़ने लगा है। अखिल झारखंड अनुसूचित जनजाति महासभा ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कपाली ओपी क्षेत्र के कांदरबेड़ा पुनर्वास कॉलोनी निवासी स्वर्गीय भजोहरि माहली की पुत्री अल्पना माहली को उनकी एक सहेली के लापता होने के मामले में पूछताछ के लिए 15 जून 2026 को कपाली पुलिस द्वारा बुलाया गया था। आरोप है कि पूछताछ के दौरान उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया तथा शारीरिक प्रताड़ना भी दी गई।
मामले को लेकर अखिल झारखंड अनुसूचित जनजाति महासभा के पूर्वी सिंहभूम जिलाध्यक्ष मंगल टुडू ने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक व्यक्ति विशेष का मामला नहीं, बल्कि मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस की भूमिका नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होती है और पूछताछ के दौरान कानून एवं मानवाधिकारों के मानकों का पालन अनिवार्य है।
मंगल टुडू ने कहा कि विशेष रूप से महिलाओं और आदिवासी समुदाय से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरतना आवश्यक है। ऐसे आरोप समाज में असुरक्षा और अविश्वास की भावना को जन्म दे सकते हैं। इसलिए पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कर सत्य को सामने लाना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
महासभा ने सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक से मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही शिकायतकर्ता का स्वतंत्र चिकित्सकीय परीक्षण, सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने का आग्रह किया गया है।
संगठन ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार से भी मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने की मांग की है। महासभा का कहना है कि यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो वास्तविक तथ्यों को भी सार्वजनिक किया जाए, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
महासभा ने अपनी मांगों में मामले की निष्पक्ष जांच, चिकित्सकीय परीक्षण, सभी साक्ष्यों की जांच, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा, दोषियों पर कार्रवाई तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग शामिल की है।
इस संबंध में पुलिस प्रशासन का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


