उदित वाणी, जमशेदपुर : एनएमएल जमशेदपुर में चल रहा तीन दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार “बिहाइंड द टीचर्स डेस्क (बीटीटीडी-2026) शुक्रवार को जमशेदपुर के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों में आयोजित औद्योगिक भ्रमण के साथ समाप्त हो गया. इस भ्रमण ने प्रतिभागियों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण का प्रत्यक्ष अनुभव कराया और सेमिनार के उद्देश्य ‘कक्षा की शिक्षा और औद्योगिक प्रैक्टिस के बीच सेतु बनाने’ को साकार किया. भारत के स्टील सिटी के नाम से प्रसिद्ध जमशेदपुर में आयोजित यह औद्योगिक दौरा बीटीटीडी 2026 का समापन कार्यक्रम था. इसमें प्रतिभागियों ने बड़े पैमाने पर चल रही औद्योगिक इकाइयों के संचालन को करीब से देखा और वैज्ञानिक सिद्धांतों, इंजीनियरिंग अवधारणाओं तथा आधुनिक औद्योगिक प्रौद्योगिकियों के व्यावहारिक रूप को समझा.
160 से अधिक प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
इस भ्रमण में संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, छात्रों और उद्योग विशेषज्ञों सहित 160 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. उन्होंने टिनप्लेट, टाटा स्टील, सीएसआईआर–नेशनल मेटलर्जिकल लेबोरेटरी और टीएसजी गम्हरिया जैसे प्रतिष्ठित औद्योगिक स्थलों का दौरा किया.
प्रतिभागियों को विनिर्माण प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणालियों, प्रक्रिया स्वचालन, अनुसंधान सुविधाओं, कार्यस्थल सुरक्षा और औद्योगिक प्रबंधन की व्यवहारिक जानकारी मिली.कार्यक्रम का नेतृत्व टाटा स्टील के प्रिंसिपल साइंटिस्ट एवं बीटीटीडी 2026 के चेयरमैन डॉ. चिरदीप घोष, एनएमएल के प्रिंसिपल साइंटिस्ट एवं कन्वीनर ललित कुमार मीणा तथा टाटा स्टील के सीनियर रिसर्चर डॉ. आदित्य प्रकाश ने किया. उनकी कुशल योजनाबद्धता से पूरा कार्यक्रम सुचारू रूप से सम्पन्न हुआ.
सराहना और प्रतिक्रिया
टाटा स्टील के सीटीओ एवं आईआईएम जमशेदपुर चैप्टर के चेयरमैन डॉ. अतनु रंजन पाल तथा एनएमएल के चीफ साइंटिस्ट डॉ. गोपी किशोर मंडल ने आयोजन टीम की सराहना की और अनुभव-आधारित शिक्षा के लिए किए गए प्रयासों को सराहा.औद्योगिक भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने उत्पादन प्रणालियों, तकनीकी नवाचारों, परिचालन दक्षता, गुणवत्ता नियंत्रण, स्थिरता प्रथाओं और आधुनिक उद्योगों की चुनौतियों को गहराई से समझा. एनएमएल में भ्रमण के बाद नेटवर्किंग लंच का आयोजन किया गया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने एक-दूसरे और विशेषज्ञों से विचारों का आदान-प्रदान किया. कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों से फीडबैक सत्र लिया गया, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव साझा किए. प्राप्त फीडबैक का उपयोग भविष्य के बीटीटीडी कार्यक्रमों को और बेहतर बनाने में किया जाएगा.


