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	<title>Pollution Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
	<lastBuildDate>Sat, 04 Apr 2026 10:19:23 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Pollution Archives - Udit Vani</title>
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		<title>Adityapur: खतरनाक तरीके से जलाया जा रहा है जहरीला इंडस्ट्रियल कचड़ा, उद्यमियों, कामगारों व आशियाना आदित्य के निवासियों को भी झेलनी पड़ रही है परेशानी</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/vidyut-nagar-bastia-adityapur-industrial-waste-burning/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 10:17:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[आदित्यपुर]]></category>
		<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Adityapur news]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी,आदित्यपुर:  विद्युत नगर बस्ती, आदित्यपुर के पास रेलवे लाईन के किनारे खतरनाक तरीके से औद्योगिक कचड़ा चलाया जा रहा है, जिसके कारण निकल रहे जहरीले धुएं के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है. और इसकी वजह से स्थानीय उद्यमियों, कामगारों और आम लोगों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है. वहीं, निकल रहे [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी,आदित्यपुर:  </strong></span>विद्युत नगर बस्ती, आदित्यपुर के पास रेलवे लाईन के किनारे खतरनाक तरीके से औद्योगिक कचड़ा चलाया जा रहा है, जिसके कारण निकल रहे जहरीले धुएं के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है. और इसकी वजह से स्थानीय उद्यमियों, कामगारों और आम लोगों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है.</p>
<p>वहीं, निकल रहे जहरीले धुएं की वजह से पास में स्थित आशियाना आदित्य के निवासियों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है. हालाँकि सबसे ज्यादा परेशान विद्युत नगर बस्ती के लोग हैें, जहाँ मजदूर श्रेणी के लोग निवास करते हैं. क्योंकि औद्योगिक कचड़़े को जलाए जाने की वजह से निकल रहा जहरीला धुआँ आशियाना आदित्य के चारों ओर फैल रहा है तथा इसका बुरा प्रभाव वहाँ रहने निवासियों के उपर भी पड़ रहा है.</p>
<div style="width: 320px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-109165-1" width="320" height="564" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://uditvani.in/wp-content/uploads/2026/04/UjATf7VF6MnERrXm.mp4?_=1" /><a href="https://uditvani.in/wp-content/uploads/2026/04/UjATf7VF6MnERrXm.mp4">https://uditvani.in/wp-content/uploads/2026/04/UjATf7VF6MnERrXm.mp4</a></video></div>
<p>जानकारी के अनुसार, उक्त स्थान पर विगत कुछ समय से लगातार जहरीला औद्योगिक कचड़ा जलाया जा रहा है. स्थानीय बस्तीवासियों द्वारा किए गए विरोध के बाद कुछ दिनों तक वहाँ जहरीला औद्योगिक कचड़ा को डंप करने और जलाने का कार्य बन्द था. वहीं, नगर निगम की टीम के द्वारा भी उक्त स्थान का अवलोकन किया गया था. परन्तु अब पुनः वहाँ जहराला औद्योगिक कचड़ा डंप करने और उसे जलाने का काम शुरु हो गया है.</p>
<p>उक्त स्थान पर जहरीला कचड़ा कौन डंप कर रहा है, इस बात से स्थानीय लोग अनजान हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, उक्त स्थान पर प्रातः समय चुपचाप औद्योगिक कचड़ा को डंप करने तथा उसे जलाने का काम किया जा रहा है तथा डंप किया गया लगातार जलता रहता है. परन्तु नगर निगम प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण पर्षद चुप्पी साधे हुए हैं.</p>
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		<title>Adityapur : खतरनाक तरीके से जलाया जा रहा है जहरीला इंडस्ट्रियल कचड़ा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/adityapur/adityapur-industrial-waste-burning-toxic-smoke/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 16:32:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[आदित्यपुर]]></category>
		<category><![CDATA[Adityapur]]></category>
		<category><![CDATA[Industries]]></category>
		<category><![CDATA[plastic waste]]></category>
		<category><![CDATA[Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, आदित्यपुर : विद्युत नगर बस्ती, आदित्यपुर के पास रेलवे लाईन के किनारे खतरनाक तरीके से औद्योगिक कचड़ा चलाया जा रहा है, जिसके कारण निकल रहे जहरीले धुएं के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है. और इसकी वजह से स्थानीय उद्यमियों, कामगारों और आम लोगों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है. वहीं, [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, आदित्यपुर :</span> </strong>विद्युत नगर बस्ती, आदित्यपुर के पास रेलवे लाईन के किनारे खतरनाक तरीके से औद्योगिक कचड़ा चलाया जा रहा है, जिसके कारण निकल रहे जहरीले धुएं के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है. और इसकी वजह से स्थानीय उद्यमियों, कामगारों और आम लोगों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है.</p>
<p>वहीं, निकल रहे जहरीले धुएं की वजह से पास में स्थित आशियाना आदित्य के निवासियों को भी काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है. हालाँकि सबसे ज्यादा परेशान विद्युत नगर बस्ती के लोग हैें, जहाँ मजदूर श्रेणी के लोग निवास करते हैं. क्योंकि औद्योगिक कचड़़े को जलाए जाने की वजह से निकल रहा जहरीला धुआँ आशियाना आदित्य के चारों ओर फैल रहा है तथा इसका बुरा प्रभाव वहाँ रहने निवासियों के उपर भी पड़ रहा है.</p>
<p>जानकारी के अनुसार, उक्त स्थान पर विगत कुछ समय से लगातार जहरीला औद्योगिक कचड़ा जलाया जा रहा है. स्थानीय बस्तीवासियों द्वारा किए गए विरोध के बाद कुछ दिनों तक वहाँ जहरीला औद्योगिक कचड़ा को डंप करने और जलाने का कार्य बन्द था. वहीं, नगर निगम की टीम के द्वारा भी उक्त स्थान का अवलोकन किया गया था. परन्तु अब पुनः वहाँ जहराला औद्योगिक कचड़ा डंप करने और उसे जलाने का काम शुरु हो गया है.</p>
<p>उक्त स्थान पर जहरीला कचड़ा कौन डंप कर रहा है, इस बात से स्थानीय लोग अनजान हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, उक्त स्थान पर प्रातः समय चुपचाप औद्योगिक कचड़ा को डंप करने तथा उसे जलाने का काम किया जा रहा है तथा डंप किया गया लगातार जलता रहता है. परन्तु नगर निगम प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण पर्षद चुप्पी साधे हुए हैं.</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/adityapur/adityapur-industrial-waste-burning-toxic-smoke/">Adityapur : खतरनाक तरीके से जलाया जा रहा है जहरीला इंडस्ट्रियल कचड़ा</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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		<item>
		<title>JAMSHEDPUR: सुवर्णरेखा नदी में हजारों मछलियों की मौत, भुइंयाडीह में नदी किनारे मिला बड़ा जखीरा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/subarnarekha-river-fish-death-jamshedpur-pollution-alert/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 06:11:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर: सुवर्णरेखा नदी में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत का मामला सामने आया है. भुइंयाडीह लाल भट्ट नदी किनारे स्थित स्लम बस्ती के पास करीब 4 क्विंटल से अधिक मछलियां मृत अवस्था में पाई गई हैं, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है. सुबह जब स्थानीय लोग नदी किनारे पहुंचे, तो उन्होंने [...]</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/subarnarekha-river-fish-death-jamshedpur-pollution-alert/">JAMSHEDPUR: सुवर्णरेखा नदी में हजारों मछलियों की मौत, भुइंयाडीह में नदी किनारे मिला बड़ा जखीरा</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी, जमशेदपुर:</strong> </span>सुवर्णरेखा नदी में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत का मामला सामने आया है. भुइंयाडीह लाल भट्ट नदी किनारे स्थित स्लम बस्ती के पास करीब 4 क्विंटल से अधिक मछलियां मृत अवस्था में पाई गई हैं, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया है.</p>
<p>सुबह जब स्थानीय लोग नदी किनारे पहुंचे, तो उन्होंने बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियों को किनारे पर जमा देखा. इन मछलियों का वजन करीब 250 ग्राम से लेकर डेढ़ किलोग्राम तक बताया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मृत मछलियों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है.</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>प्रदूषण पर उठे सवाल</strong></span></p>
<p>जानकारी के अनुसार, सुवर्णरेखा नदी का पानी पहले से ही प्रदूषित माना जाता है. चांडिल डैम से छोड़ा गया पानी करीब 30 किलोमीटर बहने के बाद खरकई नदी से मिलता है. इस दौरान आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाला प्रदूषित पानी भी इसमें मिल जाता है, जिससे नदी में प्रदूषण का स्तर और बढ़ जाता है. इसे मछलियों की मौत की संभावित वजह माना जा रहा है.</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>स्वास्थ्य को लेकर चेतावनी</strong></span><br />
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मछलियों की मौत पानी में ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई है, तो इनके सेवन से ज्यादा नुकसान नहीं होगा. लेकिन यदि यह घटना किसी रासायनिक प्रदूषण या जहरीले तत्वों के कारण हुई है, तो ऐसी मछलियों का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल है और प्रशासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की जा रही है.</p>
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		<item>
		<title>Adityapur Industrial Area: आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण का संकट, कचरा जलाने से फैला जहरीला धुआं, देखे विडियो</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/pollution-crisis-in-adityapur-industrial-area/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 11:57:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Adityapur Industrial Area]]></category>
		<category><![CDATA[Crisis]]></category>
		<category><![CDATA[Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी,आदित्यपुर:  सरायकेला-खरसावां: जिले के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में इन दिनों प्रदूषण की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। ओमीनी ऑटो यूनिट-3 के समीप जियाडा की जमीन पर बने डंप यार्ड में नगर निगम द्वारा कचरा जलाए जाने से पूरे इलाके में घना और जहरीला धुआं फैल रहा है। फैक्ट्रियों तक पहुंच रहा धुआं [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी,आदित्यपुर:</strong></span>  सरायकेला-खरसावां: जिले के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में इन दिनों प्रदूषण की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। ओमीनी ऑटो यूनिट-3 के समीप जियाडा की जमीन पर बने डंप यार्ड में नगर निगम द्वारा कचरा जलाए जाने से पूरे इलाके में घना और जहरीला धुआं फैल रहा है।</p>
<div style="width: 788px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-107577-2" width="788" height="446" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Video-2026-03-26-at-4.56.01-PM.mp4?_=2" /><a href="https://uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Video-2026-03-26-at-4.56.01-PM.mp4">https://uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Video-2026-03-26-at-4.56.01-PM.mp4</a></video></div>
<p><span style="color: #800080;"><strong>फैक्ट्रियों तक पहुंच रहा धुआं</strong></span><br />
डंप यार्ड से उठने वाला धुआं आसपास स्थित औद्योगिक इकाइयों तक पहुंच रहा है। कई कंपनियों के परिसर के भीतर तक धुआं भर जाने से कर्मचारियों और मजदूरों को काम करने में कठिनाई हो रही है।</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>कर्मचारियों की सेहत पर असर</strong></span><br />
कर्मचारियों का कहना है कि धुएं के कारण उन्हें सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लगातार खराब हो रहे वातावरण के कारण कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।</p>
<p><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-107586" src="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-26-at-4.55.59-PM.jpeg?resize=300%2C169&#038;ssl=1" alt="" width="300" height="169" srcset="https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-26-at-4.55.59-PM.jpeg?resize=300%2C169&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-26-at-4.55.59-PM.jpeg?resize=1024%2C576&amp;ssl=1 1024w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-26-at-4.55.59-PM.jpeg?resize=768%2C432&amp;ssl=1 768w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-26-at-4.55.59-PM.jpeg?resize=1536%2C864&amp;ssl=1 1536w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-26-at-4.55.59-PM.jpeg?resize=150%2C84&amp;ssl=1 150w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-26-at-4.55.59-PM.jpeg?resize=450%2C253&amp;ssl=1 450w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-26-at-4.55.59-PM.jpeg?resize=1200%2C675&amp;ssl=1 1200w, https://i0.wp.com/uditvani.in/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-26-at-4.55.59-PM.jpeg?w=1600&amp;ssl=1 1600w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं</strong></span><br />
मामले को लेकर कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने नगर निगम और संबंधित विभागों में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर कचरा जलाया जा रहा है, वहां इस तरह की गतिविधियां प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर कचरा जलाया जा रहा है, जिससे प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। लगातार बढ़ते प्रदूषण और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि आसपास रहने वाले लोगों का भी जीवन प्रभावित हो रहा है।</p>
<p><span style="color: #800080;"><strong>अब आगे क्या</strong></span><br />
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर कब तक प्रभावी कदम उठाते हैं और लोगों को इस प्रदूषण से राहत मिल पाती है या नहीं।</p>
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		<item>
		<title>Delhi : NCR में जहरीली हवा ने बढ़ाई मुसीबत, अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या में इजाफा</title>
		<link>https://uditvani.in/new-delhi/delhi-ncr-air-pollution-crisis-ghaziabad-loni-aqi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 21 Nov 2025 07:09:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नोएडा : दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक बार फिर से गंभीर स्थिति में पहुंच गया है. विशेष रूप से गाजियाबाद के लोनी इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगभग 500 के खतरनाक स्तर को छू गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात पैदा हो गए हैं. जहरीली हवा के कारण [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नोएडा :</span> </strong>दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण एक बार फिर से गंभीर स्थिति में पहुंच गया है. विशेष रूप से गाजियाबाद के लोनी इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगभग 500 के खतरनाक स्तर को छू गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात पैदा हो गए हैं.</p>
<p>जहरीली हवा के कारण अस्पतालों में सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि देखी जा रही है, जिसमें बुजुर्ग और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली के विभिन्न इलाकों में भी वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति में है.</p>
<p>पूसा में एक्यूआई 341, आरके पुरम में 401, रोहिणी में 424, सोनिया विहार में 396, और वजीरपुर में 442 दर्ज किया गया है. ये सभी स्तर &#8216;बहुत खराब&#8217; से लेकर &#8216;गंभीर&#8217; श्रेणी में आते हैं, जो न केवल स्वस्थ लोगों के लिए हानिकारक हैं, बल्कि पहले से बीमार लोगों की स्थिति को और भी गंभीर बना रहे हैं.</p>
<p>एनसीआर के अन्य शहरों में भी हालात कुछ बेहतर नहीं हैं. नोएडा के सेक्टर-125 में एक्यूआई 438, सेक्टर-116 में 428, और सेक्टर-1 में 399 दर्ज किया गया है. ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-5 में एक्यूआई 431 तक पहुंच गया है. गाजियाबाद के इंदिरापुरम, लोनी, संजय नगर और वसुंधरा जैसे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है.</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, वायु प्रदूषण में पीएम2.5 और पीएम10 के उच्च स्तर मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं, जो सीधे तौर पर फेफड़ों और दिल की बीमारियों को बढ़ावा देते हैं. नवंबर महीने के एयर क्वालिटी कैलेंडर के आंकड़े बताते हैं कि 16 नवंबर को एक्यूआई 419, 18 नवंबर को 434 और 20 नवंबर को 430 तक पहुंच गया था, जो लगातार खराब होती स्थिति की ओर इशारा करता है.</p>
<p>मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 21 से 26 नवंबर के बीच मौसम में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है. कोहरा और हवा की धीमी गति के कारण प्रदूषक तत्व हवा में जमे रहेंगे, जिससे स्थिति में जल्द सुधार की संभावना नहीं है. डॉक्टरों ने लोगों को घर के अंदर रहने, मास्क पहनने और बाहरी गतिविधियों को सीमित करने की सलाह दी है, खासकर उन लोगों को जो पहले से ही सांस या दिल की बीमारियों से पीड़ित हैं.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<title>Delhi : जहरीली हवा ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, नोएडा-गाजियाबाद के कई इलाकों में AQI 400 पार</title>
		<link>https://uditvani.in/new-delhi/delhi-ncr-air-pollution-aqi-crosses-severe-category/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 07:23:50 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[noida]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नोएडा : दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर से लोगों की सांसें अटका दी हैं. दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार पहुंच गया है, जो &#8216;गंभीर&#8217; श्रेणी में आता है. इस स्तर पर वायु प्रदूषण न केवल [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नोएडा :</span> </strong>दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर से लोगों की सांसें अटका दी हैं. दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 के पार पहुंच गया है, जो &#8216;गंभीर&#8217; श्रेणी में आता है.</p>
<p>इस स्तर पर वायु प्रदूषण न केवल स्वस्थ लोगों को प्रभावित करता है, बल्कि पहले से बीमार लोगों की स्थिति और भी गंभीर बना सकता है. नोएडा में स्थिति विशेष रूप से खराब है. शहर के चारों सक्रिय मॉनिटरिंग स्टेशनों ने एक्यूआई के उच्च स्तर दर्ज किए हैं.</p>
<p>नोएडा के सेक्टर-116 में एक्यूआई 439, सेक्टर-1 में 424, सेक्टर-125 में 424 और सेक्टर-62 में 347 दर्ज किया गया है. ग्रेटर नोएडा की स्थिति भी बेहतर नहीं है, जहां नॉलेज पार्क-5 का एक्यूआई 442 और नॉलेज पार्क-3 का एक्यूआई 335 दर्ज किया गया.</p>
<p>गाजियाबाद के प्रदूषण स्तर ने भी चिंता बढ़ा दी है. लोनी में 443 तक पहुंच गया है, जो क्षेत्र में सबसे अधिक है. वहीं, इंदिरापुरम में 428, वसुंधरा में 429 और संजय नगर में 420 दर्ज किया गया.</p>
<p>राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी इस जहरीली हवा से अछूती नहीं है. शहर के विभिन्न हिस्सों जैसे पूसा, आरके पुरम, रोहिणी, शादीपुर, सिरीफोर्ट, सोनिया विहार, श्री अरबिंदो मार्ग, विवेक विहार और वजीरपुर आदि इलाकों में वायु गुणवत्ता &#8216;गंभीर&#8217; या &#8216;बहुत खराब&#8217; श्रेणी में दर्ज की गई है.</p>
<p>नोएडा प्राधिकरण का दावा है कि वह लगातार स्प्रिंकलर और अन्य उपलब्ध साधनों के माध्यम से प्रदूषण को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है. आयोग वायु गुणवत्ता प्रबंधन (सीएक्यूएम) की ओर से 14 अक्टूबर को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) लागू होने के बाद से प्राधिकरण की तरफ से मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित कराया जा रहा है. 19 नवंबर को, प्राधिकरण की 14 टीमों ने नोएडा क्षेत्र के विभिन्न सेक्टरों और गांवों में 95 स्थलों का निरीक्षण किया और लोगों को ग्रेप दिशा-निर्देशों व एनजीटी नियमों के पालन के प्रति जागरूक किया.</p>
<p>प्रदूषण नियंत्रण के लिए 59 टैंकरों के माध्यम से 234.10 किलोमीटर लंबे मुख्य मार्गों पर शोधित जल का छिड़काव किया गया. इसके अलावा, 14 मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों से 340 किलोमीटर सड़कों की सफाई की गई और 23 टैंकरों से पेड़-पौधों की धुलाई का काम कराया गया. अलग-अलग निर्माण स्थलों पर 88 एंटी-स्मॉग गन और 10 ट्रक माउंटेड एंटी-स्मॉग गन संचालित की गईं. साथ ही, 76.15 टन सी एंड डी वेस्ट (निर्माण और विध्वंस कचरे) का उठान और प्रसंस्करण किया गया.</p>
<p>प्राधिकरण की टीमें प्रतिदिन निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर रही हैं और दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा रहा है. हालांकि, इन सभी दावों के बावजूद, हवा में घुली जहरीली धुंध और एक्यूआई के खतरनाक स्तर यह साबित करते हैं कि स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए अभी और अधिक गंभीर और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>National : ग्रेटर नोएडा देश में सबसे ज्यादा प्रदूषित, AQI ने तोड़े सारे रिकॉर्ड; Delhi-NCR का दम घुटा</title>
		<link>https://uditvani.in/new-delhi/delhi-ncr-air-pollution-reaches-hazardous-levels/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 19 Nov 2025 06:47:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नोएडा : दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति पर पहुंच चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. ग्रेटर नोएडा देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में पहले स्थान पर दर्ज किया गया है. मंगलवार को जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 454 तक पहुंचा था, वहीं बुधवार सुबह नॉलेज पार्क–V स्टेशन [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नोएडा :</span></strong> दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्थिति पर पहुंच चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. ग्रेटर नोएडा देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में पहले स्थान पर दर्ज किया गया है. मंगलवार को जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 454 तक पहुंचा था, वहीं बुधवार सुबह नॉलेज पार्क–V स्टेशन पर एक्यूआई बढ़कर 473 तक जा पहुंचा, जो सीजन का सबसे भयावह स्तर है.</p>
<p>यह स्तर ‘गंभीर श्रेणी’ से भी आगे निकल चुका है और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे जीवन के लिए अत्यंत हानिकारक बता रहे हैं. दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है. दिल्ली के कई मॉनिटरिंग स्टेशनों पर एक्यूआई 400 से 450 के बीच रिकॉर्ड किया गया, जबकि नोएडा में सेक्टर-125, सेक्टर-116 और सेक्टर-1 जैसे क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर 430 से 445 के बीच बना हुआ है.</p>
<p>गाजियाबाद में संजय नगर और लोनीमें एक्यूआई 440 से ऊपर दर्ज किया गया, जो दिन-प्रतिदिन बढ़ती प्रदूषण की भयावह तस्वीर पेश करता है. ऐसे हालत तब बने हैं जब दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप -3 (ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान) के नियम लागू हैं. इस चरण में कंस्ट्रक्शन गतिविधियों पर रोक, जेनरेटर सेट पर प्रतिबंध, डीजल ट्रकों की एंट्री पर नियंत्रण और सड़क पर पानी का छिड़काव जैसे कई सख्त कदम उठाए जाते हैं. बावजूद इसके, प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लग रहा है.</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते वाहन, कचरा जलाना, निर्माण कार्य, औद्योगिक धुंआ और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने जैसी वजहें लगातार हवा की गुणवत्ता को और खराब कर रही हैं. उधर मौसम विभाग के अनुसार इस सप्ताह तेज़ हवाओं या बारिश की संभावना नहीं है, वहीं न्यूनतम तापमान लगभग 11 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 26 डिग्री सेल्सियस रहने तथा दिनभर कोहरे की स्थिति बनी रहने से प्रदूषक कण वातावरण में फंसे रहेंगे. इसका मतलब है कि आगामी दिनों में प्रदूषण से राहत की संभावना बेहद कम दिखाई दे रही है.</p>
<p>डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि वर्तमान स्तर की हवा बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और हृदय या श्वास संबंधी रोगियों के लिए अत्यंत खतरनाक है. उन्होंने लोगों को घर के बाहर अनावश्यक न निकलने, मास्क पहनने और सुबह-शाम की सैर टालने की सलाह दी है.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>Delhi : ग्रैप-4 लागू होने की खबरें झूठी और भ्रामक, CAQM ने किया खंडन</title>
		<link>https://uditvani.in/new-delhi/caqm-clarifies-no-grap-phase-4-implemented-misinformation-alert/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 18 Nov 2025 08:04:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[fakenews]]></category>
		<category><![CDATA[Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली : वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने मंगलवार को ग्रैप को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार चैनलों पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं पर स्पष्टीकरण जारी किया. आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि ग्रैप के चौथे चरण लागू होने संबंधी खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं. आयोग [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली :</span> </strong>वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने मंगलवार को ग्रैप को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार चैनलों पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं पर स्पष्टीकरण जारी किया. आयोग ने साफ शब्दों में कहा है कि ग्रैप के चौथे चरण लागू होने संबंधी खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं.</p>
<p>आयोग ने बताया कि फिलहाल पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ग्रैप का तीसरा चरण लागू है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया गया है. इसके बावजूद, कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म और टीवी चैनल ग्रैप के चौथे चरण के लागू होने का दावा कर रहे हैं, जिससे आम जनता में भ्रम की स्थिति बन गई है.</p>
<p>सीएक्यूएम ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए नागरिकों और संबंधित विभागों को केवल आयोग द्वारा जारी आधिकारिक अपडेट, नोटिफिकेशन और प्रेस रिलीज पर भरोसा करना चाहिए. गलत और अपुष्ट जानकारी साझा करना न केवल जनता को भ्रमित करता है, बल्कि प्रदूषण प्रबंधन से जुड़ी तैयारियों और निर्देशों को लेकर असमंजस भी पैदा करता है.</p>
<p>आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रैप के किसी अगले चरण के लागू होने या मौजूदा चरण में बदलाव संबंधी निर्णय की आधिकारिक घोषणा केवल सीएक्यूएम द्वारा ही की जाएगी. साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे असत्यापित खबरों पर ध्यान न दें.</p>
<p>बता दें कि 11 नवंबर को दिल्ली-एनसीआर ग्रैप के तीसरे चरण के प्रतिबंध लागू किए गए थे. इस स्तर को तब लागू किया जाता है जब वायु गुणवत्ता &#8216;सीवियर’ श्रेणी में पहुंच जाती है, यानी हवा में प्रदूषक तत्वों का स्तर स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो जाता है. ग्रैप का तीसरा चरण लागू होने के साथ ही नोएडा प्राधिकरण ने शहर में कई कड़ी पाबंदियों की घोषणा की है.</p>
<p>आदेश के अनुसार, नोएडा क्षेत्र में मेट्रो, अस्पताल और फ्लाईओवर से जुड़ी परियोजनाओं को छोड़कर बाकी सभी निर्माण कार्य तुरंत बंद कर दिए जाएंगे. धूल और प्रदूषक कणों की बड़ी मात्रा निर्माण गतिविधियों से फैलती है, इसलिए यह प्रतिबंध वायु गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. साथ ही, नोएडा में चलने वाले बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल के चार पहिया वाहन प्रतिबंधित कर दिए गए हैं.</p>
<p>इसके अलावा, शहर में कंक्रीट मिश्रण (आरएमसी) प्लांट और स्टोन क्रशर भी अगले आदेश तक बंद रहेंगे, क्योंकि ये धूल और कणीय पदार्थ (पीएम) को हवा में बड़े पैमाने पर फैलाते हैं. इसी तरह भवनों के ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) पर भी पूर्ण रोक लगा दी गई है.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<title>CPCB ने प्रदूषण स्तर के आधार पर उद्योगों के लिए नई श्रेणीकरण प्रणाली लागू की</title>
		<link>https://uditvani.in/corporate/cpbc-industry-pollution-classification-five-categories-india/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 16:44:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Corporate]]></category>
		<category><![CDATA[Industries]]></category>
		<category><![CDATA[Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने उद्योगों को उनके प्रदूषण स्तर के अनुसार वर्गीकृत करने के लिए नई प्रणाली शुरू की है. इस नए ढांचे के तहत अब उद्योगों को पांच श्रेणियों — रेड, ऑरेंज, ग्रीन, व्हाइट और नई जोड़ी गई ब्लू में बांटा जाएगा. यह श्रेणीकरण प्रदूषण सूचकांक के आधार पर [...]</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/corporate/cpbc-industry-pollution-classification-five-categories-india/">CPCB ने प्रदूषण स्तर के आधार पर उद्योगों के लिए नई श्रेणीकरण प्रणाली लागू की</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर : </span></strong>केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने उद्योगों को उनके प्रदूषण स्तर के अनुसार वर्गीकृत करने के लिए नई प्रणाली शुरू की है. इस नए ढांचे के तहत अब उद्योगों को पांच श्रेणियों — रेड, ऑरेंज, ग्रीन, व्हाइट और नई जोड़ी गई ब्लू में बांटा जाएगा. यह श्रेणीकरण प्रदूषण सूचकांक के आधार पर किया जाएगा, जो उद्योगों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन जल प्रदूषण, वायु उत्सर्जन और अपशिष्ट उत्पादन के माध्यम से करता है. रेड श्रेणी में आने वाले उद्योगों पर सबसे अधिक निगरानी रखी जाएगी, जबकि व्हाइट श्रेणी की इकाइयों पर न्यूनतम निगरानी की आवश्यकता होगी.नई नीति का उद्देश्य उद्योगों को स्वच्छ तकनीक अपनाने और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देना है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">नई प्रणाली के प्रमुख लाभ</span></strong></p>
<p><strong>1. बेहतर पर्यावरण प्रबंधन:</strong> निरंतर निगरानी और श्रेणीकरण से औद्योगिक प्रदूषण कम करने और पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी.</p>
<p><strong>2. स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा:</strong> उद्योगों को पर्यावरण-अनुकूल तकनीक और टिकाऊ संचालन पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.</p>
<p><strong>3. अधिक पारदर्शिता:</strong> श्रेणीकरण और नियामक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो जाएंगी.</p>
<p><strong>4. तथ्य फ़ाइल:</strong> नया श्रेणीकरण ढांचा</p>
<p><strong>5. प्रदूषण भार:</strong> उद्योगों को उनके कुल प्रदूषण भार के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा.</p>
<p><strong>6. संचालन का पैमाना:</strong> औद्योगिक संचालन के आकार और क्षमता को भी ध्यान में रखा जाएगा.</p>
<p><strong>7. उत्पादन तकनीक:</strong> मूल्यांकन में उद्योगों द्वारा उपयोग की जा रही उत्पादन तकनीक को शामिल किया जाएगा.</p>
<p><strong>8. इंधन का प्रकार:</strong> उद्योगों में उपयोग होने वाले इंधन का प्रकार भी उनकी श्रेणी को प्रभावित करेगा.</p>
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		<item>
		<title>CPCB ने प्रदूषण स्तर के आधार पर उद्योगों के लिए नई श्रेणीकरण प्रणाली लागू की</title>
		<link>https://uditvani.in/corporate/cpcb-new-industrial-pollution-categories/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 17 Nov 2025 14:43:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Corporate]]></category>
		<category><![CDATA[Industries]]></category>
		<category><![CDATA[Pollution]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, जमशेदपुर : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने उद्योगों को उनके प्रदूषण स्तर के अनुसार वर्गीकृत करने के लिए नई प्रणाली शुरू की है. इस नए ढांचे के तहत अब उद्योगों को पांच श्रेणियों — रेड, ऑरेंज, ग्रीन, व्हाइट और नई जोड़ी गई ब्लू — में बांटा जाएगा. यह श्रेणीकरण प्रदूषण सूचकांक के [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, जमशेदपुर :</span></strong> केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने उद्योगों को उनके प्रदूषण स्तर के अनुसार वर्गीकृत करने के लिए नई प्रणाली शुरू की है. इस नए ढांचे के तहत अब उद्योगों को पांच श्रेणियों — रेड, ऑरेंज, ग्रीन, व्हाइट और नई जोड़ी गई ब्लू — में बांटा जाएगा.</p>
<p>यह श्रेणीकरण प्रदूषण सूचकांक के आधार पर किया जाएगा, जो उद्योगों के पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन जल प्रदूषण, वायु उत्सर्जन और अपशिष्ट उत्पादन के माध्यम से करता है. रेड श्रेणी में आने वाले उद्योगों पर सबसे अधिक निगरानी रखी जाएगी, जबकि व्हाइट श्रेणी की इकाइयों पर न्यूनतम निगरानी की आवश्यकता होगी.</p>
<p>नई नीति का उद्देश्य उद्योगों को स्वच्छ तकनीक अपनाने और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देना है.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">नई प्रणाली के प्रमुख लाभ</span></strong><br />
<strong>बेहतर पर्यावरण प्रबंधन:</strong> निरंतर निगरानी और श्रेणीकरण से औद्योगिक प्रदूषण कम करने और पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी.</p>
<p><strong>स्वच्छ तकनीकों को बढ़ावा:</strong> उद्योगों को पर्यावरण-अनुकूल तकनीक और टिकाऊ संचालन पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.</p>
<p><strong>अधिक पारदर्शिता:</strong> श्रेणीकरण और नियामक प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित हो जाएंगी.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">नया श्रेणीकरण ढांचा</span></strong><br />
<strong>प्रदूषण भार:</strong> उद्योगों को उनके कुल प्रदूषण भार के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा.<br />
<strong>संचालन का पैमाना:</strong> औद्योगिक संचालन के आकार और क्षमता को भी ध्यान में रखा जाएगा.<br />
<strong>उत्पादन तकनीक:</strong> मूल्यांकन में उद्योगों द्वारा उपयोग की जा रही उत्पादन तकनीक को शामिल किया जाएगा.<br />
<strong>इंधन का प्रकार:</strong> उद्योगों में उपयोग होने वाले इंधन का प्रकार भी उनकी श्रेणी को प्रभावित करेगा.<br />
<strong>ब्लू श्रेणी की शुरुआत:</strong> घरेलू स्रोतों से उत्पन्न अपशिष्ट के प्रबंधन से जुड़े पर्यावरणीय सेवाओं को शामिल करने के लिए नई ब्लू श्रेणी जोड़ी गई है.<br />
<strong>अतिरिक्त वैधता:</strong> ब्लू श्रेणी की इकाइयों को उनके प्रदूषण सूचकांक के आधार पर संचालन स्वीकृति प्रमाणपत्र में दो वर्ष की अतिरिक्त वैधता मिलेगी.</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">विस्तारित कवरेज:</span></strong><br />
पहले 257 औद्योगिक क्षेत्रों को अब बढ़ाकर 403 क्षेत्रों, जिसमें उप-क्षेत्र भी शामिल हैं, तक विस्तारित कर दिया गया है.<br />
श्रेणीवार उद्योगों की संख्या:<br />
<strong>रेड श्रेणी:</strong> 125 प्रकार<br />
<strong>ऑरेंज श्रेणी:</strong> 137 प्रकार<br />
<strong>ग्रीन श्रेणी:</strong> 94 प्रकार<br />
<strong>व्हाइट श्रेणी:</strong> 54 प्रकार<br />
<strong>ब्लू श्रेणी:</strong> 9 प्रकार</p>
<p>नई श्रेणीकरण प्रणाली से पर्यावरणीय शासन को मजबूत करने और देशभर में औद्योगिक निगरानी में समानता लाने की उम्मीद है.</p>
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