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	<title>High Court Archives - Udit Vani</title>
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	<description>पत्रकारिता में विश्वसनीयता के चार दशक</description>
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	<title>High Court Archives - Udit Vani</title>
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		<title>झारखंड के जिला न्यायालयों में 6 अप्रैल से शुरू होगा मॉर्निंग कोर्ट; जानें नया समय</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-district-courts-morning-court-timing-april-6/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 05 Apr 2026 08:44:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Judiciary News]]></category>
		<category><![CDATA[Legal News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मॉर्निंग कोर्ट टाइमिंग: सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा न्यायिक कामकाज उदित वाणी, रांची: झारखंड में बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य की सभी जिला अदालतों (District Courts) में आगामी 6 अप्रैल से मॉर्निंग कोर्ट की व्यवस्था लागू कर [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">मॉर्निंग कोर्ट टाइमिंग: सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा न्यायिक कामकाज</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची:</span> </strong>झारखंड में बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है। राज्य की सभी जिला अदालतों (District Courts) में आगामी 6 अप्रैल से मॉर्निंग कोर्ट की व्यवस्था लागू कर दी गई है।<br />
27 जून तक प्रभावी रहेगी व्यवस्था हाईकोर्ट द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह व्यवस्था 6 अप्रैल से 27 जून तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि के दौरान अदालतों में केवल सुबह की पाली में कामकाज संपन्न होगा।</p>
<p><strong><span style="color: #800080;">क्या होगा नया समय? नई व्यवस्था के तहत अदालतों की कार्यवाही का शेड्यूल इस प्रकार रहेगा:</span></strong><br />
• कोर्ट का समय: सुबह 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक<br />
• लंच ब्रेक: सुबह 9:30 बजे से 10:00 बजे तक (आधे घंटे का विश्राम)</p>
<p>सुचारु संचालन के लिए सूचना जारी इस बदलाव के संबंध में झारखंड हाईकोर्ट ने सभी जिला न्यायाधीशों, बार एसोसिएशनों और संबंधित संस्थानों को लिखित सूचना भेज दी है। मॉर्निंग कोर्ट शुरू होने से गर्मी के मौसम में अधिवक्ताओं, मुवक्किलों और अदालती कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।</p>
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		<item>
		<title>jharkhand high court: झारखंड की जेलों में 81 फीसदी पद खाली, सरकार और जेएसएससी की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी</title>
		<link>https://uditvani.in/crime/jamshedpur-crime/jharkhand-high-court-jail-manpower-shortage/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Apr 2026 11:44:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[रांची]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand High Court news]]></category>
		<category><![CDATA[Ranchi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में मैनपावर की भारी कमी पर राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जेलों में रिक्त पड़े पदों को भरने में हो [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची</span>: </strong>झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में मैनपावर की भारी कमी पर राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को कड़ी फटकार लगाई है।</p>
<p>चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने बुधवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जेलों में रिक्त पड़े पदों को भरने में हो रही देरी पर गहरी नाराजगी जताते हुए राज्य के गृह सचिव और जेएसएससी सचिव को 1 मई तक व्यक्तिगत शपथ पत्र के माध्यम से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का अंतिम निर्देश दिया है।</p>
<p>सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि सरकार और जेएसएससी की ओर से रिक्तियों को भरने के संबंध में वास्तविक जानकारी छिपाने की कोशिश की जा रही है। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि केवल समय लेने और आश्वासन देने के नाम पर जेलों में नियुक्ति प्रक्रिया को टालना पूरी तरह अनुचित है।</p>
<p>अदालत ने साफ हिदायत दी कि स्टेटस रिपोर्ट गृह सचिव और जेएसएससी सचिव खुद दाखिल करें, इसे कनीय अधिकारियों के भरोसे न छोड़ें। यदि 1 मई तक दाखिल रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई, तो 7 मई को होने वाली अगली सुनवाई में दोनों अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।</p>
<p>स्वतः संज्ञान से दर्ज इस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कोर्ट को बताया गया कि राज्य की जेलों में स्वीकृत पदों के मुकाबले 81 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। मैनपावर के इस भारी अभाव के कारण जेलों की सुरक्षा और &#8216;मॉडल जेल मैनुअल&#8217; का पालन सुनिश्चित करना लगभग नामुमकिन हो गया है।</p>
<p>हालांकि, सरकार की ओर से दलील दी गई कि असिस्टेंट जेलर, जेल वार्डन और मेडिकल नर्सिंग स्टाफ जैसे पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिए गए हैं और कुछ अन्य पदों के लिए अधियाचना मांगी गई है, लेकिन कोर्ट इन दलीलों से संतुष्ट नजर नहीं आया।</p>
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		<item>
		<title>JHARKHAND: 2018 से अब तक न्यायिक और पुलिस हिरासत में 437 मौतें, हाईकोर्ट ने जताई चिंता</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/437-deaths-in-judicial-and-police-custody-since-2018/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Mar 2026 11:45:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी,रांची : झारखंड में हिरासत में हुई मौतों के मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने एक बार फिर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से दाखिल शपथपत्र का संज्ञान लिया, [...]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी,रांची </strong><strong>: </strong></span>झारखंड में हिरासत में हुई मौतों के मामलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने एक बार फिर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से दाखिल शपथपत्र का संज्ञान लिया, जिसमें वर्ष 2018 से अब तक की हिरासत मौतों का ब्यौरा प्रस्तुत किया गया है।</p>
<p>गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव वंदना दांडेल की ओर से दाखिल शपथपत्र के अनुसार, वर्ष 2018 से अब तक राज्य की जेलों में और पुलिस हिरासत में कुल 437 मौतें हुई हैं। शपथपत्र में यह भी बताया गया कि जेल में हुई मौतों में से केवल 202 मामलों में न्यायिक जांच कराई जा सकी है।</p>
<p>वहीं, पुलिस हिरासत में हुई 39 मौतों में से 11 मामलों में अब तक जांच नहीं हो पाई है। अदालत ने कहा कि पुलिस या न्यायिक हिरासत में मृत्यु, लापता होने या दुष्कर्म के हर मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा न्यायिक जांच अनिवार्य है। ऐसे में जिन मामलों में अब तक जांच नहीं कराई गई है, वह चिंता का विषय है।</p>
<p>खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से इस संबंध में सुझाव मांगा है और पूछा है कि वे आगे क्या राहत चाहते हैं तथा याचिका में उनकी मांग क्या है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।</p>
<p>उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व फरवरी में हुई सुनवाई के दौरान भी हाईकोर्ट ने इसी मुद्दे पर राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी थी। उस समय दायर शपथपत्र में वर्ष 2018 से 2025 के बीच 437 हिरासत मौतों का उल्लेख किया गया था, लेकिन अधिकांश मामलों में यह स्पष्ट नहीं था कि अनिवार्य न्यायिक जांच कराई गई या नहीं।</p>
<p>अदालत ने तब भी कहा था कि हिरासत में मौत के मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच अनिवार्य है। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि वह शपथपत्र के माध्यम से यह स्पष्ट करे कि इन मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जांच कराई गई या नहीं और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन हुआ या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को निर्धारित की गई है।</p>
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		<item>
		<title>TATA STEEL Temporary Workers: टाटा स्टील टेम्पोरेरी पर कल हाई कोर्ट में सुनवाई</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/high-court-hearing-on-tata-steel/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 07:29:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[jamshedpur]]></category>
		<category><![CDATA[Tata Steel]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी,जमशेदपुर : टाटा स्टील में कार्यरत अस्थायी कर्मियों की एक बैठक सत्यनारायण की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई. बैठक में अपने स्थायीकरण को लेकर उच्च न्यायालय झारखंड में चल रहे विवाद पर चर्चा हुई. अस्थायी कर्मियों का कहना है कि उनके स्थायीकरण वाले विवाद पर 26 मार्च को फाइनल डिस्पोजल के लिए सुनवाई की [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी,जमशेदपुर </strong></span>: टाटा स्टील में कार्यरत अस्थायी कर्मियों की एक बैठक सत्यनारायण की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई. बैठक में अपने स्थायीकरण को लेकर उच्च न्यायालय झारखंड में चल रहे विवाद पर चर्चा हुई.</p>
<p>अस्थायी कर्मियों का कहना है कि उनके स्थायीकरण वाले विवाद पर 26 मार्च को फाइनल डिस्पोजल के लिए सुनवाई की तिथि निर्धारित है. अस्थायी कर्मियों द्वारा अपने स्थायीकरण वाले विवाद पर 21 वर्ष पहले संजीत कुमार चक्रवर्ती जो टाटा स्टील के ही अस्थायी कर्मी हैं, इन्होंने अपने स्थायीकरण वाले विवाद पर लेबर कोर्ट जमशेदपुर, सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच झारखंड से अपने पक्ष में वर्ष 2003 में जीत हासिल कर ली है. उसी आदेश को अहम् साक्ष्य के आधार पर अस्थायी कर्मियों ने उच्च न्यायालय में जमा किए हैं.</p>
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		<item>
		<title>दिल्ली हाईकोर्ट ने जमीन के बदले नौकरी घोटाले में लालू यादव के खिलाफ केस रद्द करने से किया इनकार</title>
		<link>https://uditvani.in/new-delhi/lalu-prasad-yadav-delhi-high-court-plea-dismissed/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 18:14:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[new delhi]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[lalu yadav]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, नई दिल्ली : दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कथित भूमि के बदले नौकरी घोटाले के संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज भ्रष्टाचार मामले को रद्द करने की मांग की [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, नई दिल्ली :</span></strong> दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कथित भूमि के बदले नौकरी घोटाले के संबंध में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से दर्ज भ्रष्टाचार मामले को रद्द करने की मांग की गई थी.</p>
<p>जस्टिस रविंदर दुडेजा की एकल-न्यायाधीश पीठ ने एफआईआर, आरोपपत्र और निचली अदालत के संज्ञान आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया. लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में यह तर्क देते हुए याचिका दायर की थी कि सीबीआई ने उनके खिलाफ जांच शुरू करने से पहले भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए के तहत अभियोजन के लिए अनिवार्य मंजूरी प्राप्त नहीं की थी.</p>
<p>उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी पूर्व स्वीकृति के अभाव में, एफआईआर का पंजीकरण और जांच तथा आरोपपत्र दाखिल करने सहित सभी परिणामी कार्यवाही अवैध और प्रारंभ से ही अमान्य हैं. यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले भी इस मामले में मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा.</p>
<p>सर्वोच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद यादव की मुकदमे पर रोक लगाने की मांग वाली विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि दिल्ली हाई कोर्ट को इस याचिका पर निर्णय लेना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि निचली अदालत की कार्यवाही, जिसमें आरोप तय करना भी शामिल है, याचिका के निरस्त करने के फैसले पर निर्भर रहेगी.</p>
<p>यह मामला भारतीय रेलवे में नियुक्तियों के संबंध में है, जिसके तहत पूर्व रेल मंत्री के परिवार के सदस्यों और सहयोगियों को जमीन के प्लॉट ट्रांसफर किए गए थे. सीबीआई ने मई 2022 में लालू यादव और उनकी पत्नी व बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी समेत कई अन्य लोगों के साथ-साथ परिवार के अन्य सदस्यों और अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था.</p>
<p>इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत कई आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए गए. इसी से संबंधित एक घटनाक्रम में दिल्ली हाई कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की ओर से दायर एक अलग याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया था, जिसमें उन्होंने इसी मामले में उनके खिलाफ आरोप तय करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी.</p>
<p>इस साल की शुरुआत में आरोप तय करते समय निचली अदालत ने कहा था कि लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का प्रथम दृष्टया मामला बनता है.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>Jharkhand High Court: युवती की गुमशुदगी के मामले में मुख्य आरोपी का होगा नार्को टेस्ट, झारखंड हाई कोर्ट ने दिया आदेश</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/main-accused-to-undergo-narco-test-in-case-of-missing-young-woman/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 24 Mar 2026 07:07:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जमशेदपुर]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[Ranchi]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो की एक 18 वर्षीय युवती के पिछले आठ महीनों से लापता होने के मामले में सख्त रुख अख्तियार किया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य आरोपी दिनेश महतो का दो सप्ताह के भीतर [...]</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/main-accused-to-undergo-narco-test-in-case-of-missing-young-woman/">Jharkhand High Court: युवती की गुमशुदगी के मामले में मुख्य आरोपी का होगा नार्को टेस्ट, झारखंड हाई कोर्ट ने दिया आदेश</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #800080;"><strong>उदित वाणी, रांची: </strong></span>झारखंड हाई कोर्ट ने बोकारो की एक 18 वर्षीय युवती के पिछले आठ महीनों से लापता होने के मामले में सख्त रुख अख्तियार किया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति दीपक रोशन की खंडपीठ ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य आरोपी दिनेश महतो का दो सप्ताह के भीतर &#8216;नार्को टेस्ट&#8217; करने का आदेश दिया है।</p>
<p>अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई में नार्को टेस्ट की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत की जाए। सुनवाई के दौरान बोकारो एसपी केस डायरी और लोअर कोर्ट रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहे, जिन्हें जांच में सुस्ती और प्रक्रियात्मक खामियों को लेकर हाई कोर्ट की कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा।</p>
<p>अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने में हुई 10 दिनों की देरी पर नाराजगी जाहिर की। रिकॉर्ड के अनुसार, युवती 27 जुलाई 2025 को लापता हुई थी और उसी दिन सनहा दर्ज कराया गया था, लेकिन पुलिस ने 4 अगस्त 2025 को प्राथमिकी दर्ज की। इस &#8216;ढुलमुल&#8217; रवैये पर सरकार की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका।</p>
<p>मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो एसपी ने अदालत को बताया कि इस लापरवाही के लिए पिंडराजोड़ा थाना प्रभारी को &#8216;कारण बताओ&#8217; (शो कॉज) नोटिस जारी कर दिया गया है। प्रार्थी लापता युवती की मां की ओर से अधिवक्ता विंसेंट रोहित मार्की, शांतनु गुप्ता और ऋतुल नंदा ने पक्ष रखते हुए पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।</p>
<p>यह मामला तब और पेचीदा हो गया जब अदालत को बताया गया कि दिसंबर 2025 में युवती के पुणे में होने की सूचना मिली थी। पुलिस ने एक संदिग्ध लोकनाथ महतो को पकड़ा था, जो पुलिस टीम को चकमा देकर ट्रेन से फरार हो गया।</p>
<p>खंडपीठ ने वर्ष 2020 के एक पुराने मामले का हवाला देते हुए पुलिस को चेताया कि पहले भी बोकारो में गुमशुदगी के साल भर बाद युवती की हत्या की बात सामने आई थी, इसलिए ऐसी संवेदनशीलता की कमी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने पूर्व में इस केस को सीबीआई को सौंपने तक की चेतावनी दी थी।</p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/jamshedpur/main-accused-to-undergo-narco-test-in-case-of-missing-young-woman/">Jharkhand High Court: युवती की गुमशुदगी के मामले में मुख्य आरोपी का होगा नार्को टेस्ट, झारखंड हाई कोर्ट ने दिया आदेश</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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		<title>Jharkhand : संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के मामलों में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया अंतिम मौका</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/high-court-lokayukta-appointment-deadline-government/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 18:24:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Government]]></category>
		<category><![CDATA[Hearing]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने लोकायुक्त व सूचना आयुक्त समेत अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के मामलों में राज्य सरकार को अंतिम मौका दिया है. इन मामलों को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span></strong> झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने लोकायुक्त व सूचना आयुक्त समेत अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्ति के मामलों में राज्य सरकार को अंतिम मौका दिया है. इन मामलों को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सोमवार को सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि लोकायुक्त की नियुक्ति इसी माह कर दी जायेगी. इसके लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 25 मार्च को बैठक बुलाई गई है.</p>
<p>इसके साथ सरकार की ओर अदालत से कुछ और समय देने का आग्रह किया गया. इसके बाद अदालत ने सरकार को अंतिम मौका देते हुए एक अप्रैल को मामले की अगली सुनवाई निर्धारित की है. साथ ही खंडपीठ ने कहा कि यदि सरकार द्वारा संवैधानिक पदों पर नियुक्ति नहीं की गई, तो अदालत द्वारा एक अप्रैल को सख्त आदेश जारी किया जाएगा. वहीं अदालत द्वारा सरकार को फिर से समय दिये जाने का प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने विरोध किया.</p>
<p>उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार द्वारा अब तक इस मामले में 50 से अधिक बार समय ली गई है. लेकिन नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. हर बार सरकार द्वारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जाती रही है. लेकिन बर्ष 2020 से अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई. एक बार फिर सरकार नई बात लेकर अदालत पहुंची है. प्रार्थियों ने अदालत से सख्त आदेश जारी करने का आग्रह किया. परंतु अदालत ने कहा कि यदि नियुक्ति नहीं की गई, तो एक अप्रैल को सख्त आदेश जारी किया जाएगा. ज्ञात हो कि मामले में हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन और राजकुमार समेत अन्य द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है.</p>
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		<title>JHARKHAND : हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में समय पर ही होगी JTET परीक्षा- मंत्री</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-jtet-exam-update-student-protest/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 18:01:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
		<category><![CDATA[JTET]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने विधानसभा में घोषणा करते हुए कहा कि जेटेट परीक्षा के संबंध में झारखंड हाईकोर्ट ने 31 मार्च तक का समय दिया है और सरकार न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई कर रही है. उन्होंने सदन को बताया कि परीक्षाएं समय पर कराई जाएंगी. विद्यार्थी अधीर [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने विधानसभा में घोषणा करते हुए कहा कि जेटेट परीक्षा के संबंध में झारखंड हाईकोर्ट ने 31 मार्च तक का समय दिया है और सरकार न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई कर रही है. उन्होंने सदन को बताया कि परीक्षाएं समय पर कराई जाएंगी. विद्यार्थी अधीर न हों.</p>
<p>इस मामले को लेकर आजसू छात्र संघ के छात्रों व जेटेट अभ्यर्थियों पर सोमवार को हुए लाठीचार्ज का मुद्दा सदन में गरमाया. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मामले में सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि झारखंड पात्रता परीक्षा की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.</p>
<p>उन्होंने कहा कि जब सरकार समय पर परीक्षाएं आयोजित नहीं करेगी, तो युवा सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे. इसपर सरकार की ओर से सुदिव्य कुमार ने सदन में जबाब दिया. वहीं मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से निपटने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई.</p>
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		<item>
		<title>JHARKHAND : बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन पर झारखंड हाईकोर्ट ने 19 बिंदुओं में जारी किए निर्देश, 14 साल पुरानी PIL का निपटारा</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-bio-medical-waste-management-guidelines/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 16:52:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Guidelines]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल, 2016 के कठोरतापूर्वक अनुपालन को लेकर गुरुवार को 19 बिंदुओं में अहम निर्देश जारी किए. इसके साथ ही वर्ष 2012 से जनहित याचिका पर चल रही सुनवाई का निपटारा कर दिया गया. अदालत ने कहा कि अब राज्य में नियम लागू करने की [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल, 2016 के कठोरतापूर्वक अनुपालन को लेकर गुरुवार को 19 बिंदुओं में अहम निर्देश जारी किए. इसके साथ ही वर्ष 2012 से जनहित याचिका पर चल रही सुनवाई का निपटारा कर दिया गया.</p>
<p>अदालत ने कहा कि अब राज्य में नियम लागू करने की व्यवस्था काफी हद तक मजबूत हो चुकी है. इसके बाद निर्धारित जिम्मेदारियां अधिकारियों को ही निभानी होंगी. मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने राज्य सरकार को 30 दिनों के भीतर सचिव स्तर के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने को कहा. यह नोडल अधिकारी सभी विभागों के बीच तालमेल बनाकर बायो-मेडिकल कचरे के प्रबंधन की निगरानी करेंगे.</p>
<p>झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (जेएसपीसीबी) को निर्देश दिया गया है कि वह जिलेवार सभी अस्पतालों और अधिकृत कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की सूची अपडेट रखे. कचरे की उत्पत्ति से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक बारकोड और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करने को भी कहा गया है.</p>
<p>हाईकोर्ट ने जेएसपीसीबी को नियमित और औचक निरीक्षण करने का निर्देश दिया. नियमों के उल्लंघन पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. जिलों के उपायुक्तों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अस्पताल का कचरा नगर निगम के सामान्य कचरे में न मिले. 30 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी बनाना अनिवार्य किया गया है. छोटे अस्पतालों को एक जिम्मेदार अधिकारी नामित करना होगा, जिनका संपर्क विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित रहेगा.</p>
<p>यह पीआईएल 2012 में रांची, धनबाद और जमशेदपुर में संक्रमित मेडिकल कचरा खुले में फेंके जाने के आरोपों के बाद दायर हुई थी.</p>
<p>अदालत ने कहा कि पिछले वर्षों में निगरानी के कारण राज्य में ढांचागत सुधार हुए हैं और अब कई ट्रीटमेंट प्लांट काम कर रहे हैं. अदालत ने साफ किया कि स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा है. हालांकि अब लगातार न्यायिक निगरानी की जरूरत नहीं है, लेकिन भविष्य में किसी भी उल्लंघन पर संबंधित पक्ष कानूनी कदम उठा सकते हैं.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
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		<item>
		<title>मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व मंत्री कमलेश सिंह के बेटे-बेटी-दामाद को झारखंड हाईकोर्ट से झटका, याचिका खारिज</title>
		<link>https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-rejects-criminal-revision/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Udit Vani]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Feb 2026 16:33:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[झारखंड]]></category>
		<category><![CDATA[Enforcement Directorate]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[Jharkhand]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उदित वाणी, रांची : झारखंड हाई कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री कमलेश सिंह के बेटे सूर्य सोनल सिंह, पत्नी मधु सिंह, पुत्री अंकिता सिंह और दामाद नरेंद्र मोहन सिंह की क्रिमिनल रिवीजन याचिका खारिज कर दी है. न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की पीठ ने [...]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #800080;">उदित वाणी, रांची :</span> </strong>झारखंड हाई कोर्ट ने आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री कमलेश सिंह के बेटे सूर्य सोनल सिंह, पत्नी मधु सिंह, पुत्री अंकिता सिंह और दामाद नरेंद्र मोहन सिंह की क्रिमिनल रिवीजन याचिका खारिज कर दी है.</p>
<p>न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की पीठ ने यह आदेश पारित किया. हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद निचली अदालत में इस केस की कार्यवाही दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है. उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन रहने के कारण ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया पर रोक लगी हुई थी. अब यह रोक हटने के साथ ही विशेष अदालत में आगे की सुनवाई जारी रह सकेगी. मामले में आरोप पहले ही तय किए जा चुके हैं.</p>
<p>प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोप लगाया है कि पूर्व मंत्री के कार्यकाल के दौरान उनके परिवार के सदस्यों ने कथित रूप से अवैध धन का उपयोग कर संपत्ति अर्जित की और उसे वैध बनाने का प्रयास किया.</p>
<p>एजेंसी का दावा है कि कुल 5 करोड़ 83 लाख 64 हजार 197 रुपए की राशि की मनी लॉन्ड्रिंग की गई. इस संबंध में ईडी ने 10 अक्टूबर 2009 को मामला दर्ज किया था. इस प्रकरण में इससे पहले आरोपियों की ओर से डिस्चार्ज याचिका भी दायर की गई थी, जिसे हाई कोर्ट ने 25 नवंबर 2017 को खारिज कर दिया था. इसके बाद संबंधित आरोपियों ने क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल की थी, जिसे अब निरस्त कर दिया गया है.</p>
<p>ईडी ने आय से अधिक संपत्ति के मामले से जुड़े इस प्रकरण में पूर्व मंत्री, उनकी पत्नी मधु सिंह, पुत्र सूर्य सोनल सिंह, पुत्री अंकिता सिंह और दामाद नरेंद्र मोहन सिंह को आरोपी बनाया गया. एजेंसी का कहना है कि कथित रूप से अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को विभिन्न माध्यमों से वैध दिखाने का प्रयास किया गया.</p>
<p>साल 2017 में रांची स्थित विशेष ईडी अदालत ने सूर्य सोनल सिंह और नरेंद्र मोहन सिंह को न्यायिक हिरासत में भेजा था. एजेंसी ने उस समय भी 5.83 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप दोहराया था.</p>
<p>ताजा आदेश के बाद विशेष अदालत में ट्रायल की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है. ईडी अब गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी. मामले की अगली सुनवाई की तिथि निचली अदालत द्वारा निर्धारित की जाएगी.<br />
<strong>(आईएएनएस)</strong></p>
<p>The post <a href="https://uditvani.in/jharkhand/jharkhand-high-court-rejects-criminal-revision/">मनी लॉन्ड्रिंग केस में पूर्व मंत्री कमलेश सिंह के बेटे-बेटी-दामाद को झारखंड हाईकोर्ट से झटका, याचिका खारिज</a> appeared first on <a href="https://uditvani.in">Udit Vani</a>.</p>
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