
उदित वाणी, जमशेदपुर: टाटा वर्कर्स यूनियन के दो साल का कार्यकाल 11 फरवरी को पूरा होने जा रहा है. अगले साल 2024 की शुरूआत में यूनियन का चुनाव होगा.
ऐसे में वर्तमान यूनियन के लिए अगले एक साल में कई चुनौतियां हैं, जो उनके भविष्य को निर्धारित करेगी. तो आइए आज जानते हैं, वह तीन सबसे बड़ी चुनौतियां, जो यूनियन के भविष्य को तय करेगी.
चुनौती नंबर एक मेडिकल एक्सटेंशन की राशि को जारी रखना
यूनियन के सामने पहली चुनौती मेडिकल एक्सटेंशन के तहत कर्मचारियों को मिलने वाले 7.20 लाख राशि को जारी रखने की होगी. यूनियन के तत्कालीन अध्यक्ष आर रवि प्रसाद ने प्रबंधन के साथ समझौता कर मेडिकल एक्सटेंशन की जगह रिटायर होने वाले कर्मियों को फ्लैट 7.20 लाख रूपए देने पर समझौता किया था.
इस समझौते की मियाद इस साल जून माह में खत्म होने जा रही है. ऐसे में कर्मचारियों का ध्यन यूनियन पर है कि वे इसे जारी रख पाती है या इसमें क्या बदलाव करती है? इस बारे में यूनियन का कहना है कि अभी तक कुछ ठोस नहीं हुआ है लेकिन प्रबंधन के साथ वार्ता जारी है.
चुनौती नंबर दो-कंपनी के कर्मचारियों की संख्या को बरकरार रखना
यूनियन के सामने दूसरी बड़ी चुनौती कंपनी के कर्मचारियों की संख्या को बरकरार रखने की हौगी. टाटा स्टील ने हाल ही में अपनी दो सब्सिडियरी टाटा स्टील सर्विर्सेस लिमिटेड और टाटा स्टील सपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड बनाई है, जिसके जरिए अब नये मैनपावर रखे जाएंगे. ऐसे में आने वाले दिनों में टाटा स्टील के ओल्ड के साथ नये ग्रेड के कर्मियों की संख्या में कमी आएगी.
इससे यूनियन के सदस्यों की संख्या भी कम होगी. कंपनी ने अब अधिकतर नियुक्तियां इन सब्सिडियरी के जरिए करनी शुरू कर दी है.
चुनौती नंबर तीन-डिजिटलाइजेशन के बाद नौकरियां कम होंगी
यूनियन के सामने कर्मचारियों की नौकरी को बचाए रखने की चुनौती भी होगी. डिकार्बोनाइजेशन यानि कार्बन उत्सर्जन को कम करने को लेकर कंपनी लगातार प्लांट को अत्याधुनिक और डिजिटल बना रही है.
ऐसे में एक तो नौकरियां कम होंगी, दूसरे हाई स्किल्ड वर्कर की ज्यादा जरूरत होगी. ऐसे में जो कर्मचारी अपने स्किल को स्केल अप कर पाएंगे, वे बच जाएंगे, नहीं तो बाकी को सेपरेशन के जरिए बाहर होना होगा. ऐसी चुनौतियों को रोकने में यूनियन की अहम भूमिका होगी, क्योंकि कंपनी अब डिजिटल मोड में आ रही है.

